बंगाल के ‘धान के कटोरे’ में किसानों का दर्द, MSP की जगह बिचौलियों का राज, क्या पूर्व बर्धमान में आलू बिगाड़ेगा राजनीतिक दलों का खेल? पढ़ें ग्राउंड रिपोर्ट

Purba Bardhaman Agriculture Crisis: पूर्व बर्धमान की 16 सीटों पर कृषि संकट सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है. धान और आलू की गिरती कीमतों और बिचौलियों की मनमानी से किसान परेशान हैं. जानें केतुग्राम, मंगलकोट और औसग्राम का पूरा सियासी समीकरण.
Purba Bardhaman Agriculture Crisis: पश्चिम बंगाल का ‘धान का कटोरा’ कहा जाने वाला पूर्व बर्धमान जिला इस बार चुनावी दोराहे पर खड़ा है. राज्य के कुल धान उत्पादन में 10 फीसदी की हिस्सेदारी रखने वाले इस जिले में फसल की पैदावार तो बंपर है, लेकिन किसानों की जेब खाली है.
वामपंथ के अभेद्य दुर्ग में टीएमसी-बीजेपी की जंग
बर्धमान उत्तर, केतुग्राम, मंगलकोट और आउसग्राम जैसे क्षेत्रों में इस बार सिंचाई और बुनियादी ढांचे से ज्यादा फसलों की सही कीमत और बिचौलियों की मनमानी चुनावी विमर्श के केंद्र में है. कभी वामपंथ का अभेद्य दुर्ग रहे इन इलाकों में अब तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भाजपा के बीच वर्चस्व की जंग छिड़ी है.
व्यापारी तय करते हैं किसान की किस्मत
जिले के ग्रामीण इलाकों में फसलों की खरीद को लेकर भारी नाराजगी है. उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी होने के बावजूद बढ़ती लागत और अस्थिर बाजार मूल्य ने किसानों की कमर तोड़ दी है. किसानों का आरोप है कि सरकारी खरीद में देरी के कारण उन्हें अपनी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम दाम पर निजी व्यापारियों को बेचनी पड़ती है.
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पैदावार बढ़ी, कमाई अनिश्चित
एक किसान ने दर्द साझा करते हुए कहा- एमएसपी कागजों पर तो है, लेकिन हमें क्या मिलेगा यह सरकार नहीं, व्यापारी तय करता है. आलू किसान अमित कुइल्या के मुताबिक, सिंचाई और नयी किस्मों से पैदावार तो बढ़ी है, लेकिन आय अब भी अनिश्चित है.
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इन सीटों पर मुस्लिम और एससी वोटर हैं निर्णायक
- मंगलकोट विधानसभा : यहां मुस्लिम और दलित (एससी) की आबादी 63 प्रतिशत से अधिक है. वर्ष 1962 से अब तक 11 बार वामपंथियों ने यहां जीत दर्ज की है, लेकिन वर्ष 2016 से इस सीट पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का कब्जा है.
- आउसग्राम (SC) विधानसभा : यहां टीएमसी के अभेदानंद थंदर और भाजपा की कलिता माझी के बीच सीधा मुकाबला है. टीएमसी अपनी कल्याणकारी योजनाओं पर भरोसा जता रही है, तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) बेरोजगारी और औद्योगिक विफलता को मुद्दा बना रही है.
- केतुग्राम विधानसभा : यहां टीएमसी के शेख शाहनवाज लगातार चौथी बार मैदान में हैं. इस क्षेत्र में 34 फीसदी मुस्लिम और 30 फीसदी एससी आबादी है, जो किसी भी दल का भविष्य बना सकती है.
- बर्धमान उत्तर (SC) विधानसभा : कभी माकपा का मजबूत किला रही इस सीट पर अब चतुष्कोणीय मुकाबला है, जिसमें टीएमसी और भाजपा के बीच कांटे की टक्कर मानी जा रही है.
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Purba Bardhaman: शहरी बनाम ग्रामीण मुद्दे
जिले के चुनावी मिजाज में एक बड़ा अंतर साफ नजर आता है. ग्रामीण क्षेत्रों का मुख्य गुस्सा फसलों की खरीद और खेती की लागत को लेकर है. शहरी क्षेत्र के नागरिक बुनियादी ढांचे और विकास की कमी से असंतुष्ट हैं.
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औद्योगिक विकास की रफ्तार ने बढ़ायी युवाओं की चिंता
मंगलकोट जैसे इलाकों में चावल मिलें और कोल्ड स्टोरेज स्थानीय अर्थव्यवस्था की जान हैं, लेकिन औद्योगिक विकास की धीमी रफ्तार युवाओं के लिए चिंता का विषय बनी हुई है. 29 अप्रैल को होने वाला मतदान यह तय करेगा कि ‘धान का कटोरा’ ममता की झोली में जायेगा या यहां ‘कमल’ अपनी जड़ें जमायेगा.
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By Mithilesh Jha
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