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राम नाम रूपी बूंद को हृदय के धरातल पर गिरने दें

Updated at : 31 Aug 2018 9:19 AM (IST)
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राम नाम रूपी बूंद को हृदय के धरातल पर गिरने दें

हावड़ा के श्याम गार्डन में अयोध्याकांड, श्रीराम वन गमन की कथा सुन भाव विभोर हुए भक्त हावड़ा. राम नाम रूपी इस बूंद को इस हृदय के धरातल पर गिरने दें. यदि पानी की बूंद लगातार गिरने से पत्थर में छिद्र हो सकता है तो इस कथा के राम रूपी बूंद के लगातार गिरने से तुम्हारे […]

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हावड़ा के श्याम गार्डन में अयोध्याकांड, श्रीराम वन गमन की कथा सुन भाव विभोर हुए भक्त
हावड़ा. राम नाम रूपी इस बूंद को इस हृदय के धरातल पर गिरने दें. यदि पानी की बूंद लगातार गिरने से पत्थर में छिद्र हो सकता है तो इस कथा के राम रूपी बूंद के लगातार गिरने से तुम्हारे पत्थर रूप हृदय पर भी एक ना एक दिन छिद्र अवश्य होगा. उक्त बातें राजन जी ने भक्तों से कही.
हम रामजी के रामजी हमारे हैं सेवा ट्रस्ट द्वारा हावड़ा के श्याम गार्डन में आयोजित श्रीरामकथा के छठे दिन अध्योध्या कांड की शुरुआत करते हुए पूज्यश्री राजनजी कहते हैं कि जिस दिन से श्रीरामचंद्र ब्याह कर घर आये तब से अयोध्या नगरी में नित्य आनंद और उल्लास मन रहा है.
बधाइयां गायी जा रही हैं, गोस्वामी जी कहते हैं कि यह दृश्य ऐसा है मानो लोगों के जीवन का पुण्य, बादल बन कर उनके उपर सुख की वर्षा कर रहा हो. कुल मिलाकर अयोध्यावासी परमानंद में हैं. रिद्धि-सिद्धि रूपी संपदा की नदियां अयोध्या रूपी समुद्र की ओर उमड़ पड़ीं हैं.
अयोध्या के सभी नर-नारी सुखी और आनंदित हैं. कथा को आगे विस्तार देते हुए पूज्यश्री राजनजी कहते हैं कि कामना अद्भुत चीज है. एक पूरी नहीं हुई कि दस खड़ी हो जाती है. यह समाप्त होने वाली नहीं. अयोध्या वासियों को कामना ने घेर रखा है. महाराज दशरथ को लाल हो जाए हुआ, चारों भाइयों का यज्ञोपवित हो जाए, श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का विवाह जैसी अयोध्यावासियों की कामनाएं पूरी हुईं.
लेकिन इसके बाद अयोध्यावासियों के मन में श्रीरामचंद्र को अयोध्या का युवराज बनते देखने की नयी कामना जागृत हो गयी. महाराज दशरथ भी कहीं-ना कहीं यही बात सोच रहे थे. उन्होंने अपनी इच्छा कुल गुरु को बताते हुए कहा, गुरुदेव आप जल्द ही एक अच्छा मुहूर्त बताइए जब राम को युवराज घोषित कर दूं. चक्रवर्ती दशरथ जी की बात सुनने के बाद कुलगुरु चिंता में पड़ गये क्योंकि वह त्रिकाल दर्शी हैं.
उन्होंने वर्तमान के साथ भविष्य की भी जानकारी है. वह जानते हैं कि महाराज जिस मुहूर्त की बात कर रहे हैं उसका मुहूर्त तो 14 साल बाद का दिखायी दे रहा है. अयोध्या नरेश व कुल गुरु के वार्तालाप के बाद अगले दिन राम को युवराज घोषित करने का समय तय हुआ. पूज्यश्री राजन जी कहते हैं कि 14 वर्ष बाद श्रीराम को युवराज घोषित करने वाला कल तो आया लेकिन अयोध्या नरेश के जीवन में वह कल नहीं आया.
रामकथा के छठे दिन यजमान के रूप में रवि विष्णु चौमाल, रमा गुप्ता, सुधा चौधरी उपस्थित रहे. इस दौरान पूज्यश्री को माल्यार्पण करने वाले अतिथियों में मीना सिंह, जयकाली मिश्रा, अंजली सिंह, निर्मल गुप्ता, संगीता शर्मा, इंदू सिंह, रमेश भारती और सुरेशचंद्र शुक्ला रहे. इस दौरान श्रीरामकथा आयोजन समिति के मुख्य संरक्षक पं. लक्ष्मीकांत तिवारी और पंडित शिवजी तिवारी विशेष रूप से उपस्थित रहे.
कार्यक्रम को सफल बनाने में जय प्रकाश सिंह, संयोजक भोला सोनकर, शशिधर सिंह, अशोक ठाकुर, प्रदीप तिवारी, विक्की राज सिकरिया, सुशील ओझा, रंजन चौबे, दीपक मिश्रा, रमेश सिंह, राजेश पांडेय, हरेंद्र दूबे, अतुल डालमिया, धनपाल मिश्रा, गुंजन सिंह और पुनीत कुमार सिंह लगे रहे. संचालन समाजसेवी वीरेंद्र शर्मा ने किया.
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