डुआर्स के चाय बागानों में श्रमिकों ने की गेट मीटिंग
Updated at : 03 Jul 2018 1:57 AM (IST)
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कालचीनी/नागराकाटा : पंचायत चुनाव खत्म होते ही चाय श्रमिकों के न्यूनतम मजदूरी मुद्दे को लेकर बिगुल फूंक दिया है. इसकी शुरूआत सोमवार से शुरू हो गयी. दो जुलाई से पूरे माह तक श्रमिक संगठनों ने लगातार आन्दोलन की रूपरेखा तैयार की है. चाय बागान श्रमिकों के न्यूनतम मजदूरी, राशन के लिए 660 रुपए देने, जमीन […]
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कालचीनी/नागराकाटा : पंचायत चुनाव खत्म होते ही चाय श्रमिकों के न्यूनतम मजदूरी मुद्दे को लेकर बिगुल फूंक दिया है. इसकी शुरूआत सोमवार से शुरू हो गयी. दो जुलाई से पूरे माह तक श्रमिक संगठनों ने लगातार आन्दोलन की रूपरेखा तैयार की है. चाय बागान श्रमिकों के न्यूनतम मजदूरी, राशन के लिए 660 रुपए देने, जमीन पट्टा आदि मांगों को लेकर गेट मीटिंग आयोजित की गयी.
कालचीनी ब्लॉक समेत अलीपुरद्वार जिले के विभिन्न चाय बागानों में ज्वाइंट फोरम की ओर से दो घंटे तक बैठक की गयी. वहीं मालिक संगठनों ने रेन फ्लर्श के नाम से परिचित उत्पादन के पिक सीजन में आंदोलन से भारी नुकसान की आशंका जता रहे है.
कालचीनी ब्लॉक के ज्वाइंट फोरम कन्वेनर जॉन फिलिप खालको ने कहा कि बागान श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी सहित विभिन्न मांगों को लेकर लगातार आन्दोलन की तैयारी की जा रही है. फोरम 2, 3, 4 जुलाई को बागान में गेट मीटिंग का आयोजन करेगा. 5 व 6 जुलाई को काम के बाद मशाल रैली एवं 7 व 8 जुलाई को साईकिल रैली निकाली जायेगी. वहीं 9 से 10 जुलाई को सिलीगुड़ी में टी बोर्ड कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन सहित डीबीआईटीए, टाई व अन्य सरकारी कार्यालयों में मांग पत्र सौंपा जायेगा. 23 व 24 जुलाई को चाय बागान में हड़ताल व 25 जुलाई को आम हड़ताल बुलाया जायेगा.
इधर चाय मालिकों का कहना है कि सिर्फ एक दिन के गेट मीटिंग से उत्पादन में 75 फीसदी नुकसान होता है. लगातार 7 दिनों तक गेट मीटिंग के साथ ही अन्य कार्यक्रमों से उत्पादन को भारी नुकसान होने वाला है. मालिक पक्ष के शीर्ष संगठन कनसलटेटिव कमेटी ऑफ प्लांटर्स एसोसिएशन (सीसीपीए) के संयोजक अमितांशु चक्रवर्ती ने भी भारी क्षति की आशंका जतायी है.
उन्होंने बताया कि इससे पहले से ही खराब हालत में चल रहे बागान मालिक इस स्थिति में श्रमिकों का बकाया चुकाने की स्थिति में नहीं रहेंगे. टाई के डुआर्स शाखा के सचिव राम अवतार शर्मा ने बताया कि समस्या को लेकर चर्चा करनी चाहिए. चाय उद्योग के प्राइम टाइम में एक महीने तक काम नहीं होने से पत्ती तोड़ने का समय सीमा पीछे चला जायेगा. इससे चाय की गुणवत्ता खराब हो जायेगी. इस पर ज्वाइंट फोरम के संयोजक आलोक चक्रवर्ती ने बताया कि फायदा तो मालिकों को सालभर होता है.
लेकिन श्रमिकों के हितों पर ध्यान कभी जाता ही नहीं है. जॉन बारला का कहना है कि मजदूरी वृद्धि के 9 महीने का एरियर्स व 22 महीने के राशन का एरियर्स प्रदान करने को लेकर मालिक संगठन खामोश है. श्रमिकों को हक ना मिले तो जवाब मांगा ही जायेगा. श्रमिक आन्दोलन करने को बाध्य है.
तृणमूल ने ज्वाइंट फोरम के आंदोलन का किया विरोध
नागराकाटा. नागराकाटा के विभिन्न चाय बागानों में सोमवार को दो दिवसीय गेट मीटिंग शुरू हो गया. ज्वाइंट फोरम की ओर यह आंदोलन नागराकाटा ब्लॉक के चंपागुड़ी, होपचाय बागान, जिती चाय बागान, लुकसान, अपर चेंगमारी में श्रमिकों ने गेट मीटिंग किया. ज्वाइंट फोरम मनि कुमार दर्नाल, जियाउल आलम और संतोष हाती ने बताया कि न्यूतम मजदूरी एवं राशन, जमीन पट्टा, बंद चाय बागानों को चालू करने समेत अन्य मांगों को लेकर गेट मीटिंग शुरू हो गया.
वहीं शासक दल ने आंदोलन को दिशाहीन बताया. नागराकाटा ब्लॉक तृणमूल सभापति अमरनाथ झा ने कहा विरोधियों के पास जनता के समक्ष जाने का कोई मुद्दा नहीं है. इसलिए चाय बागानों के भोलेभाले श्रमिकों को गुमराह कर रहे हैं. दरअसल न्यूतम मजदूरी की मांग तृणमूल ने ही किया है. श्री झा ने कहा कि ज्वाइंट फोरम के आंदोलन का हम विरोध करेंगे. गेट मीटिंग कर श्रमिकों समझायेंगे.
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