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डीवीसी ने 55,000 क्यूसेक पानी छोड़ा

Updated at : 06 Oct 2025 11:24 PM (IST)
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डीवीसी ने 55,000 क्यूसेक पानी छोड़ा

दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) ने सोमवार को झारखंड के मैथन और पंचेत जलाशयों से 55,000 क्यूसेक पानी छोड़ा, जिससे पश्चिम बंगाल के दक्षिणी जिलों में बाढ़ की नयी चिंताएं पैदा हो गयी हैं.

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कोलकाता.

दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) ने सोमवार को झारखंड के मैथन और पंचेत जलाशयों से 55,000 क्यूसेक पानी छोड़ा, जिससे पश्चिम बंगाल के दक्षिणी जिलों में बाढ़ की नयी चिंताएं पैदा हो गयी हैं. राज्य सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने बताया कि डीवीसी ने इससे पहले तीन सितंबर को अपने जलाशयों से 70,000 क्यूसेक पानी छोड़ा था, जिसके बाद राज्य सरकार ने निचले जिलों में बाढ़ की आशंका के चलते इसकी आलोचना की थी. बंगाल सरकार ने डीवीसी पर उचित समन्वय के बिना पानी छोड़ने का आरोप लगाया है. अधिकारी बताते हैं कि दक्षिणी जिलों में बाढ़ का खतरा फिर से मंडरा रहा है, जबकि उत्तर बंगाल लगातार भारी बारिश से जूझ रहा है.

बिना सूचना के छोड़ा जा रहा पानी : मंत्री

पश्चिम बंगाल के सिंचाई मंत्री मानस भुइयां ने सोमवार को दावा किया कि डीवीसी उनकी सरकार के साथ किसी समन्वय के बिना हर दिन पानी छोड़ रहा है. उन्होंने बताया कि डीवीसी से पानी छोड़े जाने का कोई निश्चित “सुरक्षित स्तर ” नहीं है, क्योंकि बाढ़ का खतरा कई कारकों पर निर्भर करता है, जिसमें छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा और नदियों की जल वहन करने की वर्तमान क्षमता शामिल है. उन्होंने कहा, ‘डीवीसी के मैथन और पंचेत बांधों में गाद निकालने में वर्षों की उपेक्षा के कारण उनकी जल धारण क्षमता में भारी कमी आयी है.’ हालांकि उन्होंने इस बारे में तकनीकी विवरण नहीं दिया. श्री भुइयां ने आरोप लगाया कि डीवीसी पानी छोड़ने के संबंध में एकतरफा फैसले लेता है.

उन्होंने आरोप लगाया, ‘डीवीसी के कदमों के जरिए केंद्र बंगाल के साथ सौतेला व्यवहार कर रहा है.’ राज्य के एक वरिष्ठ सिंचाई अधिकारी ने कहा कि स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है, क्योंकि क्षेत्र की नदियां हाल ही में हुई भारी वर्षा के कारण उफान पर हैं. डीवीसी ने तीन अक्तूबर को अपने जलाशयों से 70,000 क्यूसेक पानी छोड़ा था, जिसके बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने तीखी आलोचना की थी, क्योंकि निचले जिलों में बाढ़ की आशंका उत्पन्न हो गयी थी.

डीवीसी अधिकारियों ने कहा कि बाढ़ केवल पानी छोड़े जाने पर ही निर्भर नहीं करती, बल्कि निचली नदियों की जल धारण क्षमता पर भी निर्भर करती है, जो निगम के नियंत्रण या प्रबंधन के अधीन नहीं हैं. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मैथन डैम का जलस्तर 483 फुट पर है, जबकि इसका अधिकतम बाढ़ स्तर 495 फुट है, जबकि पंचेत जलाशय का जलस्तर 415 फुट पर है, जबकि इसका अधिकतम बाढ़ स्तर 435 फुट है. जमालपुर और रोंडिया सहित दामोदर नदी के किनारे स्थित प्रमुख निगरानी केंद्रों से प्राप्त आंकड़े से जलस्तर में वृद्धि का संकेत मिला, हालांकि सुबह 8 बजे यह खतरे के निशान से सुरक्षित रूप से नीचे था. राहत का एक महत्वपूर्ण बिंदु हुगली के चंपाडांगा में था, जहां नदी का जलस्तर कुछ समय तक बढ़ने के बाद गिरना शुरू हो गया था. हालांकि, दामोदर प्रणाली से पोषित कुछ नदियां, जिनमें पश्चिम मेदिनीपुर जिले की कपालेश्वरी और रूपनारायण तथा पूर्व मेदिनीपुर और उत्तर 24 परगना की कालीघी और जमुना नदियां शामिल हैं, अपने खतरे के स्तर को पार कर गयी हैं. एक अधिकारी ने कहा, ‘हालांकि दामोदर के मुख्य स्टेशन अभी ””””खतरे”””” वाले क्षेत्र में नहीं हैं, लेकिन जमालपुर और रोंडिया में जलस्तर बढ़ने की प्रवृत्ति पर अत्यधिक सावधानी से नजर रखी जा रही है. ऊपरी बेसिन से जल प्रवाह में और वृद्धि होने पर जलजमाव वाले निचले जिलों में पहले से ही गंभीर स्थिति और भी बदतर हो सकती है.’

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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BIJAY KUMAR

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By BIJAY KUMAR

BIJAY KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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