ईरान पर US का शिकंजा: सभी समुद्री ट्रैफिक को ब्लॉक करने का ऐलान

Published by : Amitabh Kumar Updated At : 13 Apr 2026 6:46 AM

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होर्मुज स्ट्रेट (File Photo)

अमेरिकी सेना ने कहा है कि 13 अप्रैल से शुरू होने वाली यह कार्रवाई हर देश के जहाजों पर बराबर लागू होगी. जो भी जहाज ईरान के बंदरगाहों या तटीय इलाकों (खासकर अरब सागर और ओमान की खाड़ी वाले पोर्ट्स) का इस्तेमाल करेंगे उन पर रोक लगेगी.

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यूनाइटेड स्टेट सेंट्रल कमांड ने ऐलान किया है कि 13 अप्रैल (सोमवार) सुबह 10 बजे से ईरान के बंदरगाहों पर नाकेबंदी शुरू होगी. CENTCOM के मुताबिक, ये नियम हर देश के जहाजों पर बराबर लागू होगा. जो भी जहाज ईरानी पोर्ट्स या तटीय इलाकों में आएंगे या जाएंगे, उन पर यह पाबंदी लागू रहेगी.

सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करके बताया कि ईरान के सभी बंदरगाहों पर आने-जाने वाले जहाजों पर नाकेबंदी लागू की जाएगी. यह फैसला राष्ट्रपति के ऐलान के मुताबिक लिया गया है.

चैनल 16 पर अमेरिकी नौसेना से संपर्क रखने की सलाह

CENTCOM ने साफ किया कि Strait of Hormuz से गैर-ईरानी बंदरगाहों के लिए आने-जाने वाले जहाजों की आवाजाही पर कोई रोक नहीं होगी. साथ ही व्यापारिक जहाजों को सलाह दी गई है कि वे आधिकारिक ‘नोटिस टू मेरिनर्स’ (आधिकारिक सूचना या अलर्ट) पर नजर रखें और Gulf of Oman व होर्मुज स्ट्रेट के पास काम करते समय चैनल 16 पर अमेरिकी नौसेना से संपर्क में रहें.

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होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को रोकना शुरू करेगा अमेरिका

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार (12 अप्रैल) को Truth Social पर कहा कि अमेरिका जल्द ही होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को रोकना शुरू करेगा. उन्होंने कहा कि खास निशाना उन जहाजों पर है जो इलीगल टोल दे रहे हैं. यह कदम उन जहाजों को निशाना बनाता दिख रहा है जो इस अहम समुद्री रास्ते से गुजरते वक्त चीनी युआन में लेन-देन कर रहे हैं. इसे लंबे समय से चले आ रहे पेट्रोडॉलर सिस्टम के लिए चुनौती माना जा रहा है. साथ ही अमेरिका के प्रतिबंधों से बचने का तरीका भी समझा जा रहा है.

पेट्रोडॉलर सिस्टम : वह व्यवस्था जिसमें दुनिया भर में कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) की खरीद-फरोख्त मुख्य रूप से अमेरिकी करेंसी यानी अमेरिकी डॉलर में होती है.

चीन और ईरान दोनों के खिलाफ अमेरिका का कड़ा रुख

इस कदम से साफ है कि अमेरिका ने चीन और ईरान दोनों के खिलाफ अपना रुख और कड़ा कर लिया है. दरअसल, ये दोनों देश अब अमेरिकी आर्थिक दबाव का खुलकर मुकाबला कर रहे हैं. चाहे वो तेल के कारोबार में डॉलर की जगह दूसरी करेंसी लाना हो या रणनीतिक इलाकों पर पकड़ बनाना. इसी वजह से तीनों देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है. हालात टकराव की ओर बढ़ते दिख रहे हैं.

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लेखक के बारे में

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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