एसआइआर बंद करो, राज्य में 28 जानें जा चुकीं, डर से और लोगाें की हो सकती है मौत : ममता बनर्जी
Updated at : 20 Nov 2025 12:59 AM (IST)
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मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है.
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संवाददाता, कोलकाता
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है. मुख्यमंत्री ने बुधवार को जलपाईगुड़ी के माल ब्लॉक में एक बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) की मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया और आरोप लगाया कि कर्मचारियों पर अमानवीय दबाव डाला जा रहा है. जिसकी वजह से लोग मानसिक रूप से मजबूर होकर जान दे रहे हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि एसआइआर लागू होने के बाद से अब तक राज्य में 28 मौतें हो चुकी हैं. उन्होंने दावा किया कि मृतका, एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता थी, जो बीएलओ के रूप में कार्यरत थी. उसने एसआइआर कार्य के असहनीय दबाव के कारण आत्महत्या कर ली. यह पूरा कामकाज इतना भारी और दबाव भरा हो चुका है कि अब तक 28 लोगों की जान चली गयी है. मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव से ठीक पहले इस प्रक्रिया को तेज करके जमीनी स्तर पर काम करने वालों को खतरे में डाला जा रहा है. सुश्री बनर्जी ने ‘एक्स’ पर जारी बयान में 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले निर्वाचन आयोग द्वारा सौंपे गये कार्य की आलोचना की और इसे ‘अनियोजित, अथक कार्यभार’ की संज्ञा दी. सुश्री बनर्जी ने आयोग से ‘विवेक से काम करने’ और इस अभियान को तत्काल निलंबित करने का अनुरोध किया है तथा चेतावनी दी है कि यदि वर्तमान गति से एसआइआर का काम जारी रहा तो और मौतें हो सकती हैं. तृणमूल कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि लंबी ड्यूटी के घंटे, यात्रा संबंधी आवश्यकताओं और समय सीमा पूरी करने के दबाव के कारण कई बीएलओ का स्वास्थ्य खराब हो चुका है.तीन साल का काम दो महीने में निपटाने का दबाव
सुश्री बनर्जी का कहना है कि जिस प्रक्रिया को पूरा होने में आमतौर पर तीन साल लगते हैं, उसे अचानक सिर्फ दो महीने में पूरा करने का आदेश दिया जा रहा है. उनके मुताबिक एसआइआर को चुनाव से ठीक पहले तेज कर दिया गया है, और इस जल्दबाजी का मकसद सिर्फ राजनीतिक स्वार्थ पूरा करना है. उनका दावा है कि इस वजह से बीएलओ और अन्य कर्मचारी मानसिक रूप से टूट रहे हैं. मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग से मांग की है कि वह इस पूरे कामकाज पर दुबारा सोचें और फिलहाल इसे रोक दें. यह सब ऐसे ही चलता रहा तो और जिंदगियां खतरे में पड़ सकती हैं.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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