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डिटेंशन सेंटर को लेकर सियासी घमासान

Updated at : 03 Sep 2025 11:21 PM (IST)
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डिटेंशन सेंटर को लेकर सियासी घमासान

तृणमूल, भाजपा, कांग्रेस और वाम दल आमने-सामने

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तृणमूल, भाजपा, कांग्रेस और वाम दल आमने-सामने कोलकाता. देश के सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में डिटेंशन सेंटर बनाने के केंद्र सरकार के फैसले को लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति गरमा गयी है. अवैध विदेशी नागरिकों को उनके देश वापस भेजने से पहले डिटेंशन सेंटर में रखने के गृह मंत्रालय के निर्देश ने सियासी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप को तेज कर दिया है. इस्कॉन का समर्थन: वहीं, इस फैसले का इस्कॉन के उपाध्यक्ष राधारमण दास ने समर्थन किया है. उन्होंने कहा : अगर कोई अवैध तरीके से भारत में घुसा है और देश को नुकसान पहुंचा रहा है, तो कार्रवाई होनी ही चाहिए. डिटेंशन कैंप जेल नहीं है, यहां सिर्फ कागजी प्रक्रिया पूरी होने तक रखा जाता है और फिर अवैध नागरिकों को उनके देश भेज दिया जाता है. लेकिन ध्यान रहे कि किसी भारतीय नागरिक को गलती से भी ऐसे कैंप में न डाला जाये. चुनावी मुद्दा बनने की संभावना : राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डिटेंशन सेंटर का मुद्दा आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकता है. भाजपा इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और अवैध घुसपैठ से जोड़ रही है, जबकि तृणमूल इसे मानवीय अधिकार और बंगाल की अस्मिता से जोड़ कर जनता के बीच ले जाना चाहती है. तृणमूल का हमला तृणमूल कांग्रेस ने इस फैसले को तीखे शब्दों में खारिज किया है. पार्टी नेता अरूप चक्रवर्ती ने कहा : यह हिटलर के जर्मनी की तस्वीर है. पहले डी- वोटर बनाओ, फिर नागरिकता रद्द करो और अंत में कंसन्ट्रेशन कैंप में इंसानों को जानवरों की तरह बांध कर रखो. जब तक पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार है, तब तक बंगाल के किसी भी नागरिक को जबरदस्ती ऐसे कैंप में भेजने का सपना भाजपा देखना भी छोड़ दे. भाजपा का पलटवार इस पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष डॉ सुकांत मजूमदार ने कहा : पिछले कुछ दिनों में ही राज्य पुलिस ने कई बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा है. उन्हें कहां रखा गया? जेल में ही न! वही तो डिटेंशन कैंप है. डिटेंशन का मतलब यह नहीं कि कोई नया किला बनाया जायेगा और गब्बर सिंह जेलर बनेगा. यह केवल अवैध विदेशी नागरिकों को रखने का स्थान है, जहां से उन्हें वापस भेजा जाता है. कांग्रेस का तंज इस मुद्दे पर तृणमूल और भाजपा, दोनों पर हमला बोलते हुए पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने कहा : यह दोनों पार्टियों का आपसी खेल है. एक दिन मुख्यमंत्री कहेंगी कि बंगाल में कोई डिटेंशन सेंटर नहीं बनेगा. चुनाव के समय लोगों को बांटने की राजनीति के लिए नया मुद्दा गढ़ा गया है.” वाम दल का आरोप माकपा नेता डॉ सुजन चक्रवर्ती ने केंद्र सरकार पर सीधा निशाना साधते हुए कहा : केंद्र की सत्ता में बैठी भाजपा अब भी डर का माहौल बनाकर राजनीति करना चाहती है. लोगों की पहचान और अधिकार छीनने की कोशिश हो रही है. लेकिन जनता इसे न पहले मानती थी, न आगे मानेगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SANDIP TIWARI

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By SANDIP TIWARI

SANDIP TIWARI is a contributor at Prabhat Khabar.

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