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तकनीकी खामियों से ‘अनमैप्ड’ वोटरों को सुनवाई के लिए नहीं बुलाया जायेगा

Updated at : 29 Dec 2025 1:39 AM (IST)
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तकनीकी खामियों से ‘अनमैप्ड’ वोटरों को सुनवाई के लिए नहीं बुलाया जायेगा

निर्वाचन आयोग ने बीएलओ एप की तकनीकी खामियों के चलते ‘अनमैप्ड’ रहे वोटरों को बड़ी राहत दी है.

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चुनाव आयोग ने जारी किया नया दिशा-निर्देश, बीएलओ ऐप में लिंकिंग की आ रही है समस्या

संवाददाता, कोलकातानिर्वाचन आयोग ने बीएलओ एेप की तकनीकी खामियों के चलते ‘अनमैप्ड’ रहे वोटरों को बड़ी राहत दी है. उन्हें अब सुनवाई के लिए हाजिर नहीं होना पड़ेगा.‘अनमैप्ड’ वोटर से आशय ऐसे मतदाताओं से है जिनके दस्तावेजों का 2002 की मतदाता सूची से सटीक मिलान नहीं हो सका है. ‘अनमैप्ड’ मतदाताओं की सुनवाई 27 दिसंबर को शुरू हुई. निर्वाचन आयोग ने राज्य के जिला चुनाव अधिकारियों को फिर निर्देश जारी किया है कि मौजूदा एसआइआर प्रक्रिया के दौरान 2002 की मतदाता सूचियों के डिजिटलीकरण में तकनीकी समस्याओं के कारण बीएलओ ऐप में जो मतदाता छूट गये हैं, उन्हें सुनवाई के लिए नहीं बुलाया जाना चाहिए. मुख्य चुनाव अधिकारी कार्यालय के निर्देश में कहा गया है कि यह समस्या 2002 की मतदाता सूची के पीडीएफ संस्करण को सीएसवी (अल्पविराम पृथक मान) प्रारूप में पूरी तरह से परिवर्तित नहीं कर पाने के कारण उत्पन्न हुई है. बूथ-स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) ऐप में ‘लिंकिंग’ में समस्या आ रही है. आयोग ने स्पष्ट किया कि बाद के चरण में चाहे 2002 की मतदाता सूची की हार्ड कॉपी की जांच के दौरान या शिकायतें प्राप्त होने पर, विसंगतियों का पता चलता है, तो संबंधित मतदाताओं को नोटिस जारी करने के बाद सुनवाई के लिए बुलाया जा सकता है.

क्या कहा है चुनाव आयोग ने

आयोग ने कहा है कि सिस्टम में ‘दर्ज नहीं’ के रूप में चिह्नित होने के बावजूद ऐसे कई मतदाताओं का 2002 की मतदाता सूची की हार्ड कॉपी के साथ वैध स्व-पहचान या वंशज संबंध है, जिसे जिला चुनाव अधिकारियों (डीइओ) द्वारा विधिवत प्रमाणित किया गया है और सीइओ की वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया है. ऐसे मामलों में स्वचालित रूप से उत्पन्न होने वाले सुनवाई नोटिसों को तामील करने की आवश्यकता नहीं है और उन्हें चुनावी पंजीकरण अधिकारी (इआरओ) या सहायक चुनावी पंजीकरण अधिकारी (एइआरओ) के स्तर पर रख लिया जाना चाहिए.

इआरओ या एइआरओ अपने स्तर पर लेंगे फैसला

निर्देशों के अनुसार, 2002 की मतदाता सूची के अंश को संबंधित जिला चुनाव अधिकारी (डीइओ) को चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार सत्यापन के लिए भेजे जा सकते हैं. सत्यापन के बाद इआरओ या एइआरओ उचित निर्णय ले सकते हैं और मामलों के निपटारे के लिए आवश्यक दस्तावेज अपलोड कर सकते हैं. इस निर्देश में बीएलओ को क्षेत्र सत्यापन के लिए नियुक्त करने की अनुमति भी दी गयी है, जिसमें संबंधित मतदाताओं की तस्वीरें लेना और उन्हें सिस्टम में अपलोड करना शामिल है. सीइओ कार्यालय के अधिकारी ने कहा कि फिलहाल के लिए यह निर्देश है. यदि किसी मामले में तनिक भी सुनवाई की आवश्यकता महसूस होती है, तो वह सत्यापन के बाद ही की जायेगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AKHILESH KUMAR SINGH

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