सिलीगुड़ी : गोरखालैंड पर सितंबर में बैठक : अहलुवालिया

Published at :23 Aug 2018 9:05 AM (IST)
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सिलीगुड़ी : गोरखालैंड पर सितंबर में बैठक : अहलुवालिया

बंगाल में शरण लिये रोहिंग्या पर भी होगी चर्चा सिलीगुड़ी : अलग राज्य गोरखालैंड व राज्य में रोहिंग्याओं को अवैध रूप से बसाये जाने के मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्रालय पश्चिम बंगाल राज्य सरकार का रुख जानना चाहती है. इसके लिए सितंबर महीने में केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने एक उच्चस्तरीय बैठक दिल्ली में […]

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बंगाल में शरण लिये रोहिंग्या पर भी होगी चर्चा
सिलीगुड़ी : अलग राज्य गोरखालैंड व राज्य में रोहिंग्याओं को अवैध रूप से बसाये जाने के मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्रालय पश्चिम बंगाल राज्य सरकार का रुख जानना चाहती है.
इसके लिए सितंबर महीने में केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने एक उच्चस्तरीय बैठक दिल्ली में बुलायी है. यह जानकारी केंद्रीय मंत्री सह दार्जिलिंग के सांसद सुरेंद्र सिंह अहलुवालिया ने दी. बुधवार दोपहर को वह सिलीगुड़ी से सटे माटीगाड़ा स्थित अपने आवास में पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे.
श्री अहलुवालिया ने कहा कि अलग राज्य को लेकर बीते वर्ष तीन महीने से अधिक पहाड़ बंद रहने के बाद 26 सितंबर 2017 को गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने आंदोलनकारियों से बंद खत्म करने की अपील की थी.
इसके बाद आंदोलन खत्म हुआ. केंद्र सरकार ने गोरखालैंड मुद्दे पर त्रिपक्षीय वार्ता की पहल की, लेकिन राज्य सरकार ने सहयोग नहीं किया. इधर, कालिम्पोंग जिला के कुछ इलाकों में रोहिंग्याओं को शरण देने का मामला सामने आया है.
रोहिंग्याओं को अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे इलाके में शरण देना देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ होगा. इसलिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इन सभी मुद्दों पर विचार-विमर्श के लिए एक बैठक सितबर महीने में बुलायी है. उन्होंने कहा कि धार्मिक उत्पीड़न के शिकार हुए लोगों को भारत में शरण देने का प्रावधान है. बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न के शिकार हुए हिंदू, सिख, ईसाई या बौद्ध शरणार्थियों के लिए उपयुक्त व्यवस्था की जायेगी. हिंदू शरणार्थियों में मतुआ व नमशूद्र की संख्या अधिक है.
न्यूनतम मजदूरी और जमीन का पट्टा दे सरकार
श्री अहलुवालिया ने कहा कि केंद्रीय टी बोर्ड ने उत्तर बंगाल चाय बागान के लिए 100 करोड़ रुपये आवंटित किये हैं, जिसे राज्य सरकार दबाकर बैठी है. केंद्रीय खाद्य सुरक्षा योजना का भी लाभ चाय श्रमिकों को नहीं मिल रहा है.
टाटा सहित चार कंपनियों के अलावा उत्तर बंगाल के चाय बागानों को चलानेवालीं सभी कंपनियां श्रमिकों के पीएफ व ग्रेच्युटी तक की व्यवस्था नहीं कर रही हैं. भाजपा समर्थित श्रमिक संगठन व ज्वाइंट फोरम ने न्यूनतम मजदूरी के लिए 351 रुपये का आंकड़ा तय किया है, वहीं राज्य सरकार ने मात्र 176 रुपये का प्रस्ताव दिया है. चाय बागान श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी व खाद्य सुरक्षा के साथ केंद्रीय आवास योजना का लाभ भी मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि हाउसिंग फॉर ऑल व अन्य केंद्रीय आवास योजनाओं के लिए जमीन आवश्यक है. यदि राज्य सरकार चाय बागान श्रमिकों को उनके निवास स्थल का पट्टा मुहैया कराये, तो श्रमिकों को भी आवास योजना का लाभ मिल सकेगा.
पकड़े जाने के डर से सीएजी जांच का विरोध
पश्चिम बंगाल में हाउसिंग फॉर ऑल योजना में भारी घोटाला करने का आरोप उन्होंने राज्य सरकार पर लगाया. इन सभी घोटालों की एक उच्चस्तरीय जांच की सिफारिश भी उन्होंने केंद्र सरकार से की है. उन्होंने कहा कि इस योजना को लेकर भी बंगाल में सिंडिकेट राज कायम हो गया है.
इन्हीं घोटालों का पोल खुलने से बचने के लिए राज्य सरकार सीएजी जांच का विरोध कर रही है, जबकि सीएजी एक संवैधानिक एजेंसी है. देश के पाई-पाई का हिसाब करना उसकी जिम्मेदारी है. सीएजी जांच का विरोध करना देश के संविधान पर प्रहार है.
राजनाथ ने की पहल, बंगाल के रुख का इंतजार
दार्जिलिंग-डुआर्स में विमल, फोन पर होती है बात
जुलाई 2017 से पूर्व गोजमुमो प्रमुख विमल गुरुंग भूमिगत हैं. बीच-बीच में वह वीडियो या ऑडियो संदेश जारी करके अपने बारे में जानकारी देते हैं.
विमल गुरुंग के घर की कुर्की कराने के बाद भी पुलिस व सीआइडी उन्हें ढूंढ़ नहीं पायी है. वहीं, श्री अहलुवालिया ने विमल गुरुंग के दार्जिलिंग-डुआर्स में होने का दावा किया है. भाजपा का साथी होने की वजह से विमल को संरक्षण देने का आरोप बार-बार सांसद पर लगता रहा है.
इस बारे में सांसद ने कहा कि अपने संसदीय क्षेत्र में किसी भी व्यक्ति को असंवैधानिक आघात से बचाना उनका कर्तव्य है. विमल के साथ लगातार संपर्क को भी उन्होंने स्वीकार किया है. उन्होंने कहा कि प्रत्येक जनप्रतिनिधि अपने चुनाव क्षेत्र की जनता से संपर्क रखता है. वह भी फोन पर लगातार विमल से संपर्क रखते हैं.
श्री अहलुवालिया ने कहा कि यदि राज्य सरकार अलग राज्य के मसले पर त्रिपक्षीय वार्ता को राजी नहीं होती है, तो केंद्र सरकार द्विपक्षीय वार्ता कर स्थिति को शांत करेगी. स्थिति का जायजा लेने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं दार्जिलिंग व डुआर्स का दौरा करेंगे.
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