बंगाल के ‘धान के कटोरे’ में किसानों का दर्द, MSP की जगह बिचौलियों का राज, क्या पूर्व बर्धमान में आलू बिगाड़ेगा राजनीतिक दलों का खेल? पढ़ें ग्राउंड रिपोर्ट

Published by :Mithilesh Jha
Published at :28 Apr 2026 10:32 PM (IST)
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Purba Bardhaman Agriculture Crisis West Bengal Election 2026

Purba Bardhaman Agriculture Crisis: पूर्व बर्धमान की 16 सीटों पर कृषि संकट सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है. धान और आलू की गिरती कीमतों और बिचौलियों की मनमानी से किसान परेशान हैं. जानें केतुग्राम, मंगलकोट और औसग्राम का पूरा सियासी समीकरण.

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Purba Bardhaman Agriculture Crisis: पश्चिम बंगाल का ‘धान का कटोरा’ कहा जाने वाला पूर्व बर्धमान जिला इस बार चुनावी दोराहे पर खड़ा है. राज्य के कुल धान उत्पादन में 10 फीसदी की हिस्सेदारी रखने वाले इस जिले में फसल की पैदावार तो बंपर है, लेकिन किसानों की जेब खाली है.

वामपंथ के अभेद्य दुर्ग में टीएमसी-बीजेपी की जंग

बर्धमान उत्तर, केतुग्राम, मंगलकोट और आउसग्राम जैसे क्षेत्रों में इस बार सिंचाई और बुनियादी ढांचे से ज्यादा फसलों की सही कीमत और बिचौलियों की मनमानी चुनावी विमर्श के केंद्र में है. कभी वामपंथ का अभेद्य दुर्ग रहे इन इलाकों में अब तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भाजपा के बीच वर्चस्व की जंग छिड़ी है.

व्यापारी तय करते हैं किसान की किस्मत

जिले के ग्रामीण इलाकों में फसलों की खरीद को लेकर भारी नाराजगी है. उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी होने के बावजूद बढ़ती लागत और अस्थिर बाजार मूल्य ने किसानों की कमर तोड़ दी है. किसानों का आरोप है कि सरकारी खरीद में देरी के कारण उन्हें अपनी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम दाम पर निजी व्यापारियों को बेचनी पड़ती है.

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पैदावार बढ़ी, कमाई अनिश्चित

एक किसान ने दर्द साझा करते हुए कहा- एमएसपी कागजों पर तो है, लेकिन हमें क्या मिलेगा यह सरकार नहीं, व्यापारी तय करता है. आलू किसान अमित कुइल्या के मुताबिक, सिंचाई और नयी किस्मों से पैदावार तो बढ़ी है, लेकिन आय अब भी अनिश्चित है.

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इन सीटों पर मुस्लिम और एससी वोटर हैं निर्णायक

  • मंगलकोट विधानसभा : यहां मुस्लिम और दलित (एससी) की आबादी 63 प्रतिशत से अधिक है. वर्ष 1962 से अब तक 11 बार वामपंथियों ने यहां जीत दर्ज की है, लेकिन वर्ष 2016 से इस सीट पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का कब्जा है.
  • आउसग्राम (SC) विधानसभा : यहां टीएमसी के अभेदानंद थंदर और भाजपा की कलिता माझी के बीच सीधा मुकाबला है. टीएमसी अपनी कल्याणकारी योजनाओं पर भरोसा जता रही है, तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) बेरोजगारी और औद्योगिक विफलता को मुद्दा बना रही है.
  • केतुग्राम विधानसभा : यहां टीएमसी के शेख शाहनवाज लगातार चौथी बार मैदान में हैं. इस क्षेत्र में 34 फीसदी मुस्लिम और 30 फीसदी एससी आबादी है, जो किसी भी दल का भविष्य बना सकती है.
  • बर्धमान उत्तर (SC) विधानसभा : कभी माकपा का मजबूत किला रही इस सीट पर अब चतुष्कोणीय मुकाबला है, जिसमें टीएमसी और भाजपा के बीच कांटे की टक्कर मानी जा रही है.

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Purba Bardhaman: शहरी बनाम ग्रामीण मुद्दे

जिले के चुनावी मिजाज में एक बड़ा अंतर साफ नजर आता है. ग्रामीण क्षेत्रों का मुख्य गुस्सा फसलों की खरीद और खेती की लागत को लेकर है. शहरी क्षेत्र के नागरिक बुनियादी ढांचे और विकास की कमी से असंतुष्ट हैं.

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औद्योगिक विकास की रफ्तार ने बढ़ायी युवाओं की चिंता

मंगलकोट जैसे इलाकों में चावल मिलें और कोल्ड स्टोरेज स्थानीय अर्थव्यवस्था की जान हैं, लेकिन औद्योगिक विकास की धीमी रफ्तार युवाओं के लिए चिंता का विषय बनी हुई है. 29 अप्रैल को होने वाला मतदान यह तय करेगा कि ‘धान का कटोरा’ ममता की झोली में जायेगा या यहां ‘कमल’ अपनी जड़ें जमायेगा.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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