मौसम की अनिश्चितताओं से निबटने के लिए विशेष पहल

Updated at : 22 Aug 2024 11:22 PM (IST)
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मौसम की अनिश्चितताओं से निबटने के लिए विशेष पहल

कृषि के लिए आधुनिक तकनीक के प्रयोग को लेकर ऑस्ट्रेलिया के प्रतिनिधियों के साथ मंत्री ने की बैठक

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कृषि के लिए आधुनिक तकनीक के प्रयोग को लेकर ऑस्ट्रेलिया के प्रतिनिधियों के साथ मंत्री ने की बैठक कोलकाता. मौसम की अनिश्चितताओं के कारण राज्य में कृषि सेक्टर को काफी नुकसान हो रहा है. माैसम की मार हर पल खेती को चुनौती दे रही है. कभी अति बारिश, तो कभी भीषण गर्मी, कृषि विभाग को हर पल चुनौती दे रहा है. ऐसे में राज्य सरकार ने इन चुनौतियों से निबटने के लिए आधुनिक तकनीक का प्रयोग करने की योजना बनायी है. इसे लेकर राज्य के कृषि मंत्री शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने ऑस्ट्रेलिया के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की है. बताया गया है कि गुरुवार को ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के कृषि मंत्री से मुलाकात की. इस बैठक में दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने कृषि क्षेत्र में मिलकर काम करने पर चर्चा की. यह पहली बार नहीं है कि ऑस्ट्रेलिया और पश्चिम बंगाल, कृषि के क्षेत्र में एक साथ काम कर रहे हैं. ऑस्ट्रेलिया पहले से ही ऑस्ट्रेलियाई सेंटर फॉर इंटरनेशनल एग्रीकल्चरल रिसर्च (एसीआइएआर) परियोजना के तहत राज्य के चार जिलों में काम कर रहा है. यह परियोजना उत्तर बंगाल कृषि विश्वविद्यालय के साथ संयुक्त रूप से क्रियान्वित की जा रही है. मालदा, दक्षिण दिनाजपुर, कूचबिहार और अलीपुरदुआर में वह राज्य सरकार के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. इतना ही नहीं, उन्होंने कृषि से जुड़ीं महिलाओं को सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है. यह परियोजना चार जिलों की 30 हजार हेक्टेयर भूमि पर चल रही है. बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में कृषि मंत्री शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण कृषि क्षेत्र में जो चुनौतियां पैदा हुई हैं, उनसे निबटने के लिए आधुनिक तकनीक से किस तरह की मदद मिल सकती है, इस मुद्दे पर हमारी चर्चा हुई. ऑस्ट्रेलियाई प्रतिनिधिमंडल ने कृषि क्षेत्र में राज्य सरकार की प्रगति की सराहना की. उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के विभिन्न प्रोजेक्ट में ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर जो काम चल रहा है, उसमें राज्य को सफलता भी मिली है. इस परियोजना के सफल कार्यान्वयन से उन क्षेत्रों में फसल उत्पादन की क्षमता में चार से छह प्रतिशत की वृद्धि हुई है. वहीं, ईंधन की खपत में काफी कमी आयी है और उस क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर भी कम हो गया है.

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