सिर्फ दार्जिलिंग ही नहीं आंदोलन से सिक्किम और सिलीगुड़ी भी प्रभावित
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :08 Jul 2017 4:40 PM
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( विपिन राय व डिजिटल डेस्क) गंगटोक : दार्जिलिंग से 15 किमी दूर सोनाडा में एक युवक का शव बरामद होने के बाद हिंसा फिर से भड़क उठी है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस ने आधी रात को उस वक्त गोली मार दी, जब वह दवा लेकर घर जा रहा था. दार्जिलिंग पर्वतीय […]
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( विपिन राय व डिजिटल डेस्क)
गंगटोक : दार्जिलिंग से 15 किमी दूर सोनाडा में एक युवक का शव बरामद होने के बाद हिंसा फिर से भड़क उठी है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस ने आधी रात को उस वक्त गोली मार दी, जब वह दवा लेकर घर जा रहा था. दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में अलग गोरखालैंड राज्य की मांग में जारी आंदोलन ने न केवल समतल क्षेत्र सिलीगुड़ी को प्रभावित किया है, बल्कि पड़ोसी राज्य सिक्किम के अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी तोड़ दी है. 80 के दशक में गोरखालैंड आंदोलनकी शुरूआत हुई और तब से लेकर अब तक करीब 32 वर्षों में इस आंदोलनने सिक्किम को भी बुरीतरह से प्रभावित किया है. पिछले 24 दिनों सेदार्जिलिंग पहाड़ पर नयेसिरे से गोरखालैंडआंदोलन जारी है और इसका असर सिक्किम परपड़ रहा है. राज्य में जनजीवन पर इसकासीधा असर पड़ा है.पिछले दिनों हालत इतनी बिगड़ गई कि सिक्किम के गंगतोक और सिलीगुड़ी के बीच वाहनोंकी आवाजाही बंद करदेनी पड़ी थी.
सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन कुमारचामलिंग ने गोरखालैंडकी मांग का समर्थन किया है. कुछ सप्ताह पहले उन्होंने केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह को भी चिट्ठी लिखी थी और अलग गोरखालैंड राज्य की मांग का समर्थन किया था. उसके बाद से सिलीगुड़ी के लोगों में सिक्किम के प्रति उबाल है. सिक्किम नंबर के वाहनों में तोड़फोड़ कीघटनाएं हुई हैं और वहां के लोगों के साथ मारपीट भी की गई. आये दिन विभिन्न खाद्य सामग्रियों को लेकर सिक्किम जाने वाले वाहनों को रोकने की घटनाएं घट रही हैं.सिलीगुड़ी में इस प्रतिक्रिया का असर सिक्किम में भी देखने कोमिल रहा है.
वहां के लोगोंमें भी पश्चिम बंगाल के प्रति नाराजगी बढ़ती जारही है. राज्य सरकार कीमाने तो गोरखालैंड आंदोलन से सिक्किम को अब तक 60 हजार करोड़ रुपये से अधिक कानुकसान हो चुका है. सिक्किम को सिलीगुड़ी से जोड़ने के लिए एकमात्र सड़क एनएच-10 है. इसे सिक्किम की जीवन रेखा भी कहा जा सकता है.यही एनएच-10 इन दिनोंप्रमुख राजनीतिक अखाड़ा बना हुआ है. यह सड़क दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र के कालिम्पोंग थाना अंतर्गत होते हुए भी सिक्किम जाती है. इसी इलाके में गोरखालैंड आंदोलनकारी उत्पात मचाते हैं. सुप्रीम कोर्ट नेबंद के दौरान इस सड़क को डिस्टर्ब नहीं करने का स्पष्ट आदेश दिया है.उसके बाद भी आंदोलनकारी बाज नहीं आ रहे हैं.
गोरखालैंड आंदोलन का सिक्किम परअसर का अंदाजा इसीबात से लगाया जा सकता है कि पिछले 32 वर्षों के आंदोलन के दौरान सिक्किम नंबर के पांच हजार वाहनों में तोड़फोड़ की गई. इसके अलावा दर्जनों वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया.सिक्किम के लोगों कामान है कि यह आंदोलन पश्चिम बंगाल मेंहो रहा है और वहां की सरकार को ही इससे निपटना चाहिए. पश्चिमबंगाल में चल रहे आंदोलन का खामियाजा भला सिक्किम के लोगक्यों भुगतेंगे.
इधर, मुख्यमंत्री पवनचामलिंग ने भी इस आंदोलन की वजह से सिक्किम को हो रहेनुकसान पर अपनी गहरी नाराजगी जतायी है.उन्होंने इस मामले में केन्द्रसरकार से हस्तक्षेप कीमांग की है. उन्होंने केन्द्र सरकार को लिखी चिट्ठी में कहा है कि पश्चिम बंगालके आंतरिक मामले में वहहस्तक्षेप नहीं करनाचाहते. लेकिन गोरखालैंड आंदोलन से सिक्किम को परेशानी हो रही है. केन्द्र सरकार को तत्काल इसमामले में हस्तक्षेप कर समस्या का समाधानकरना चाहिए. ऐसा नहीं करने पर उन्होंने सुप्रीमकोर्ट जाने की भी धमकी दी.
क्या कहते हैं मुख्यमंत्री
सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग का कहना है कि सिक्किम जनमत संग्रह के बाद भारत में शामिल हुआ था.भारत में शामिल होने केबाद यहां के लोग पूरीतरह से भारतीय हो गये हैं और देश की एकता एवंअखंडता के लिए काम कर रहे हैं. जिस समय सिक्किम को 22वें राज्य के रूप में भारत में शामिल किया गया, उस समय जनमत संग्रहआंदोलन में वह भी शरीक हुए थे. सिक्किम के 98 प्रतिशत लोगों ने सिक्किम को भारत में शामिल करनेका निर्णय लिया था. मात्रदो प्रतिशत लोग ही इसके विरोधी थे. इससे जाहिर है कि सिक्किम के लोगों में देश के प्रति कितनी आस्था है. केन्द्र सरकारको भी इसका ध्यानरखना चाहिए.
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