एकेडमिक मार्क्स गलत लिखने से पैनल में नाम नहीं

स्कूल सर्विस कमीशन (एसएससी) के पोर्टल पर उम्मीदवार का नाम, उम्र और दूसरी जानकारी गलत लिखी है, तो उसे ठीक करने का मौका मिलता है. लेकिन अगर एजुकेशनल क्वालिफिकेशन की जानकारी गलत लिखी है, तो उम्मीदवार उसे ठीक नहीं कर सकता है.
संवाददाता, कोलकाता
स्कूल सर्विस कमीशन (एसएससी) के पोर्टल पर उम्मीदवार का नाम, उम्र और दूसरी जानकारी गलत लिखी है, तो उसे ठीक करने का मौका मिलता है. लेकिन अगर एजुकेशनल क्वालिफिकेशन की जानकारी गलत लिखी है, तो उम्मीदवार उसे ठीक नहीं कर सकता है. इस वजह से एक उम्मीदवार ने स्कूल सर्विस कमीशन की परीक्षा पास ली, लेकिन लेकिन सिर्फ एक नंबर के अंतर की वजह से उसका नाम पैनल में शामिल नहीं किया गया. इसके बाद उसने कलकत्ता हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. गुरुवार को इस मामले में न्यायाधीश अमृता सिन्हा ने एसएससी से रिपोर्ट तलब की.
उन्होंने जानना चाहा कि उम्मीदवार को नंबर लिखते समय हुई गलती को ठीक करने का मौका क्यों नहीं दिया गया? एसएससी को 20 फरवरी तक रिपोर्ट देने को कहा गया है. इस केस की अगली सुनवाई 25 फरवरी को होगी.
वादी ने स्कूल सर्विस कमीशन की दूसरी परीक्षा 2025 में बैठने के लिए पोर्टल पर जानकारी अपलोड करते समय मिले नंबर की जगह गलत नंबर लिख दिया. उसे पोस्टग्रेजुएट एकेडमिक मार्क्स में कुल 600 नंबर यानी 60 परसेंट नंबर मिले थे. लेकिन ऑनलाइन आवेदन करते समय उसने गलती से पोर्टल पर अपने मिले नंबर को 594 लिख दिया. इस वजह से शुरू से ही प्रक्रिया में गलती का शिकार हुआ. इस वजह से वह पैनल में शामिल होने के मौके से वंचित रह गया. इस बीच, एसएससी ने कहा कि इंटरव्यू के लिए फाइनल लिस्ट तैयार हो गयी है. अब किसी भी उम्मीदवार को गलती सुधारने का मौका नहीं दिया जायेगा. आवेदक ने आरोप लगाया कि नाम, उम्र, जाति, क्लास अलग-अलग कैटेगरी में गलती सुधारने का मौका तो था, लेकिन उसे एकेडमिक मार्क्स में संशोधन करने का ऑप्शन नहीं मिला. गलत मार्क्स लिखने के कारण एकेडमिक स्कोर में 10 की जगह आठ नंबर आ गया. इस वजह से उसे इंटरव्यू के लिए नहीं बुलाया गया, क्योंकि वह कट-ऑफ मार्क्स से एक नंबर कम था.
सूत्रों के मुताबिक इस गलती के बाद आवेदक ने तुरंत एसएससी से संपर्क किया. उन्हें अपनी गलती के बारे में बताया. तब एसएससी ने कहा कि एडिट करने का ऑप्शन न होने की वजह से कुछ नहीं किया जा सकता. अधिकारियों ने परीक्षार्थी को ड्रॉप बॉक्स में अपनी शिकायत डालने की सलाह दी. उन्हें भरोसा दिलाया गया कि बाद में गलती सुधार दी जायेगी. लेकिन रिजल्ट जारी होने के बाद परीक्षार्थी ने देखा कि गलती ठीक नहीं हुई थी. इस मामले में जस्टिस अमृता सिन्हा ने एसएससी से पूछा : यह कैसे हुआ? केस लड़ने वाले के वकील फिरदौस शमीम और गोपा विश्वास ने कहा कि परीक्षार्थी अक्सर ऑनलाइन आवेदन करने के लिए साइबर कैफे जाते हैं. कई लोग एक के बाद एक वहां फॉर्म जमा करते हैं. यह गलती वहीं हुई. लेकिन मार्क्स एडिट करने का कोई ऑप्शन नहीं था, इसलिए मार्क्स ठीक नहीं हो पाया. स्कूल सर्विस कमीशन ने कहा था कि इसे ठीक कर दिया जायेगा. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. कट-ऑफ मार्क्स 52 था. हालांकि परीक्षार्थी के मार्क्स ठीक नहीं किये गये थे, इसलिए उसे 51 मिला. नतीजतन उसे लिस्ट में जगह नहीं मिली. वहीं, एसएससी ने साफ कर दिया है कि इंटरव्यू लिस्ट और फाइनल पैनल लिस्ट तैयार हो चुकी है. अब कुछ भी करना मुमकिन नहीं है.
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