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महिला सीएम के रहते बंगाल में सुरक्षित नहीं हैं महिलाएं : अन्नपूर्णा

Updated at : 29 Aug 2024 1:36 AM (IST)
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महिला सीएम के रहते बंगाल में सुरक्षित नहीं हैं महिलाएं : अन्नपूर्णा

राज्य में एक जूनियर महिला डॉक्टर से बलात्कार और उसकी हत्या की घटना को लेकर हो रहे व्यापक विरोध प्रदर्शन के बीच केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा है कि राज्य में एक महिला मुख्यमंत्री होने के बावजूद महिलाओं की स्थिति ‘बिगड़ती’ जा रही है.

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केंद्रीय मंत्री ने तृणमूल सरकार को घेरा, कहा- नहीं लागू की गयीं केंद्रीय योजनाएं

संवाददाता, कोलकाता

राज्य में एक जूनियर महिला डॉक्टर से बलात्कार और उसकी हत्या की घटना को लेकर हो रहे व्यापक विरोध प्रदर्शन के बीच केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा है कि राज्य में एक महिला मुख्यमंत्री होने के बावजूद महिलाओं की स्थिति ‘बिगड़ती’ जा रही है. उन्होंने महिलाओं के खिलाफ अपराधों से निबटने के लिए त्वरित अदालतों के गठन और आपातकालीन हेल्पलाइन जैसी केंद्र सरकार की योजनाओं को लागू करने में ‘विफल रहने के लिए’ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार की आलोचना की. उन्होंने कहा : पश्चिम बंगाल जैसे राज्य हैं, जहां हम केंद्र सरकार की योजनाओं को लागू करने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन ऐसा नहीं हो रहा. महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों से निबटने के लिए केंद्र सरकार की कई योजनाएं हैं, जैसे त्वरित विशेष अदालतें और पॉक्सो (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम) अदालतें, लेकिन राज्य (पश्चिम बंगाल) इसमें पिछड़ रहा है. केंद्रीय मंत्री ने कहा : हम इस योजना को प्रायोजित कर रहे हैं, ताकि आपको पैसे खर्च न करने पड़ें, लेकिन इसे लागू राज्य को करना होगा. हम महिलाओं और बच्चों से जुड़ी योजनाओं को लागू करने के लिए राज्य को सुझाव देते रहे हैं. अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि पश्चिम बंगाल को आवंटित विशेष त्वरित अदालतों (एफटीएससी) का राज्य में संचालन अभी तक शुरू नहीं हुआ है.

उन्होंने कहा : 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 409 विशेष पॉक्सो अदालतों सहित 752 विशेष त्वरित अदालतें (एफटीएससी) काम कर रही हैं और योजना शुरू होने के बाद से उन्होंने 2,53,000 से अधिक मामलों का निबटारा किया है. इस योजना के तहत पश्चिम बंगाल को 123 एफटीएससी आवंटित की गयी थीं, जिनमें 20 विशिष्ट पॉक्सो अदालत और 103 संयुक्त एफटीएससी अदालतें हैं, जो बलात्कार और पॉक्सो अधिनियम के मामलों दोनों को संभालती हैं. लेकिन इनमें से किसी भी अदालत का संचालन शुरू नहीं किया गया है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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