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West Bengal : सरकारी अस्पतालों में कैथेटर घोटाला, जांच हुई शुरू

Updated at : 27 Nov 2024 12:41 PM (IST)
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West Bengal : सरकारी अस्पतालों में कैथेटर घोटाला, जांच हुई शुरू

West Bengal : कलकत्ता मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, हमने कुछ समय पहले स्टॉक की जांच शुरू की और मेरे अस्पताल के स्टोर में स्थानीय रूप से निर्मित सीवीसी मिले.

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West Bengal : पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग ने कई सरकारी अस्पतालों में कथित तौर पर निम्न गुणवत्ता वाले और स्थानीय रूप से निर्मित ‘कैथेटर’ की ऊंचे दामों पर आपूर्ति किए जाने से जुड़े मामले की जांच शुरू कर दी है. मिली जानकारी के अनुसार ऐसे सेंट्रल वेनस कैथेटर (सीवीसी) कथित तौर पर राज्य के कम से कम पांच मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों को आपूर्ति किए गए थे.सरकारी अस्पतालों में इन कैथेटरों की आपूर्ति करने वाली कंपनी ने गलती स्वीकार कर ली है, लेकिन दोष अपने कर्मचारियों पर मढ़ दिया है.

स्टाॅक की जांच के दौरान हुआ खुलासा

कलकत्ता मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, हमने कुछ समय पहले स्टॉक की जांच शुरू की और मेरे अस्पताल के स्टोर में स्थानीय रूप से निर्मित सीवीसी मिले. ये कैथेटर राज्य द्वारा आवंटित कैथेटर की तुलना में निम्न गुणवत्ता वाले हैं. हमने राज्य स्वास्थ्य विभाग को सूचित कर दिया है.सीवीसी एक पतली और लचीली ट्यूब होती है जिसे तरल पदार्थ, रक्त और अन्य उपचार के लिए नस में लगाया जाता है. इसे चिकित्सकीय भाषा में सेंट्रल लाइन कैथेटर भी कहा जाता है.

कैथेटर की आपूर्ति से किसे लाभ हुआ जांच जारी

स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने कहा, प्रारंभिक जांच से पता चला है कि वितरण कंपनी प्रकाश सर्जिकल ने सरकार द्वारा नामित अंतरराष्ट्रीय कंपनी के सीवीसी के बजाय कई सरकारी अस्पतालों में निम्न-गुणवत्ता वाले और स्थानीय रूप से निर्मित कैथेटर की आपूर्ति की.उन्होंने कहा, सभी कैथेटर की जांच की जाएगी. यह पता लगाने के लिए उचित जांच की जा रही है कि इन कैथेटर की आपूर्ति से किसे लाभ हुआ.

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Shinki Singh

लेखक के बारे में

By Shinki Singh

10 साल से ज्यादा के पत्रकारिता अनुभव के साथ मैंने अपने करियर की शुरुआत Sanmarg से की जहां 7 साल तक फील्ड रिपोर्टिंग, डेस्क की जिम्मेदारियां संभालने के साथ-साथ महिलाओं से जुड़े मुद्दों और राजनीति पर लगातार लिखा. इस दौरान मुझे एंकरिंग और वीडियो एडिटिंग का भी अच्छा अनुभव मिला. बाद में प्रभात खबर से जुड़ने के बाद मेरा फोकस हार्ड न्यूज पर ज्यादा रहा. वहीं लाइफस्टाइल जर्नलिज्म में भी काम करने का मौका मिला और यह मेरे लिये काफी दिलचस्प है. मैं हर खबर के साथ कुछ नया सीखने और खुद को लगातार बेहतर बनाने में यकीन रखती हूं.

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