‘उत्कर्ष बांग्ला’ परियोजना से बदल रहा महिलाओं का जीवन
Published by : GANESH MAHTO Updated At : 20 Nov 2025 12:51 AM
घरेलू कामकाज, आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के बीच जीवनयापन उनके लिए चुनौती बन गया था.
कोलकाता. उत्कर्ष बांग्ला परियोजना सुंदरबन और उत्तर 24 परगना के सुदूर इलाकों की महिलाओं के जीवन में परिवर्तन ला रही है. राजापुर, महाकुमार हसनाबाद और बशीरहाट में सौ से अधिक महिलाओं को जूट हस्तशिल्प का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. महिलाएं जूट से पापड़, बैग, फूलदान, कप, प्लेट सहित कई उत्पाद बनाने की तकनीक सीख रही हैं. हासनाबाद और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से पुरुषों की आय का मुख्य स्रोत जल संग्रहण और मछली पकड़ना रहा है, जबकि महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर लगभग न के बराबर थे. घरेलू कामकाज, आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के बीच जीवनयापन उनके लिए चुनौती बन गया था. ऐसे में उत्कर्ष बांग्ला परियोजना इन महिलाओं के लिए उम्मीद की नयी किरण दिखा रही है, उन्नति के नये आयाम गढ़ती प्रतीत हो रही है. उत्कर्ष बांग्ला परियोजना के तहत न केवल बेरोजगार महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, बल्कि प्रशिक्षित महिलाओं को प्रतिदिन 50 रुपये का भत्ता भी दिया जाता है. इससे इनके उत्साह में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है. इस परियोजना के तहत प्रशिक्षण पूरी तरह निशुल्क है. इसका लाभ मूल रूप से क्षेत्र की वे महिलाएं उठा रही हैं, जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं. इस परियोयना से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि जूट हस्तशिल्प सीखने के बाद वे घर बैठे उत्पाद तैयार कर रही हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है. परियोजना से जुड़ने के बाद उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और भविष्य में अधिक महिलाओं को इस पहल से जोड़ने की योजना है.
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