जीसएटी से अनारस किसान व कारोबारी हुए पस्त

Updated at :13 Jul 2017 10:34 AM
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जीसएटी से अनारस किसान व कारोबारी हुए पस्त

सिलीगुड़ी. वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की मार से अनारस व्यवसायी व किसानों की हालत खस्ता हो चली है. उत्पादन मूल्य वसूलना ही किसानों के सिरदर्द बन गया है. लाभ कमाने से अधिक किसी तरह अनारस खपाने की चिंता व्यवसायियों को सता रही है. अनारस की कीमत गिरकर आठ से दस रुपये हो गयी है. […]

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सिलीगुड़ी. वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की मार से अनारस व्यवसायी व किसानों की हालत खस्ता हो चली है. उत्पादन मूल्य वसूलना ही किसानों के सिरदर्द बन गया है. लाभ कमाने से अधिक किसी तरह अनारस खपाने की चिंता व्यवसायियों को सता रही है. अनारस की कीमत गिरकर आठ से दस रुपये हो गयी है. बाजार की कमी अनारस किसानों की कमर तोड़ रही है.

सिलीगुड़ी महकमा के अंतर्गत विधान नगर इलाका अनारस से लिए मशहूर है. यहां से उत्पादित अनारस पड़ोस के देशों में भी भेजा जाता है. लेकिन जीएसटी ने अनारस की खेती करनेवाले किसानों को इस बार रुला दिया है. स्थिति यह है कि पड़ोसी देश नेपाल सहित अन्य देशों में अनारस का निर्यात संभव नहीं हो पा रहा है. दूसरी तरफ सिलीगुड़ी सहित पड़ोसी राज्यों में भी उचित कीमत नहीं मिल रही है. पंजाब, हरियाणा आदि राज्यों में भी अनारस की मांग अचानक घट गयी है.

जीएसटी लागू होने के पहले अनारस बेचनेवाले किसानों को अच्छा लाभ हुआ, लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद से अनारस की मांग अचानक घटने से लाभ कमाने की आस लगाये बैठे किसान भारी नुकसान की चपेट में है. जीएसटी की वजह से कस्टम विभाग अनारस ट्रकों को अंतरराष्ट्रीय सीमा पार होने नहीं दे रहा है.

गौरतलब है कि गत एक जुलाई को पूरे देश में एक देश एक कर (जीएसटी) लागू कर दिया गया है. पिछले कई वर्षों से चली आ रही पुरानी टैक्स प्रणाली छोड़कर जीएसटी के तहत काम करने में व्यापारियों को दिक्कतें आ रही हैं. जीएसटी प्रणाली को लेकर सरकारी अधिकारी भी उलझन में है. अब विदेशों में अनारस निर्यात पर जीएसटी की कौन सी धारा लागू होगी, इसे लेकर कस्टम अधिकारी माथा लड़ा रहे हैं. जीएसटी लागू होने के बाद पड़ोसी देशों में अनारस का निर्यात अचानक बंद हो गया है. इसका भारी नुकसान किसानों व अनारस व्यवसायियों को झेलना पड़ रहा है.

विधान नगर के अनारस व्यवसायी का कहना है कि जीएसटी लागू होने से पहले जिन किसानों ने खेत से अनारस निकालकर पड़ोसी देश नेपाल सहित पड़ोसी राज्यों में भेज दिया, उनकी तो बल्ले-बल्ले है. लेकिन एक जुलाई के बाद से कस्टम अधिकारी अनारस से लदे ट्रकों को अंतरराष्ट्रीय सीमा पार नहीं करने दे रहे हैं. फलस्वरूप सीमा से ट्रक वापस लौट रहे हैं. वास्तविकता यह है कि निर्यात के लिये अनारस पर जीएसटी की कौन सी धारा लागू होगी, यह कस्टम अधिकारियों की समझ से परे है. अनारस के संबंध में उन्हें कोई लिखित निर्देशिका नहीं मिली है. जिसकी वजह से समस्या खड़ी हो रही है. इस संबंध में सिलीगुड़ी के निकट पानीटंकी स्थित इंडो-नेपाल बॉर्डर पर तैनात कस्टम अधिकारी मुंह नहीं खोल रहे हैं.

अनारस की खेती करने वाले किसानों के समक्ष दुविधा भरी स्थिति खड़ी हो गयी है. एक तरफ उचित कीमत नहीं मिल रहा है. दूसरी तरफ अनारस बाजार की मौजूदा स्थिति की वजह से किसान खेतों से फल निकालना नहीं चाह रहे हैं. वहीं वर्षा में फल खेत में ही खराब होने का डर भी उन्हें सता रहा है. विधान नगर अनारस व्यवसायी समिति के अध्यक्ष सह सिलीगुड़ी महकमा परिषद के विरोधी दल नेता काजल घोष ने बताया कि अनारस की खेती करने वाले किसान व व्यवसायी भारी नुकसान की ओर लगातार बढ़ रहे हैं. केंद्र सरकार ने जीएसटी तो लागू कर दिया, लेकिन अनारस के संबंध में कस्टम को जानकारी नही दी.

पड़ोसी देश नेपाल में विधान नगर के अनारस का काफी बड़ा बाजार है. प्रतिवर्ष काफी भारी मात्रा में अनारस नेपाल निर्यात किया जाता है. इस वर्ष जीएसटी की मार ने अनारस किसानों की कमर तोड़ दी है. सरकारी निर्देश आने तक अनारस को खेत में छोड़ भी नहीं जा सकता. वर्षा के इस मौसम में खेत में ही फल खराब होने की आशंक भी अधिक है. जीएसटी लागू होने के पहले डेढ़ किलो वजह वजन वाले अनारस की तीस रुपये प्रति पीस बिक्री हुई है, वहीं जीएसटी और मौसम की मार से परेशान किसान 8 से 10 रुपये प्रति पीस बेचने को मजबूर हैं.

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