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अवैध खनन रोकने के लिए विशेष टीम गठित करे पुलिस

हाइकोर्ट ने वीरभूम के डीएम को दिया आदेश

हाइकोर्ट ने वीरभूम के डीएम को दिया आदेश

संवाददाता, कोलकाता

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बीरभूम में पत्थरों के अवैध उत्खनन को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने का आदेश दिया. गुरुवार को हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवगणनम और न्यायमूर्ति हिरण्मय भट्टाचार्य की खंडपीठ ने जिले के जिला मजिस्ट्रेट को एक विशेष टीम बनाने का आदेश दिया. हाइकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि टीम को अवैध पत्थर खदानों का औचक निरीक्षण करना होगा. कोर्ट के आदेश के अनुसार, इस टीम को दो सप्ताह के अंदर जिला मजिस्ट्रेट को रिपोर्ट देनी होगी. छापेमारी पर जाने के दौरान विशेष टीम को पर्याप्त पुलिस सुरक्षा मुहैया करानी होगी और इस आदेश का अनुपालन जिले के पुलिस अधीक्षक सुनिश्चित करेंगे. हाइकोर्ट ने कहा कि टीम की रिपोर्ट देखने के बाद जरूरत पड़ने पर जिलाधिकारी कानूनी कार्रवाई करेंगे.

गौरतलब है कि बीरभूम जिले के शालबदरा गांव में अवैध रूप से पत्थरों का उत्खनन हो रहा है और इसकी आवाजाही के लिए तस्कर ग्रामीण सड़क का उपयोग कर रहे हैं, जिससे आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. इस गांव की सड़क से 44 गांवों के लोग आवागमन करते हैं. यहां स्कूल और अस्पताल भी हैं. इन ग्रामीण सड़कों पर भारी वाहनों के आवागमन को रोकने के लिए उच्च न्यायालय में मामला दायर किया गया था. गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने यह आदेश दिया.

गौरतलब है कि राज्य में अवैध बालू-पत्थर खनन की शिकायतें लंबे समय से चली आ रही हैं. इस संबंध में पहले कलकत्ता हाइकोर्ट में भी एक मामला दायर किया गया था. 2021 में एक मामले में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश प्रकाश श्रीवास्तव की खंडपीठ ने अवैध बालू-पत्थर खनन रोकने के लिए राज्य सरकार को विशेष जांच दल गठित करने का निर्देश दिया था. लेकिन उसके बाद भी अवैध खनन का सिलसिला जारी है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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