जीटीए का कार्यकाल खत्म होने के बाद आंदोलन का औचित्य नहीं, ऑडिट के फैसले से गोजमुमो में घबराहट : बिन्नी शर्मा

Updated at :01 Jul 2017 10:58 AM
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जीटीए का कार्यकाल खत्म होने के बाद आंदोलन का औचित्य नहीं, ऑडिट के फैसले से गोजमुमो में घबराहट : बिन्नी शर्मा

सिलीगुड़ी. दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में गोरखालैंड आंदोलन शुरू होने के बाद गोजमुमो द्वारा तृणमूल नेताओं को लगातार निशान बनाये जाने के बाद भी तृणमूल नेता बिन्नी शर्मा का गोजमुमो के खिलाफ हमला जारी है. पहाड़ पर हिंसा के बाद वह इन दिनों सिलीगुड़ी में हैं. सिलीगुड़ी जर्नलिस्ट क्लब में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए उन्होंने […]

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सिलीगुड़ी. दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में गोरखालैंड आंदोलन शुरू होने के बाद गोजमुमो द्वारा तृणमूल नेताओं को लगातार निशान बनाये जाने के बाद भी तृणमूल नेता बिन्नी शर्मा का गोजमुमो के खिलाफ हमला जारी है. पहाड़ पर हिंसा के बाद वह इन दिनों सिलीगुड़ी में हैं. सिलीगुड़ी जर्नलिस्ट क्लब में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि अलग गोरखालैंड राज्य के लिए पहाड़ पर आंदोलन करने वाले कोई भी नेता ईमानदार नहीं है. पहले गोरामुमो के द्वारा पहाड़ पर आंदोलन हुआ. तब 1250 से अधिक लोग मारे गये. गोरखालैंड नहीं बना. इस बार गोजमुमो द्वारा आंदोलन किया जा रहा है. यह आंदोलन भी हिंसक हो गया है और अब तक आठ लोगों की जान चली गई है. उसके बाद भी गोरखालैंड बनेगा कि नहीं, ठीक नहीं है.

दरअसल आंदोलन कर रहे लोग गोरखालैंउ चाहते ही नहीं हैं. वह गोरखालैंड के नाम पर सत्ता सुख भोगना चाहते हैं. 1986 में गोरामुमो के आंदोलन के बाद दार्जिलिंग गोरखा पार्वत्य परिषद (दागोपाप) का गठन हुआ. 21 साल तक गोरखालैंड आंदोलन करने वाले नेता सत्ता सुख भोगते रहे. 2007 से नये सिरे से गोरखालैंड आंदोलन शुरू हुआ और इसकी अगुवायी करने वाले गोजमुमो के नेता गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन (जीटीए) लेकर पांच साल तक सत्ता सुख भोगते रहे.

अब जीटीए का कार्यकाल समाप्त हो गया है, तो उनको एक बार फिर से गोरखालैंड की याद आयी है. अलग राज्य के नाम पर यह लोग पहाड़ के लोगों को बरगलाने के अलावा कुछ नहीं कर रहे हैं. पांच साल तक जीटीए में जमकर भ्रष्टाचार हुआ. राज्य सरकार द्वारा अब जीटीए के विभागों की ऑडिट करायी जा रही है. उसके बाद एक बार फिर से गोजमुमो नेताओं को गोरखालैंड की याद आ रही है. जिन-जिन कार्यालयों में स्पेशल ऑडिट कराने की बात हो रही है, उन्हीं कार्यालयों को आग के हवाले किया जा रहा है. आग लगाने अथवा हिंसा से गोरखालैंड राज्य नहीं बनेगा. उन्होंने कहा कि यदि तृणमूल नेताओं का घर जलाने से गोरखालैंड बन जाता है, तो वह अपना घर भी गोजमुमो समर्थकों को जला देने के लिए कहेंगे.

गोरखालैंड पर निर्णय दिल्ली का : संवाददाता सम्मेलन में उपस्थित हिल्स तृणमूल अध्यक्ष राजेन मुखिया ने कहा कि गोरखालैंड पर निर्णय राज्य सरकार को नहीं लेना है. अलग राज्य बनाने का अधिकार केन्द्र सरकार को है. दिल्ली में इसका निर्णय होना है और हिंसा यहां फैलायी जा रही है. इससे कोई लाभ नहीं होगा. केन्द्र सरकार ही इस मामले में चुप्पी साधे बैठी है.

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