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घाटाल मास्टर प्लान पर काम शुरू, दो जिलों को मिलेगी राहत

बाढ़ की वजह से हर साल राज्य के दो जिले पूर्व व पश्चिम मेदिनीपुर के लोग बेघर हो जाते हैं. बाढ़ की वजह से उन्हें घर छोड़ना पड़ता है.

मंत्री का दावा

संवाददाता, कोलकाता

बाढ़ की वजह से हर साल राज्य के दो जिले पूर्व व पश्चिम मेदिनीपुर के लोग बेघर हो जाते हैं. बाढ़ की वजह से उन्हें घर छोड़ना पड़ता है. इस दोनों जिलों को इस समस्या से उबारने के लिए 2015 में घाटाल मास्टर प्लान की घोषणा की गयी थी. पर फंड के अभाव में पिछले कई वर्षों तक इस परियोजना का क्रियान्वयन नहीं हो सका था. हालांकि, अब घाटाल मास्टर प्लान के लिए आंशिक रूप से काम शुरू हुआ है. परियोजना पर अब तक 341 करोड़ 50 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं. यह जानकारी विधानसभा के प्रश्नोत्तर काल में राज्य के सिंचाई व जलमार्ग विभाग के मंत्री मानस रंजन भुइयां ने दी. उन्होंने कहा कि घाटाल मास्ट प्लान के लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) जारी कर दी गयी है. जमीन अधिग्रहण के लिए सर्वे जारी है. मंत्री ने बताया कि इस परियोजना के तहत कार्य पूरा करने के लिए वह कई बार पश्चिम मेदिनीपुर जिले का दौरा भी कर चुके हैं. श्री भुइयां ने बताया कि घाटाल मास्टर प्लान हर हाल में पूरा होगा. परियोजना के तहत हो रहे कार्यों पर नजर रखने के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक कमेटी का भी गठन किया है. श्री भुइयां के अलावा, घाटाल के सांसद दीपक अधिकारी (देव), घाटाल के विधायक, पश्चिम मेदिनीपुर के जिलाधिकारी, सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस सह सिंचाई व कृषि विभाग के अधिकारी आला अधिकारियों को इस कमेटी में शामिल किया गया है. मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 में घाटाल मास्टर प्लान का आंशिक रूप से कार्य शुरू हो चुका है. अब तक पश्चिम व पूर्व मेदिनीपुर जिले के खालों (नहर) की 115.78 किलोमीटर ड्रेजिंग की गयी है, जिस पर 341 करोड़ 50 लाख रुपये खर्च हो चुका है. मंत्री ने बताया कि इस परियोजना के तहत कार्य शुरू करने के लिए 2015 से ही ममता बनर्जी कई बार केंद्र सरकार से अनुदान की मांग कर चुकी हैं. पर केंद्र सरकार से अब हमें किसी प्रकार का जवाब नहीं मिला है. ऐसे में राज्य सरकार खुद अपने बल पर परियोजना के पर आने वाले खर्च को वहन करेगा. इसके अलावा मंत्री मानस भुइयां ने सदन में उत्तर बंगाल की बाढ़ परिस्थिति और नदी बांध की मरम्मत का मुद्दा उठाया. उन्होंने बताया कि इंडो बांग्लादेश रीवर कमीशन, इंडो-नेपाल रीवर कमीशन है. पर इंडो-भूटान रीवर कमीशन के न होने से उत्तर बंगाल हर साल बाढ़ के पानी में डूब जाता है. उन्होंने बताया कि भूटान से उत्तर बंगाल में 76 नदियां बहकर आती है. रीवर कमीशन के नाम होने भूटान किसी भी समय पानी छोड़ देता है. उन्होंने कहा कि राज्य में नदी बांधों की स्थिति जर्जर हो चुकी है. पर मरम्मत के लिए हमें केंद्र से अनुदान नहीं मिल रहा है.

संपन्न हुआ विधानसभा का शीतकालीन सत्र

कोलकताा. विधानसभा का शीतकालीन सत्र सोमवार को संपन्न हो गया. 25 नंवबर को शीतकालीन सत्र शुरू हुआ था. इस संबंध में विधानसभा के स्पीकर बिमान बनर्जी ने बताया कि शीतकालीन सत्र में विधानसभा का कार्य दिवस 12 दिनों का था. जबकि, सदन की कार्यवाही 36 घंटे 22 मिनट तक चली. इन 12 दिनों में सदन के प्रश्न काल में 1846 सवाल स्पीकर ने प्राप्त किये थे. इनमें 1608 प्रश्न को सदन में रखने स्वीकृति दी गयी थी, जिसमें से 1583 प्रश्न सदन में पूछे गये. वहीं सत्र के अंतिम दिन विधानसभा से ””””द भवानीपुर ग्लोबल यूनिवर्सिटी विधेयक-2024”””” पेश किया गया, जिसे ध्वनि मत से पारित भी कर दिया गया. सत्र के दौरान विधानसभा से कुल सात विधेयक पारित किये गये.

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Prabhat Khabar News Desk
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