ममता बनर्जी से दूर मुस्लिम वोट बैंक? असम-बिहार और महाराष्ट्र के नतीजों ने बढ़ायी टेंशन, जानें 160 सीटों का समीकरण

Published by :Mithilesh Jha
Published at :16 Apr 2026 9:40 AM (IST)
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West Bengal Election 2026 Muslim Vote Analysis Mamata Banerjee TMC

West Bengal Election 2026 Muslim Vote Analysis: असम-बिहार के बाद क्या बंगाल में भी टूटेगा मुस्लिम वोट बैंक? 160 अल्पसंख्यक बहुल सीटों पर ममता बनर्जी की साख दांव पर. पढ़ें पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर अभय कुमार का विश्लेषण.

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West Bengal Election 2026 Muslim Vote Analysis: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में सत्ता की चाबी माना जाने वाला ‘मुस्लिम वोट बैंक’ ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ी पहेली बन गया है. राजनीतिक विश्लेषक अभय कुमार की मानें, तो वर्ष 2011 से जो मुस्लिम मतदाता तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सबसे बड़ी राजनीतिक पूंजी थे, उनका बदलता मिजाज अब ‘दीदी’ की नींद उड़ा रहा है. असम, बिहार और यहां तक कि महाराष्ट्र के धुले-मालेगांव के हालिया चुनावी रुझानों ने बंगाल में चिंता की लहर पैदा कर दी है.

सागरदीघी उप-चुनाव : वह हार जिसने खतरे की घंटी बजायी

पश्चिम बंगाल की मुस्लिम बहुल सागरदीघी सीट (64 फीसदी मुस्लिम आबादी) पर टीएमसी की हार ने पहली बार यह संकेत दिया कि अल्पसंख्यक मतदाता फिर से कांग्रेस की ओर रुख कर सकते हैं. हालांकि, ममता बनर्जी ने बाद में विजयी कांग्रेस विधायक बायरन विश्वास को अपनी पार्टी में शामिल करा लिया, लेकिन मतदाताओं के मन में उपजा यह संशय अभी खत्म नहीं हुआ है.

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पड़ोसी राज्यों का असर : ओवैसी और कांग्रेस की बढ़ती ताकत

विश्लेषण के अनुसार, पश्चिम बंगाल की सीमा से लगे बिहार और असम के मुस्लिम मतदाताओं का रुख बदल रहा है.

  • बिहार का सीमांचल : किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया और अररिया की 24 सीटों पर ओवैसी की AIMIM ने कांग्रेस और राजद (RJD) के समीकरण बिगाड़ दिये हैं.
  • असम का धुबरी मॉडल : वर्ष 2024 में एआईयूडीएफ (AIUDF) के बदरुद्दीन अजमल की हार और कांग्रेस के रकीबुल हुसैन की भारी जीत ने साबित किया है कि मुस्लिम अब ‘मजबूत विकल्प’ की तलाश में हैं.
  • महाराष्ट्र का मालेगांव फैक्टर : मालेगांव सेंट्रल विधानसभा सीट पर मुस्लिम मतदाताओं के बदलते रुख ने स्पष्ट कर दिया है कि वे केवल एक चेहरे के भरोसे नहीं रहने वाले.

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West Bengal Election 2026: 160 सीटों का महा-गणित

बंगाल की 294 विधानसभा सीटों में से 160 सीटों पर मुस्लिम मतदाता निर्णायक हैं. वर्ष 2021 में ममता बनर्जी ने यहां क्लीन स्वीप किया था, लेकिन 2026 की डगर मुश्किल दिख रही है.

जिले का नाममुस्लिम आबादी प्रतिशत मेंकुल सीटेंTMC की जीत (2021 में)भाजपा की जीत (2021 में)
मुर्शिदाबाद66.2722202
मालदा51.271208
उत्तर दिनाजपुर49.92972
बीरभूम37.0611101
द 24 परगना35.3731300

मुख्य प्रतिद्वंद्वी : कांग्रेस और ओवैसी का ‘खौफ’

ममता बनर्जी की चिंता की सबसे बड़ी वजह मालदा जिले की कद्दावर नेता मौसम नूर के परिवार का कांग्रेस के साथ जाना है. साथ ही, हुमायूं कबीर के साथ असदुद्दीन ओवैसी के गठबंधन ने मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर की 49 सीटों पर टीएमसी के समीकरण बिगाड़ दिये हैं. वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने उत्तर मालदा और दक्षिण मालदा की कई विधानसभा सीटों पर बढ़त बनाकर यह साबित कर दिया कि वे मैदान से बाहर नहीं हैं.

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भाजपा का ‘उत्थान’ और बदलती रणनीति

वर्ष 2014 में केवल 17 प्रतिशत वोट पाने वाली भाजपा आज राज्य की 278 सीटों पर सीधे मुकाबले में है. भाजपा महिला सुरक्षा (आरजी कर कांड, संदेशखाली), भ्रष्टाचार और जनसांख्यिकीय बदलाव (घुसपैठ) जैसे मुद्दों को हवा दे रही है. अमित शाह का ‘महिला सुरक्षा गारंटी’ कार्ड और भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख टीएमसी के लिए दोहरी चुनौती पेश कर रहा है.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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