ईरान पर US का शिकंजा: सभी समुद्री ट्रैफिक को ब्लॉक करने का ऐलान

होर्मुज स्ट्रेट (File Photo)
अमेरिकी सेना ने कहा है कि 13 अप्रैल से शुरू होने वाली यह कार्रवाई हर देश के जहाजों पर बराबर लागू होगी. जो भी जहाज ईरान के बंदरगाहों या तटीय इलाकों (खासकर अरब सागर और ओमान की खाड़ी वाले पोर्ट्स) का इस्तेमाल करेंगे उन पर रोक लगेगी.
यूनाइटेड स्टेट सेंट्रल कमांड ने ऐलान किया है कि 13 अप्रैल (सोमवार) सुबह 10 बजे से ईरान के बंदरगाहों पर नाकेबंदी शुरू होगी. CENTCOM के मुताबिक, ये नियम हर देश के जहाजों पर बराबर लागू होगा. जो भी जहाज ईरानी पोर्ट्स या तटीय इलाकों में आएंगे या जाएंगे, उन पर यह पाबंदी लागू रहेगी.
सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करके बताया कि ईरान के सभी बंदरगाहों पर आने-जाने वाले जहाजों पर नाकेबंदी लागू की जाएगी. यह फैसला राष्ट्रपति के ऐलान के मुताबिक लिया गया है.

चैनल 16 पर अमेरिकी नौसेना से संपर्क रखने की सलाह
CENTCOM ने साफ किया कि Strait of Hormuz से गैर-ईरानी बंदरगाहों के लिए आने-जाने वाले जहाजों की आवाजाही पर कोई रोक नहीं होगी. साथ ही व्यापारिक जहाजों को सलाह दी गई है कि वे आधिकारिक ‘नोटिस टू मेरिनर्स’ (आधिकारिक सूचना या अलर्ट) पर नजर रखें और Gulf of Oman व होर्मुज स्ट्रेट के पास काम करते समय चैनल 16 पर अमेरिकी नौसेना से संपर्क में रहें.
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होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को रोकना शुरू करेगा अमेरिका
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार (12 अप्रैल) को Truth Social पर कहा कि अमेरिका जल्द ही होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को रोकना शुरू करेगा. उन्होंने कहा कि खास निशाना उन जहाजों पर है जो इलीगल टोल दे रहे हैं. यह कदम उन जहाजों को निशाना बनाता दिख रहा है जो इस अहम समुद्री रास्ते से गुजरते वक्त चीनी युआन में लेन-देन कर रहे हैं. इसे लंबे समय से चले आ रहे पेट्रोडॉलर सिस्टम के लिए चुनौती माना जा रहा है. साथ ही अमेरिका के प्रतिबंधों से बचने का तरीका भी समझा जा रहा है.
पेट्रोडॉलर सिस्टम : वह व्यवस्था जिसमें दुनिया भर में कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) की खरीद-फरोख्त मुख्य रूप से अमेरिकी करेंसी यानी अमेरिकी डॉलर में होती है.
चीन और ईरान दोनों के खिलाफ अमेरिका का कड़ा रुख
इस कदम से साफ है कि अमेरिका ने चीन और ईरान दोनों के खिलाफ अपना रुख और कड़ा कर लिया है. दरअसल, ये दोनों देश अब अमेरिकी आर्थिक दबाव का खुलकर मुकाबला कर रहे हैं. चाहे वो तेल के कारोबार में डॉलर की जगह दूसरी करेंसी लाना हो या रणनीतिक इलाकों पर पकड़ बनाना. इसी वजह से तीनों देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है. हालात टकराव की ओर बढ़ते दिख रहे हैं.
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By Amitabh Kumar
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