प्रधानमंत्री ने खुद बढ़ कर ले ली सेल्फी

Published at :28 Jan 2018 5:05 AM (IST)
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प्रधानमंत्री ने खुद बढ़ कर ले ली सेल्फी

दिल्ली में छा गये एंबुलेंस दादा मेहमानों के बीच पीएम मोदी ने पहचाना चेल नदी पर पुल जल्द नाने का आश्वासन राजपथ पर राहुल गांधी से भी मिले सिलीगुड़ी/मयनागुड़ी : प्रधानमंत्री मोदी के साथ सेल्फी किसी साधारण आदमी के लिए बड़ी बात है. लेकिन, पीएम खुद अपने हाथ से उसके साथ सेल्फी खींचे, तो यह […]

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दिल्ली में छा गये एंबुलेंस दादा

मेहमानों के बीच पीएम मोदी ने पहचाना
चेल नदी पर पुल जल्द नाने का आश्वासन
राजपथ पर राहुल गांधी से भी मिले
सिलीगुड़ी/मयनागुड़ी : प्रधानमंत्री मोदी के साथ सेल्फी किसी साधारण आदमी के लिए बड़ी बात है. लेकिन, पीएम खुद अपने हाथ से उसके साथ सेल्फी खींचे, तो यह और भी खास हो जाता है. कुछ ऐसा ही एंबुलेंस दादा के नाम से मशहूर डुवार्स के रहनेवाले करीमुल हक के साथ हुआ.
प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति भवन में इस वर्ष आयोजित ‘एट होम रिसेप्शन’ कार्यक्रम मेहमानों के बीच बैठे पद्मश्री करीमुल हक को ना केवल पहचान लिया, बल्कि उनके साथ सेल्फी भी ली. दो दिनों तक राष्ट्रपित भवन से न्यौता मिलने के बाद भी पैसे की तंगी से दिल्ली नहीं जा पाने की संभावना से जो करीमुल निराश थे, वही दिल्ली जाते ही छा गये.
उल्लेखनीय है कि प्रभात खबर में ने पैसे की तंगी के कारण करीमुल के नयी दिल्ली नहीं जा पाने की खबर प्रकाशित की थी. उसके बाद विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों ने उनकी मदद की. अपनी बाइक से मुफ्त एंबुलेंस सेवा देनेवाले करीमुल हक को 2017 के पद्मश्री अवॉर्ड से नवाजा गया है.
प्रधानमंत्री ने खुद…
बहरहाल राष्ट्रपति भवन में प्रोटोकॉल से इतर करीमुल को प्रधानमंत्री के साथ बातचीत का वो कीमती वक्त मिला.प्रधानमंत्री मोदी बैरिकेडिंग लाइन से बाहर जाकर करीमुल हक के सामने खड़े हो गये और उनसे बातचीत के लिए रुक गये. उसके बाद करीमुल हक ने पीएम मोदी के साथ सेल्फी की इच्छा जाहिर की, लेकिन जैसे करीमुल ने मोबाइल से निकाला, तो उनके हाथ कांपने लगे. उसके बाद पीएम मोदी ने करीमुल को बीच में रोककर सेल्फी अपने हाथों से खींचने की बात कही. उसके बाद दोनों के बीच कुछ देर तक बातचीत भी हुई.
करीमुल ने उनसे डुवार्स के चेल नदी पर पुल बनाने की मांग की, जिसे प्रधानमंत्री ने मान लिया है. साथ ही जल्द चेल नदी पर पुल बनवाने का उन्होंने वादा भी किया. इससे पहले करीमुल हक ने 26 जनवरी को दिल्ली के राजपथ पर भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री सहित उच्चाधिकारियों के साथ बैठकर गणतंत्र दिवस कार्यक्रम का भी आनंद लिया. दिल्ली के राजपथ पर करीमुल ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से भी मुलाकात की.
इस बार गणतंत्र दिवस के मौके पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में शामिल होने के लिए पद्मश्री करीमुल हक को भी राष्ट्रपति भवन से न्योता मिला था. वह इस न्योते को पाकर काफी खुश थे. लेकिन उनकी सबसे बड़ी समस्या यह थी कि वह आखिर किस तरह से दिल्ली जायेंगे, क्योंकि दिल्ली आने-जाने तथा वहां रहने के लिए आवश्यक रुपये की कोई व्यवस्था नहीं थी. इसी कारण से करीमुल हक परेशान थे और आखिरकार उन्होंने दिल्ली जाने का इरादा भी त्याग दिया था.
घर लौटे करीमुल
करीमुल हक दिल्ली सफर से शनिवार को अपने घर जलपाइगुड़ी के क्रांति स्थित घर पहुंच गये हैं. उन्होंने दिल्ली जाने के लिए मदद करने वाले संगठनों को धन्यवाद भी दिया है. श्री हक ने बताया कि वह राजपथ में गणतंत्र दिवस समारोह में भी शामिल हुए थे. राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह का भी हिस्सा बने.
नहीं जा पा रहे थे दिल्ली, पहुंचे तो मिला नायाब तोहफा
प्रभात खबर ने चलायी थी मुहिम
पैसे के अभाव में करीमुल हक के दिल्ली नहीं जा पाने की खबर प्रभात खबर में 22 तारीख के अंक में प्रकाशित हुई. उसके बाद सामाजिक संगठनों तथा समाजसेवियों के बीच खलबली मच गयी. सिलीगुड़ी के साथ ही कोलकाता के भी कई संगठन करीमुल हक की मदद के लिए सामने आये और उनके दिल्ली आने-जाने की समस्या खत्म हो गयी है. रोटरी क्लब ऑफ सिलीगुड़ी सेंट्रल ने उनके दिल्ली आने-जाने तथा रहने आदि की व्यवस्था की.
महज 5000 रुपये है तनख्वाह
सिलीगुड़ी सहित पूरे उत्तर बंगाल में एम्बुलेंस दादा के नाम से मशहूर पद्मश्री करीमुल हक आखिरकार राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में शामिल होने के लिए 25 तारीख को दिल्ली गये. उनके दिल्ली जाने की सभी आवश्यक तैयारियां कुछ सामाजिक संगठनों द्वारा की गयी. वह 25 जनवरी को विमान से नयी दिल्ली के लिए रवाना हुए. करीमुल हक एक दशक से भी अधिक समय से अपनी बाइक के बीमार मरीजों अस्पताल पहुंचाने का काम करते हैं. उनकी यह सेवा पूरी तरह से नि:शुल्क है. उनके इसी सेवा को देखते हुए भारत सरकार ने उनको पद्मश्री सम्मान प्रदान किया है. करीमुल हक की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है. उसके बाद भी वह अपने खर्च पर गरीब मरीजों अस्पताल पहुंचाने का काम करते हैं. वह एक चाय बागान में पांच हजार रुपये मासिक पर काम करते हैं.
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