ममता बनर्जी से दूर मुस्लिम वोट बैंक? असम-बिहार और महाराष्ट्र के नतीजों ने बढ़ायी टेंशन, जानें 160 सीटों का समीकरण

West Bengal Election 2026 Muslim Vote Analysis: असम-बिहार के बाद क्या बंगाल में भी टूटेगा मुस्लिम वोट बैंक? 160 अल्पसंख्यक बहुल सीटों पर ममता बनर्जी की साख दांव पर. पढ़ें पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर अभय कुमार का विश्लेषण.
खास बातें
West Bengal Election 2026 Muslim Vote Analysis: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में सत्ता की चाबी माना जाने वाला ‘मुस्लिम वोट बैंक’ ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ी पहेली बन गया है. राजनीतिक विश्लेषक अभय कुमार की मानें, तो वर्ष 2011 से जो मुस्लिम मतदाता तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सबसे बड़ी राजनीतिक पूंजी थे, उनका बदलता मिजाज अब ‘दीदी’ की नींद उड़ा रहा है. असम, बिहार और यहां तक कि महाराष्ट्र के धुले-मालेगांव के हालिया चुनावी रुझानों ने बंगाल में चिंता की लहर पैदा कर दी है.
सागरदीघी उप-चुनाव : वह हार जिसने खतरे की घंटी बजायी
पश्चिम बंगाल की मुस्लिम बहुल सागरदीघी सीट (64 फीसदी मुस्लिम आबादी) पर टीएमसी की हार ने पहली बार यह संकेत दिया कि अल्पसंख्यक मतदाता फिर से कांग्रेस की ओर रुख कर सकते हैं. हालांकि, ममता बनर्जी ने बाद में विजयी कांग्रेस विधायक बायरन विश्वास को अपनी पार्टी में शामिल करा लिया, लेकिन मतदाताओं के मन में उपजा यह संशय अभी खत्म नहीं हुआ है.
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पड़ोसी राज्यों का असर : ओवैसी और कांग्रेस की बढ़ती ताकत
विश्लेषण के अनुसार, पश्चिम बंगाल की सीमा से लगे बिहार और असम के मुस्लिम मतदाताओं का रुख बदल रहा है.
- बिहार का सीमांचल : किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया और अररिया की 24 सीटों पर ओवैसी की AIMIM ने कांग्रेस और राजद (RJD) के समीकरण बिगाड़ दिये हैं.
- असम का धुबरी मॉडल : वर्ष 2024 में एआईयूडीएफ (AIUDF) के बदरुद्दीन अजमल की हार और कांग्रेस के रकीबुल हुसैन की भारी जीत ने साबित किया है कि मुस्लिम अब ‘मजबूत विकल्प’ की तलाश में हैं.
- महाराष्ट्र का मालेगांव फैक्टर : मालेगांव सेंट्रल विधानसभा सीट पर मुस्लिम मतदाताओं के बदलते रुख ने स्पष्ट कर दिया है कि वे केवल एक चेहरे के भरोसे नहीं रहने वाले.
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West Bengal Election 2026: 160 सीटों का महा-गणित
बंगाल की 294 विधानसभा सीटों में से 160 सीटों पर मुस्लिम मतदाता निर्णायक हैं. वर्ष 2021 में ममता बनर्जी ने यहां क्लीन स्वीप किया था, लेकिन 2026 की डगर मुश्किल दिख रही है.
| जिले का नाम | मुस्लिम आबादी प्रतिशत में | कुल सीटें | TMC की जीत (2021 में) | भाजपा की जीत (2021 में) |
|---|---|---|---|---|
| मुर्शिदाबाद | 66.27 | 22 | 20 | 2 |
| मालदा | 51.27 | 12 | 0 | 8 |
| उत्तर दिनाजपुर | 49.92 | 9 | 7 | 2 |
| बीरभूम | 37.06 | 11 | 10 | 1 |
| द 24 परगना | 35.37 | 31 | 30 | 0 |
मुख्य प्रतिद्वंद्वी : कांग्रेस और ओवैसी का ‘खौफ’
ममता बनर्जी की चिंता की सबसे बड़ी वजह मालदा जिले की कद्दावर नेता मौसम नूर के परिवार का कांग्रेस के साथ जाना है. साथ ही, हुमायूं कबीर के साथ असदुद्दीन ओवैसी के गठबंधन ने मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर की 49 सीटों पर टीएमसी के समीकरण बिगाड़ दिये हैं. वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने उत्तर मालदा और दक्षिण मालदा की कई विधानसभा सीटों पर बढ़त बनाकर यह साबित कर दिया कि वे मैदान से बाहर नहीं हैं.
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भाजपा का ‘उत्थान’ और बदलती रणनीति
वर्ष 2014 में केवल 17 प्रतिशत वोट पाने वाली भाजपा आज राज्य की 278 सीटों पर सीधे मुकाबले में है. भाजपा महिला सुरक्षा (आरजी कर कांड, संदेशखाली), भ्रष्टाचार और जनसांख्यिकीय बदलाव (घुसपैठ) जैसे मुद्दों को हवा दे रही है. अमित शाह का ‘महिला सुरक्षा गारंटी’ कार्ड और भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख टीएमसी के लिए दोहरी चुनौती पेश कर रहा है.
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By Mithilesh Jha
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