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कोलकाता पोर्ट विधानसभा सीट पर तृणमूल की मजबूत पकड़, फिरहाद हकीम को हराना भाजपा के लिए बड़ी चुनौती

24 Jan, 2026 10:38 am
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Firhad Hakim

Firhad Hakim

Kolkata Port Assembly Seat: कोलकाता पोर्ट असेंबली सीट उन चंद सीटों में से एक है, जहां तृणमूल की स्थिति काफी मजबूत है. कोलकाता में 2025 की बाढ़ और बिजली के झटके जैसे मुद्दे विपक्ष के पास हैं, लेकिन इन मुद्दों से माहौल को मजबूती से नहीं बदला जा सकता, तृणमूल कांग्रेस एक और बड़ी जीत के साथ कोलकाता पोर्ट पर कब्जा करने के लिए अच्छी स्थिति में है. विपक्ष इस सीट को जीतने की नहीं नहीं बल्कि जीत और हार का अंतर कम करने के लिए रणनीति बना रहा है.

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Kolkata Port Assembly Seat: मुख्य बातें

Kolkata Port Assembly Seat: कोलकाता. कोलकाता पोर्ट असेंबली सीट, कोलकाता महानगर की एक महत्वपूर्ण सीट हैं. कोलकाता दक्षिण लोकसभा सीट के अंदर आनेवाली यह सीट एक घनी शहरी सीट है, जहां ग्रामीण इलाकों से कोई वोटर नहीं आता है. इस सीट को पहले गार्डन रीच सीट के नाम से जाना जाता था, लेकिन 2011 के असेंबली चुनाव से इस सीट का नाम कोलकाता पोर्ट कर दिया गया. कभी कांग्रेस और वाम दलों का गढ़ रहे इस सीट पर 2011 से तृणमूल कांग्रेस का दबदबा रहा है. तृणमूल उम्मीदवार फिरहा द हकीम यहां से जीतते रहे हैं.

तृणमूल की मजबूत सीटों में से एक

हकीम ममता बनर्जी की कैबिनेट मंत्री हैं. वह 2018 से कोलकाता के मेयर भी हैं. जबरदस्त जीत और लगातार वोटरों के सपोर्ट के रिकॉर्ड को देखते हुए, तृणमूल कांग्रेस के लिए 2026 में कोलकाता पोर्ट सीट पर जीत तय मानी जा रही है. भाजपा की सबसे अच्छी उम्मीद कांग्रेस-लेफ्ट फ्रंट अलायंस के फिर से बनने और मजबूत होने से है, ताकि तृणमूल के मुस्लिम सपोर्ट को कम किया जा सके, साथ ही हकीम के विवादित बयानों और कांग्रेस के आरोपों का जिक्र करके हिंदू वोटरों को भी अपनी तरफ खींचने की कोशिश की जा सके.

लेफ्ट और कांग्रेस का लगातार घटा जनाधार

1952 से 2006 तक यहां 14 असेंबली चुनाव हुए, जिसमें कांग्रेस पार्टी ने आठ बार और लेफ्ट पार्टियों ने छह बार जीत हासिल की, जिसमें माकपा ने चार और भाकपा ने दो बार जीत हासिल की. ​​अविभाजित सीपीआई को आखिरी जीत 1957 में मिली थी. हकीम ने पहली बार 2011 में यह सीट जीती थी, जब उन्होंने ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक के मोइनुद्दीन शम्स को 25,033 वोटों से हराया था. उसी साल, कांग्रेस नेता राम प्यारे राम ने अपनी पार्टी से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ा था.

हर चुनाव में बढ़ रहा जनाधार

हकीम ने 2016 में भी यह सीट बरकरार रखी. कांग्रेस के राकेश सिंह के खिलाफ अपना मार्जिन 26,548 वोटों तक बढ़ा लिया. 2021 में भाजपा के अवध किशोर गुप्ता के मुकाबले उनका मार्जिन बढ़कर 68,554 वोटों तक पहुंच गया. इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी का लेफ्ट फ्रंट से गठबंधन था. इस गठबंधन को सिर्फ 3.67 परसेंट वोटों के साथ अब तक का सबसे कम शेयर मिला.

नामवोट
फिरहाद हकीम1,05,543
अवध किशोर गुप्ता36,989
विजेता पार्टी का वोट %69.2 %
जीत अंतर %44.9 %
स्रोत : चुनाव आयोग

बिहार मूल के हैं बॉबी दा

1 जनवरी 1959 में जन्मे फिरहाद हकीम बंगाल में मुस्लिम समाज के एक बड़े नेता माने जाते हैं. उनके दादा बिहार के गया जिले से कोलकाता आकर बस गए और अपना व्यवसाय शुरू किया. उनके पिता अब्दुल हकीम कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट में विधि अधिकारी थे. ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर बॉबी सिम्पसन के नाम पर उन्हें बॉबी उपनाम दिया गया है और लोग उन्हें बॉबी दा के नाम से पुकारते हैं. हकीम ने हेरम्बा चंद्र कॉलेज से वाणिज्य में डिग्री प्राप्त की. बॉबी दा 1990 के दशक के उत्तरार्ध में, हकीम पहली बार कोलकाता नगर निगम के पार्षद के रूप में चुने गए.

ममता बनर्ती के लेफ्टिनेंट हैं हकीम

11 नवंबर 2009 को, वे उपचुनाव में कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार कौस्तव चटर्जी को 27,555 वोटों के अंतर से हराकर अलीपुर निर्वाचन क्षेत्र से पश्चिम बंगाल विधान सभा के लिए चुने गए. दो साल बाद, वो ममता बनर्जी सरकार में कैबिनेट मंत्री बने. ममता बनर्जी ने उन्हें बंगाल का शहरी विकास, नगर निगम और आवास मंत्री बनाया. दिसंबर 2018 में, सोवन चटर्जी के इस्तीफे के बाद उन्हें कोलकाता का 38वां महापौर नियुक्त किया गया. फिरहाद हकीम को मुख्यमंत्री ममता बनर्ती के लेफ्टिनेंट के तौर पर भी जाना जाता है. वह चेतला अग्रानी दुर्गा पूजा समिति के मुख्य आयोजक हैं.

विवादित बयानों के लिए चर्चित

  • 2016 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले, हकीम ने पाकिस्तानी अखबार डॉन की मलीहा हामिद सिद्दीकी से बात करते हुए अपने निर्वाचन क्षेत्र को “मिनी-पाकिस्तान” कहा था.
  • 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के समय, सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें फिरहाद हकीम को भारत की केंद्रीय सेनाओं को गाली देते हुए देखा गया.
  • 3 जुलाई 2024 को, हकीम ने गैर-मुसलमानों से इस्लाम धर्म अपनाने का आग्रह किया और इस धर्म में जन्म न लेने वालों को “दुर्भाग्यशाली” बताया.
  • नवंबर 2024 में, भाजपा उम्मीदवार और संदेशखाली घटना के पीड़ितों की प्रमुख वकील रेखा पात्रा के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की.

फिरहाद हकीम किस विभाग के मंत्री हैं?

शहरी विकास, नगर निगम और आवास मंत्री

फिरहाद हकीम का विधानसभा क्षेत्र कौन सा है?

कोलकाता पोर्ट असेंबली सीट

फिरहाद हकीम किस सामाजिक संगठन से जुड़े हैं?

चेतला अग्रानी दुर्गा पूजा समिति

फिरहाद हकीम की शैक्षणिक पृष्ठभूमि क्या है?

हेरम्बा चंद्र कॉलेज से वाणिज्य में डिग्री प्राप्त की

फिरहाद हकीम का बिहार से क्या कनेक्शन है?

उनके दादा बिहार के गया जिले से कोलकाता आकर बस गए

फिरहाद हकीम की पारिवारिक पृष्ठभूमि क्या है?

उनके पिता अब्दुल हकीम कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट में विधि अधिकारी थे.

क्या फिरहाद हकीम पहले भी विधायक रहे हैं?

हकीम ने पहली बार 2011 में यह सीट जीती थी, जब उन्होंने ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक के मोइनुद्दीन शम्स को हराया था.

फिरहाद हकीम किस राजनीतिक दल से संबद्ध हैं?

वे अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) के सदस्य हैं.

फिरहाद हकीम की धार्मिक पहचान क्या है?

वे एक प्रमुख अल्पसंख्यक नेता हैं.

फिरहाद हकीम कोलकाता नगर निगम में क्या हैं?

कोलकाता के 38वां महापौर हैं

नारद का दाग

फिरहाद हकीम की छवि पर उस वक्त गहरा दाग लगा जब नारदा स्टिंग ऑपरेशन में उनपर रिश्वतखोरी का आरोप लगा. 2016 में नारदा स्टिंग ऑपरेशन का वीडियो जारी किया गया था, जिसमें हकीम को कथित तौर पर रिश्वत लेते हुए देखा गया था. 17 मई 2021 को, उन्हें वरिष्ठ मंत्री सुब्रता मुखर्जी , विधायक और पूर्व मंत्री मदन मित्रा और कोलकाता के पूर्व महापौर सोवन चटर्जी के साथ नारदा स्टिंग ऑपरेशन के सिलसिले में केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा उनके घर से गिरफ्तार किया गया था. 19 सितंबर 2017 को, केंद्रीय जांच ब्यूरो ( सीबीआई) ने निज़ाम पैलेस में स्टिंग ऑपरेशन के संबंध में उनसे आठ घंटे तक पूछताछ की थी. हकीम ने कहा कि सीबीआई जांच उनकी पार्टी के खिलाफ एक “राजनीतिक साजिश” है. उन्होंने दावा कि- उन्हें किसी भी फुटेज में नकदी लेते हुए नहीं देखा गया.

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Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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