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राज्य के सभी संशोधनागारों में नयी तकनीक से लैस होंगे जैमर

Updated at : 14 Jan 2025 11:19 PM (IST)
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राज्य के सभी संशोधनागारों में नयी तकनीक से लैस होंगे जैमर

केंद्रीय गृह मंत्रालय की सलाह पर राज्य के संशोधनागारों में मोबाइल के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए नयी तकनीक से लैस जैमर लगाने का काम शुरू हुआ है. हाल ही में राज्य के संशोधनागार में बंद बांग्लादेशी आतंकियों की कुछ अवैध गतिविधियों का पर्दाफाश हुआ है.

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कोलकाता

. केंद्रीय गृह मंत्रालय की सलाह पर राज्य के संशोधनागारों में मोबाइल के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए नयी तकनीक से लैस जैमर लगाने का काम शुरू हुआ है. हाल ही में राज्य के संशोधनागार में बंद बांग्लादेशी आतंकियों की कुछ अवैध गतिविधियों का पर्दाफाश हुआ है. इसके बाद ही राज्य के कारा विभाग व गृह मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों के बीच बैठक हुई. बैठक में मोबाइल के इस्तेमाल पर रोक लगाने को लेकर चर्चा हुई.

राज्य के कारा विभाग के सूत्रों के मुताबिक बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति व वहां के आतंकी संगठनों की गतिविधियों की निर्दिष्ट जानकारी लेने के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से राज्य को कुछ परामर्श दिये गये हैं. इसमें कहा गया है कि संशोधनागारों में फोन के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए नयी तकनीक से लैस जैमर लगाने को कहा गया है. इसके राज्य के सभी संशोधनागारों में जैमर लगाने को लेकर तत्परता शुरू हुई है.

सिर्फ टू-जी मोबाइल नेटवर्क रोकने में ही सक्षम हैं अभी लगे हुए जैमर

: फिलहाल संशोधनागारों में जो जैमर हैं, वह टू-जी मोबाइल नेटवर्क को रोकने में सक्षम हैं. इस पुराने जैमर में टू-जी नेटवर्क को ब्लॉक किया जा सकता है. लेकिन इस समय मोबाइल फोन पर फोर-जी व फाइव-जी नेटवर्क का इस्तेमाल होता है. इसे देखते हुए अब जैमर में नयी तकनीक का इस्तेमाल शुरू हुआ है. यह भी बताया जा रहा है कि नयी तकनीक के इस्तेमाल से संशोधनागार व आसपास के इलाके में मोबाइल परिसेवा पर असर पड़ सकता है. इसे देखते हुए संशोधनागार के अधिकारी व आसपास के इलाके के लोगों के नंबर को इसमें छूट मिल सके, इसका इंतजाम भी किया जा रहा है. यह कुछ निर्दिष्ट मोबाइल नंबरों के लिए ही होगा.

विपक्ष के नेता भी जता चुके हैं चिंता

राज्य में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि संशोधनागारों में अत्याधुनिक जैमर नहीं होने से बांग्लादेशी आतंकी संशोधनागार से ही आतंकी गतिविधियों की साजिश रच रहे हैं. यह देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा है. राज्य में फिलहाल लगभग 60 संशोधनागार हैं. इसमें हजारों की संख्या में कुख्यात हत्यारे, डकैत सहित बांग्लादशी आतंकी भी शामिल हैं. जानकारी के मुताबिक खागड़गढ़ विस्फोट मामले का मुख्य आरोपी तारिकुल इस्लाम अनसारुल्ला बांग्ला टीम के सदस्य नूर इस्लाम के लिए लगातार संपर्क में था. इसका सबूत मिलने के बाद कारा विभाग ने इसकी रिपोर्ट नबान्न को भेजी थी. इसके बाद से ही जैमर लगाने को लेकर हलचल शुरू हुई. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी इसका संज्ञान लिया. राज्य को परामर्श जारी किया.

फिलहाल प्रेसिडेंसी व दमदम सेंट्रल संशोधनागार में लगेंगे अत्याधुनिक जैमर :

कारा विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि एक साथ सभी संशोधनागारों में अत्याधुनिक तकनीक से लैस जैमर लगाना संभव नहीं है. जरूरत के हिसाब से चरणबद्ध तरीके से यह काम किया जायेगा. इसी बीच, दो संशोधनागारों में जैमर लगाने को लेकर टेंडर जारी करने की प्रक्रिया शुरू की गयी है. नये जैमर का नाम ””टावर हरमोनियस कॉल ब्लॉकिंग सिस्टम”” बताया जा रहा है. फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के तहत प्रेसिडेंसी व दमदम सेंट्रल संशोधनागार में यह शुरू होने जा रहा है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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