पहाड़ पर अशांति से तृणमूल में बेचैनी

सिलीगुड़ी: अलग गोरखालैंड राज्य की मांग को लेकर दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में जारी आंदोलन के बाद तृणमूल कांग्रेस शिविर में खलबली मची हुई है. आलम यह है कि पहाड़ पर तृणमूल के तमाम आला नेता ही नहीं, बल्कि कार्यकर्ता भी घर छोड़कर सिलीगुड़ी आ गये हैं. इन लोगों ने सिलीगुड़ी में बनाये गये विभिन्न कैम्पों […]
उन्होंने आगे कहा कि गोरखालैंड राज्य को लेकर सभी पक्ष के लोगों को आपस में बातचीत करनी चाहिए. मारकाट से कोई लाभ नहीं होगा. 1986 में भी गोरखालैंड आंदोलन हुआ था और उस समय 1250 लोग मारे गये थे. 2007 में बिमल गुरुंग के नेतृत्व में गोजमुमो के नाम से नयी पार्टी बनी और फिर गोरखालैंड आंदोलन शुरू हो गया. इस बार भी अब तक आठ लोग मारे जा चुके हैं.
उन्होंने राज्य सरकार से भी आंदोलनकारियों से बातचीत करने की अपील की. श्री मुखिया ने एक प्रश्न के जवाब में कहा कि इस मामले में अब तक उनकी राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से कोई बातचीत नहीं हुई है. लेकिन उन्होंने दार्जिलिंग जिले के प्रभारी तथा मंत्री अरूप विश्वास तथा राज्य के पर्यटन मंत्री गौतम देव से गोजमुमो के साथ बातचीत शुरू करने की पहल की अपील की है. उन्होंने कहा कि गोरखालैंड आंदोलन को आगे ले जाने के लिए पहाड़ के सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को लेकर गोरखालैंड मूवमेंट कॉर्डिनेशन कमेटी का भी गठन किया गया है. इनको भी आगे आकर सरकार के साथ बातचीत करनी चाहिए.
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