अबतक शुरू नहीं हुई है पीएचडी की नामांकन प्रक्रिया
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :29 Jun 2017 9:50 AM
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सिलीगुड़ी. पीएचडी करने वाले विद्यार्थियों के दिल की धड़कनें बढ़ने लगी है. उत्तर बंगाल विश्वविद्यालय सहित उत्तर बंगाल के कई विश्वविद्यालयों ने पीएचडी (डाक्टरेट) के लिये अब तक आवेदन पत्र जारी नहीं किया है. और तो और अबतक नामांकन की नोटिस तक जारी नहीं की गयी है. दूसरी तरफ पीएचडी की सीट कम करने की […]
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सिलीगुड़ी. पीएचडी करने वाले विद्यार्थियों के दिल की धड़कनें बढ़ने लगी है. उत्तर बंगाल विश्वविद्यालय सहित उत्तर बंगाल के कई विश्वविद्यालयों ने पीएचडी (डाक्टरेट) के लिये अब तक आवेदन पत्र जारी नहीं किया है. और तो और अबतक नामांकन की नोटिस तक जारी नहीं की गयी है. दूसरी तरफ पीएचडी की सीट कम करने की अटकलें भी तेज हो गयी है. इससे जहां एक ओर विद्यार्थियां का मन डगमगाने लगा है वहीं विश्वविद्यालय प्रबंधन की भी चिंता बढ़ गयी है. इसको लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से बातचीत की कोशिश की जा रही है.
मिली जानकारी के अनुसार प्रति वर्ष मइ महीने तक उत्तर बंगाल विश्वविद्यालय में पीएचडी में नामांकन के लिये आवेदन पत्र जारी कर दिया जाता था. इस बार जून खत्म होने को है, नामाकंन से संबंधित नोटिस तक जारी नहीं हुआ है. यह समस्या सिर्फ उत्तर बंगाल विश्वविद्यालय की ही नहीं बल्कि उत्तर बंगाल के अधिकांश विश्वविद्यालयों की है. किसी ने भी पीएचडी में नामांकन के लिये नोटिस या आवेदन पत्र जारी नहीं किया है.
उत्तर बंगाल विश्वविद्यालय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार किसी विशेष विषय के साथ पीएचडी किया जाता है. पीएचडी की डिग्री हासिल करने वाले को डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की जाती है. अधिकांश विद्यार्थी स्नातक के प्रतिष्ठा व पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) के बाद पीएचडी करते हैं. इसके तहत नामांकन के बाद विश्वविद्यालय के किसी वरिष्ठ प्रोफेसर की निगरानी में शोध पूरा कर उसे जमा कराना होता है. प्रोफेसर के रिपोर्ट के आधार पर पीएचडी की डिग्री दी जाती है. उत्तर बंगाल विश्वविद्यालय के एक अधिकारी से मिली जानकारी के अनुसार इस बार पीएचडी में सीट कम किये जाने की संभावना है. पीचएडी के लिये शिक्षकों की संख्या नहीं बढ़ायी जा रही है. प्रतिवर्ष एक शिक्षक पर 8 से 12 विद्यार्थियों का बोझ होता है. अधिक विद्यार्थी होने से उनको पढ़ाने में भी समस्या होती है. शिक्षकों की मांग के अनुसार केंद्रीय मानव संशाधन विकास मंत्रालय ने इस बार एक शिक्षक के अधीन दो से तीन विद्यार्थियों को रखने का निर्णय लिया है. अब एकाएक शिक्षकों की संख्या बढ़ाना काफी कठिन है. फलस्वरूप पीएचडी में सीटों की संख्या होने की अटकलें तेज हो गयी है.
इस संबंध में उत्तर बंगाल विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक सुशांत दास ने बताया कि पीएचडी में नामांकन को लेकर कुछ समस्या हुयी है. इसी कारण नामांकन का नोटिस अब तक जारी नहीं हो सका है. समस्या को लेकर विचार-विमर्श जारी है. नामांकन के लिये जल्द ही नोटिस जारी होने की संभावना है.
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