जेल जाने की साजिश का जवाब बनेगी रिकॉर्ड जीत: ज्योतिप्रिय

उत्तर 24 परगना में कभी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में गिने जाने वाले तृणमूल कांग्रेस नेता ज्योतिप्रिय मलिक ने कहा है कि विधानसभा चुनाव में उनकी रिकॉर्ड जीत ही उनके खिलाफ रची गयी साजिश का जवाब होगी, जिसके कारण उन्हें कथित राशन वितरण घोटाले में जेल जाना पड़ा.
कोलकाता.
उत्तर 24 परगना में कभी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में गिने जाने वाले तृणमूल कांग्रेस नेता ज्योतिप्रिय मलिक ने कहा है कि विधानसभा चुनाव में उनकी रिकॉर्ड जीत ही उनके खिलाफ रची गयी साजिश का जवाब होगी, जिसके कारण उन्हें कथित राशन वितरण घोटाले में जेल जाना पड़ा. पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच ‘बालू’ के नाम से लोकप्रिय मलिक ने एक साक्षात्कार में कहा, “मेरी रिकॉर्ड जीत ही उस साजिश का जवाब होगी, जिसके कारण मुझे जेल जाना पड़ा. जनादेश ही उन लोगों को जवाब देगा, जिन्होंने मुझे राजनीतिक रूप से खत्म करने की कोशिश की.” उत्तर 24 परगना जिले की हाबरा सीट 2026 के विधानसभा चुनावों में सबसे चर्चित सीटों में शामिल हो गयी है. इसकी वजह मलिक का जेल से लौटने के बाद तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरना और भाजपा द्वारा भ्रष्टाचार के मुद्दे को प्रमुख चुनावी हथियार बनाना है. मलिक को प्रवर्तन निदेशालय (इडी) ने अक्तूबर 2023 में धन शोधन मामले की जांच के तहत गिरफ्तार किया था. वह 2011 से 2021 के बीच राज्य के खाद्य आपूर्ति मंत्री रह चुके हैं. एक वर्ष से अधिक समय तक जेल में रहने के बाद उन्हें जनवरी 2025 में 50 लाख रुपये के निजी मुचलके पर जमानत मिली. हालांकि मलिक ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए इसे राजनीतिक साजिश बताया. उनका दावा है कि उनके खिलाफ कोई प्राथमिकी या मामला दर्ज नहीं था, फिर भी उन्हें महीनों तक हिरासत में रखा गया. उन्होंने कहा कि जमानत मिलने के बाद उन्हें पता चला कि किसी थाने में उनके खिलाफ कोई शिकायत ही दर्ज नहीं थी.मलिक के अनुसार उनकी गिरफ्तारी का समय भी राजनीतिक रूप से अहम था, ताकि 2024 के लोकसभा चुनाव में बनगांव क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस को कमजोर किया जा सके. उन्होंने कहा, “वे मुझे लोकसभा चुनाव के दौरान दूर रखना चाहते थे, ताकि मैं सक्रिय न रह सकूं. अगर मैं सक्रिय होता तो बनगांव सीट जीती जा सकती थी.”
तृणमूल नेतृत्व ने उन पर भरोसा बनाए रखते हुए उन्हें हाबरा से दोबारा उम्मीदवार बनाया है, जिसे लेकर भाजपा ने पार्टी पर निशाना साधा है. मलिक के लिए यह चुनाव न केवल व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का सवाल है, बल्कि क्षेत्र में अपनी राजनीतिक पकड़ साबित करने का भी अवसर है, जहां उन्होंने एक दशक पहले वाम दलों को कमजोर किया था.उन्होंने बताया कि पार्टी ने चुनाव की तैयारी पांच-छह महीने पहले ही शुरू कर दी थी और कार्यकर्ता घर-घर जाकर प्रचार कर रहे हैं. मलिक ने अपनी जीत को लेकर विश्वास जताते हुए कहा कि बनगांव उपखंड में तृणमूल को व्यापक समर्थन मिलेगा और इस बार भाजपा की सीटें घटेंगी. उन्होंने राज्य में किसी भी सत्ता विरोधी लहर से इनकार करते हुए कहा कि ममता बनर्जी के नेतृत्व में व्यापक विकास हुआ है और कल्याणकारी योजनाओं से लोगों को आर्थिक मजबूती मिली है. हाबरा सीट की सामाजिक संरचना भी अहम मानी जा रही है, जहां लगभग 80 प्रतिशत मतदाता हिंदू और 20 प्रतिशत मुस्लिम हैं. मतुआ समुदाय यहां महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे यह सीट तृणमूल और भाजपा के बीच कड़े मुकाबले का केंद्र बन गयी है.
मलिक ने पार्टी द्वारा 74 विधायकों के टिकट काटे जाने के फैसले का समर्थन करते हुए इसे नेतृत्व का अधिकार बताया. उन्होंने दावा किया, “तृणमूल कांग्रेस 231 से 242 के बीच सीटें जीतेगी.” उन्होंने भविष्य में राजनीति से हटने के संकेत भी दिए, लेकिन फिलहाल टीएमसी की जीत को लेकर आश्वस्त नजर आये. अब हाबरा का जनादेश तय करेगा कि मलिक की वापसी राजनीतिक पुनरुत्थान की कहानी बनेगी या पश्चिम बंगाल की कड़ी चुनावी जंग का एक और अध्याय भर रह जायेगी.प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
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