वाणिज्यिक वाहनों के थर्ड पार्टी इंश्योरेंस पर परिवहन संगठन नाखुश

Published by : GANESH MAHTO Updated At : 03 Feb 2026 2:03 AM

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इंश्योरेंस प्रीमियम संरचना में नया बदलाव परिवहन उद्योग के ताबूत में एक और कील ठोकने जैसा है.

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बस मालिकों के संगठन के मुताबिक नया नियम परिवहन उद्योग के ताबूत में कील ठोकने के समान

कोलकाता. वाणिज्यिक वाहनों के थर्ड पार्टी इंश्योरेंस को लेकर केंद्र सरकार के नये नियमों से परिवहन व्यवसायी नाखुश हैं. निजी बस मालिकों के संगठन ज्वाइंट काउंसिल ऑफ बस सिंडिकेट ने कहा कि यदि यह फैसला लागू हुआ तो देश के निजी परिवहन उद्योग को बड़ा झटका लगेगा. संगठन के सचिव तपन बनर्जी ने राज्य सरकार से दखल देने की मांग करते हुए इस फैसले की तुरंत समीक्षा की मांग की. इंश्योरेंस प्रीमियम संरचना में नया बदलाव परिवहन उद्योग के ताबूत में एक और कील ठोकने जैसा है. बनर्जी ने कहा कि मोटर व्हीकल एक्ट में साफ लिखा है कि कोई भी गाड़ी बिना इंश्योरेंस के सड़क पर नहीं चल सकती और बिना इंश्योरेंस के टैक्स, परमिट या सीएफ रिन्यूअल मुमकिन नहीं है. थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के मामले में नयी और पुरानी वाणिज्यिक गाड़ियों के लिए प्रीमियम एक जैसा है. नियम में नयी और पुरानी गाड़ियों के लिए अलग-अलग प्रीमियम का कोई जिक्र नहीं है. उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में कोई नया नियम लागू करने का क्या मतलब है. उन्होंने आगे कहा कि देश का परिवहन उद्योग गहरे संकट में है. हर साल इंश्योरेंस कंपनियां बेलगाम दर से प्रीमियम बढ़ा रही हैं. अगर फिर से नया बोझ डाला गया, तो स्थिति को संभालना नामुमकिन हो जायेगा. उन्होंने बस इंश्योरेंस की लागत में बढ़ोतरी के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 1975 में सालाना एक बस का इंश्योरेंस खर्च सिर्फ तीन हजार रुपये था.

2026 तक यह खर्च बढ़कर आम बसों के लिए लगभग 70 हजार रुपये, एक्सप्रेस बसों के लिए 1.25 लाख और एयर-कंडीशंड बसों के लिए दो लाख रुपये हो गया है. इस मुश्किल हालात में अगर केंद्र का नया फैसला लागू हुआ तो हालात को संभालना मुश्किल हो जायेगा. उन्होंने कहा कि यदि फैसला वापस नहीं लिया गया तो देश भर में जोरदार आंदोलन किया जायेगा. देश के अलग-अलग परिवहन संगठनों से संपर्क शुरू हो चुका है. एक बड़े आंदोलन की तैयारी पर बात चल रही है. परिवहन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि केंद्र के नये नियम की जानकारी है. निजी बस मालिकों से बात की जायेगी. इसके बाद ही कोई कदम उठाया जायेगा.

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