कोलकाता
. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने मंगलवार को आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिलों में राज्य के अधिकारियों ने मतदाता सूची में दर्ज प्रविष्टियों पर आपत्ति दर्ज कराने से जुड़े प्रपत्र सात को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है. श्री भट्टाचार्य ने मंगलवार को सॉल्टलेक स्थित प्रदेश मुख्यालय में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तर कोलकाता, दक्षिण कोलकाता, हावड़ा सदर, उत्तर दिनाजपुर, श्रीरामपुर, हुगली, मेदिनीपुर, बांकुड़ा, कूचबिहार, बीरभूम, पुरुलिया और बैरकपुर सहित कई स्थानों पर इस तरह की घटनाएं सामने आयी हैं, जहां भाजपा कार्यकर्ता विरोध कर रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (इआरओ) और सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (एइआरओ) एक वैध लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित कर रहे हैं. उन्होंने राज्य प्रशासन पर अवैध मतदाताओं को संरक्षण देने का आरोप लगाया. श्री भट्टाचार्य ने कहा कि भाजपा के बीएलए भारत निर्वाचन आयोग के प्रावधानों के अनुसार प्रपत्र सात के जरिये विधिवत रूप से आपत्तियां जमा कराने के लिए इआरओ (एसडीओ) से संपर्क किया. इआरओ ने यह कहते हुए जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया कि वह सक्षम प्राधिकारी नहीं हैं और उन्हें एइआरओ (बीडीओ) के पास भेज दिया. पार्टी का आरोप है कि एइआरओ ने जिला निर्वाचन कार्यालय से ‘निर्देशों’ के अभाव का हवाला देते हुए प्रपत्र स्वीकार करने से इनकार कर दिया और निवासियों को वापस भेज दिया. भाजपा नेता ने कहा कि इससे जान-बूझकर की गयी टालमटोल और सुनियोजित बाधा का पर्दाफाश हुआ है तथा कानून का पालन करने वाले नागरिकों को नौकरशाही के जाल में धकेल दिया गया है. उन्होंने दावा किया कि इआरओ ने निर्देशों के अभाव का हवाला देते हुए भाजपा प्रतिनिधिमंडल द्वारा प्रस्तुत प्रपत्र-सात को स्वीकार करने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश स्पष्ट हैं. यह जान-बूझकर की गयी देरी वैध आपत्तियों को रोकने के उद्देश्य से की गयी है.शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची के शुद्धिकरण की प्रक्रिया (एसआइआर) देश के 11 राज्यों में चल रही है, लेकिन सिर्फ पश्चिम बंगाल सरकार शुरू से ही इस प्रक्रिया का विरोध कर रही है. उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग से जुड़े जिन मुद्दों पर भाजपा की आपत्तियां हैं, उन्हें अब सीधे आयोग के समक्ष रखा जायेगा.
शमिक भट्टाचार्य ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीइओ) और भारत निर्वाचन आयोग (इसीआइ) से प्रश्न किया कि ऐसी प्रक्रिया का क्या औचित्य है, जिसमें बीएलओ दबाव में काम करने को मजबूर हों या प्रक्रिया के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की स्थिति उत्पन्न हो. श्री भट्टाचार्य ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि एसआइआर प्रक्रिया इसी तरह अव्यवस्थित ढंग से चलती रही, तो भाजपा पश्चिम बंगाल में चुनाव नहीं होने देगी-यह हमारी स्पष्ट मांग है. उन्होंने निर्वाचन आयोग से एसआइआर के सुचारू संचालन और सभी स्तरों पर बेहतर समन्वय स्थापित करने की मांग की.शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि मुख्यमंत्री एआइ के उपयोग का आरोप लगाकर जनता को गुमराह कर रही हैं और उनकी पार्टी एसआइआर प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलने नहीं देना चाहती. वे दोषपूर्ण मतदाता सूची के आधार पर चुनाव कराना चाहती हैं, जो लोकतंत्र के लिए घातक है.
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