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कचरा प्रबंधन के मामले में पेश की मिसाल

Updated at : 31 Mar 2025 1:09 AM (IST)
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कचरा प्रबंधन के मामले में पेश की मिसाल

वैद्यवाटी नगरपालिका : प्रतिदिन 250 टन कचरे की रीसाइक्लिंग की है व्यवस्था

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प्रत्येक दिन कचरे से पांच टन जैविक खाद की जाती है तैयार

मुरली चौधरी, हुगली

जिले का वैद्यवाटी नगरपालिका क्षेत्र ठोस कचरा प्रबंधन में एक नया मिसाल कायम किया है. जहां हावड़ा नगर निगम अभी भी कचरा निपटान की समस्या से जूझ रहा है, वहीं वैद्यवाटी नगरपालिका ने बायो माइनिंग तकनीक के जरिए एक प्रभावी और टिकाऊ समाधान प्रस्तुत किया है. नगरपालिका चेयरमैन पिंटू महतो ने कहा, वैद्यवाटी का क्षेत्रीय कचरा प्रबंधन केंद्र सही कचरा निपटान और पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) का एक आदर्श मॉडल बन चुका है. पिछले एक वर्ष से यहां बायो माइनिंग की प्रक्रिया चल रही है, जिससे खाद और प्लास्टिक उत्पाद तैयार किये जा रहे हैं, और बाकी अपशिष्ट सीमेंट कारखानों को भेजा जा रहा है. यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक है, बल्कि अन्य नगरपालिकाओं को भी इससे लाभ मिल रहा है. गंगा के पश्चिमी किनारे स्थित वैद्यवाटी नगरपालिका ने दिल्ली रोड के किनारे लगभग 52 एकड़ भूमि पर एक अत्याधुनिक ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्र स्थापित किया है. यह संयंत्र श्रीरामपुर, उत्तरपाड़ा-कोन्नगर, रिसड़ा, चांपदानी, हुगली-चुंचुड़ा और बेलगछिया सहित सात नगरपालिकाओं से आनेवाले प्रतिदिन 250 टन कचरे काे प्रोसेस करता है. इस परियोजना को नगर विकास विभाग की संस्था ‘सुडा’ के वित्तीय सहयोग से विकसित किया गया है. संयंत्र में जैविक और अजैविक कचरे को अलग करने की विशेष व्यवस्था है. इसके तहत, प्रत्येक घर को नीले और हरे रंग की बाल्टियां दी गयी हैं, ताकि जैविक और अजैविक कचरे को अलग-अलग इकट्ठा किया जा सके.

वैद्यवाटी के चेयरमैन पिंटू महतो के मुताबिक इस कचरा प्रबंधन संयंत्र में कुल चार लैंडफिल (सैनिटरी पिट) बनाये गये हैं, जिनमें से प्रत्येक प्रतिदिन 200 टन कचरा समाहित किया जाता है. जब कोई लैंडफिल भर जाता है, तो उसमें जमा पुराने कचरे (लीगेसी वेस्ट) को बायो माइनिंग तकनीक से पुनः उपयोगी बनाया जाता है. इसके लिए एक विशेष ठेकेदार एजेंसी को जिम्मेदारी दी गयी है.

संयंत्र में 10 ट्रॉमेल वाहन और उन्नत मशीनें लगायी गयी हैं, जो प्रत्येक दिन पांच टन से अधिक जैविक खाद तैयार करती हैं. इसके अलावा, कचरे में मौजूद प्लास्टिक ( आरडीएफ) को अलग कर सीमेंट कारखानों को भेजा जाता है, जबकि बाकी बचा कचरा निचले क्षेत्रों को भरने के लिए उपयोग में लाया जाता है. पिंटू महतो ने बताया कि 24 फरवरी 2023 को वैद्यवाटी नगरपालिका ने एक विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया था, जिसमें कचरे से बनी घरेलू और सजावटी वस्तुएं प्रदर्शित की गयीं. इस पहल का उद्देश्य पुनर्चक्रण को बढ़ावा देना और सतत विकास को प्रोत्साहित करना था.

वैद्यवाटी नगरपालिका के सैनिटरी इंस्पेक्टर कृष्णेंदु कुंडू के अनुसार, दिल्ली रोड के पूर्वी हिस्से में जैविक और अजैविक कचरे को अलग करने और पुनः उपयोगी बनाने के लिए एक विशेष संयंत्र स्थापित किया गया है. वहीं, पश्चिमी हिस्से में एक क्षेत्रीय कचरा प्रबंधन केंद्र बनाया गया है, जिससे लैंडफिल में कचरे का ढेर नहीं लग रहा और कचरा प्रबंधन सुचारू रूप से हो रहा है. इस प्रकार, वैद्यवाटी नगरपालिका ने कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव लाते हुए पर्यावरण हितैषी मॉडल प्रस्तुत किया है, जो अन्य नगरपालिकाओं के लिए एक प्रेरणा बन गया है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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GANESH MAHTO

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By GANESH MAHTO

GANESH MAHTO is a contributor at Prabhat Khabar.

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