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सीआरपीसी की धारा 239 : सबूतों की कमी पर अभियुक्त को रिहा करने का प्रावधान

Updated at : 10 Aug 2025 1:09 AM (IST)
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सीआरपीसी की धारा 239 : सबूतों की कमी पर अभियुक्त को रिहा करने का प्रावधान

कलकत्ता हाइकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता देवब्रत उपाध्याय ने इस संबंध में बताया कि धारा 239 उन मामलों को आगे बढ़ने से रोकती है, जिनमें ठोस सबूतों की कमी होती है.

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कोलकाता. दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 239 एक महत्वपूर्ण प्रावधान है, जो अदालत को उन अभियुक्तों को रिहा करने का अधिकार देता है जिनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं. इस धारा का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि न्याय प्रक्रिया का अनावश्यक दुरुपयोग न हो और लोगों को बेवजह की न्यायिक कार्यवाही से बचाया जा सके. कलकत्ता हाइकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता देवब्रत उपाध्याय ने इस संबंध में बताया कि धारा 239 उन मामलों को आगे बढ़ने से रोकती है, जिनमें ठोस सबूतों की कमी होती है. अदालत इस धारा के तहत अभियुक्त को रिहा करने से पहले कई पहलुओं पर विचार करती है, ताकि यह तय किया जा सके कि क्या मामले को सुनवाई के लिए आगे बढ़ाना उचित है या नहीं. उन्होंने बताया कि अदालतें आमतौर पर तब मामलों को रद्द करती हैं, जब अभियोजन पक्ष अभियुक्त के अपराध को साबित करने के लिए विश्वसनीय, प्रासंगिक या पर्याप्त सबूत पेश करने में नाकाम रहता है. इससे यह सुनिश्चित होता है कि केवल पुख्ता सबूतों वाले मामलों की ही सुनवाई हो, जिससे अभियुक्त को अनुचित कार्यवाही से बचाया जा सके.

बराकर से विशेष गुप्ता का सवाल

मेरे भाई सोशल वर्कर हैं और बालू माफियाओं के खिलाफ आवाज उठाने पर उनके खिलाफ झूठा केस दर्ज किया गया है. क्या कोई वैकल्पिक रास्ता है?

जवाब

अगर आपको लगता है कि मामला झूठा है, तो सबसे पहले सभी केस की सर्टिफाइड कॉपी निकालें और हाइकोर्ट में एफआइआर रद्द कराने की याचिका दाखिल करें. इसके साथ ही पुलिस कमिश्नर को लिखित आवेदन देकर मामले की जांच का अनुरोध भी करें.

जगदल से राहुल कुमार का सवाल

मैंने 2006 में एक जमीन रजिस्ट्री करायी थी और तब से टैक्स भी जमा कर रहा हूं. लेकिन 2018 में जब म्यूटेशन (परचा) कराने गया, तो पता चला कि किसी और ने म्यूटेशन करा लिया है. अब मुझे क्या करना चाहिए?

जवाब

म्यूटेशन केवल रिकॉर्ड रखने वाला एक दस्तावेज है, इससे संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं बनता. आप आरटीआइ के जरिए उस व्यक्ति के बारे में सभी दस्तावेज मांगें, जिसके आधार पर उसने म्यूटेशन कराया है. फिर उस म्यूटेशन पर सवाल उठाते हुए विभाग को एक पत्र लिखें और पूछें कि आपके नाम पर म्यूटेशन क्यों नहीं किया जाना चाहिए. यदि जवाब नकारात्मक आता है, तो आप उस आदेश को उचित न्यायालय में चुनौती दे सकते हैं.

हुगली से किरण अवस्थी का सवाल

मेरे घर से मेरी संपत्ति के मूल दस्तावेज खो गये हैं, मुझे क्या करना चाहिए?

जवाब

सबसे पहले, तुरंत स्थानीय पुलिस थाने में जीडी (जनरल डायरी) दर्ज करायें. इसके बाद किसी स्थानीय अखबार में इसकी सूचना प्रकाशित करायें. फिर संबंधित रजिस्ट्रार कार्यालय से दस्तावेजों की प्रमाणित प्रति (सर्टिफाइड कॉपी) प्राप्त करें.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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GANESH MAHTO

लेखक के बारे में

By GANESH MAHTO

GANESH MAHTO is a contributor at Prabhat Khabar.

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