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सुप्रीम कोर्ट पर ‘दबाव’ बनाने दिल्ली गयीं थीं ममता बनर्जी! भाजपा नेता ने टीएमसी सुप्रीमो पर बोला बड़ा हमला

Updated at : 05 Feb 2026 6:28 PM (IST)
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Samik Bhattacharya BJP President West Bengal

पश्चिम बंगाल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य.

वेस्ट बंगाल की चीफ मिनिस्टर ममता बनर्जी पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने बड़ा हमला बोला है. उन्होंने कहा है कि टीएमसी सुप्रीमो बंगाल की जनता को मूर्ख बना रहीं हैं. वह सुप्रीम कोर्ट पर दबाव बनाने के लिए वहां गयीं थीं.

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खास बातें

पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चल रहे विवाद के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सुप्रीम कोर्ट जाने पर अब बंगाल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने कड़ा हमला बोला है. वकील के रूप में कोर्ट के कामकाज को समझने वाले शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट न्याय के लिए नहीं, अदालत पर दबाव बनाने और बंगाल की जनता को मूर्ख बनाने गयीं थीं.

सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी ने की राजनीतिक ड्रामे की कोशिश – शमिक भट्टाचार्य

शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट कोई राजनीतिक मंच नहीं है, जहां जाकर बयानबाजी की जाये या सहानुभूति बटोरी जाये. उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने अदालत की गरिमा को नजरअंदाज करते हुए वहां भी राजनीतिक ड्रामा करने की कोशिश की.

सुप्रीम कोर्ट में बहस करने का अधिकार वकील का, पिटीशनर का नहीं – शमिक

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में बहस करने का अधिकार वकील का होता है, न कि याचिकाकर्ता का. इसके बावजूद ममता बनर्जी ने बार-बार कार्यवाही में दखल देने की कोशिश की. शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि यह स्पष्ट रूप से दिखाता है कि मुख्यमंत्री का उद्देश्य कानूनी बहस नहीं, कैमरे और सुर्खियों के जरिये एक राजनीतिक संदेश देना था.

ममता ने बताने की कोशिश की कि वह चुनाव आयोग और संवैधानिक व्यवस्था से अकेले लड़ रहीं हैं – शमिक

शमिक भट्टाचार्य के अनुसार, ममता बनर्जी यह दिखाने की कोशिश कर रही थीं कि वह अकेली चुनाव आयोग और पूरी संवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ लड़ाई लड़ रही हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि सुप्रीम कोर्ट में उनकी तरफ से बहस उनके वकील ने ही की. अदालत ने भी स्पष्ट कर दिया कि बहस के लिए वकील सक्षम हैं.

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कोर्ट में जाकर सीएम का खुद बहस करना, अदालत पर दबाव बनाने का प्रयास – बीजेपी लीडर

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में जाकर खुद बहस करने की कोशिश करना, न केवल प्रक्रिया के खिलाफ है, बल्कि यह अदालत पर मनोवैज्ञानिक दबाव यानी साइक्लोजिकल प्रेशर बनाने का प्रयास भी है. शमिक भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि यह पूरी कवायद बंगाल चुनाव के माहौल में जनता को यह दिखाने के लिए की गयी कि मुख्यमंत्री किसी ‘अन्याय’ के खिलाफ लड़ रही हैं.

बंगाल की जनता को इमोशनली प्रभावित करने के लिए सेट किया गया नैरेटिव – भाजपा

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि SIR को लेकर जो भ्रम फैलाया जा रहा है, उसी का विस्तार सुप्रीम कोर्ट तक किया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि अदालत में जाने को ‘ऐतिहासिक’ और ‘पहली बार किसी राजनीतिक नेता के जाने’ जैसा नैरेटिव गढ़ा गया, ताकि बंगाल की जनता को इमोशनली प्रभावित किया जा सके.

कानूनी लड़ाई नहीं, चुनाव से पहले बनाया गया एक तमाशा – शमिक भट्टाचार्य

शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि बंगाल की जनता सब देख रही है. वह समझ रही है कि सुप्रीम कोर्ट जाने का असली मकसद क्या था. शमिक ने कहा कि यह कानूनी लड़ाई नहीं, चुनाव से पहले बनाया गया एक राजनीतिक तमाशा था, जिसका उद्देश्य संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाना और जनता को गुमराह करना था.

नंदीग्राम में ममता बनर्जी पर बरसे शुभेंदु अधिकारी

दिल्ली में शमिक भट्टाचार्य ने ममता बनर्जी पर निशाना साधा, तो बंगाल के नंदीग्राम में शुभेंदु अधिकारी ने भी बंगाल सरकार और रूलिंग पार्टी तृणमूल कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाये. शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि SIR प्रक्रिया के दौरान निष्पक्ष तरीके से 58 लाख नाम मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाये जा चुके हैं. चुनाव आयोग ने साफ कहा था कि अगर किसी का नाम गलत तरीके से हटाया गया है, तो वह फॉर्म-6 भरकर दोबारा अपना नाम वोटर लिस्ट में शामिल करवा सकता है.

100 लोगों ने भी बंगाल में नहीं भरा फॉर्म-6 – शुभेंदु

शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि बंगाल में 100 लोगों ने भी अपना नाम वोटर लिस्ट में शामिल कराने के लिए फॉर्म-6 नहीं भरे. दूसरी ओर लाखों फॉर्म-7 जमा हुए, जिनमें फर्जी या मृत मतदाताओं की शिकायत की गयी है. उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की दोहरी मंशा है – एक तरफ SIR प्रक्रिया को बाधित करना और दूसरी तरफ मृत, फर्जी और अवैध बांग्लादेशी मुसलमानों के नामों वाली मतदाता सूची बनाये रखना.

225 ईआरओ ने चुनाव आयोग के निर्देशों का पालन नहीं किया – शुभेंदु का आरोप

शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि बंगाल के 294 विधानसभा क्षेत्रों में से 225 ERO के चयन में चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया. इसके बावजूद राज्य सरकार ने योग्य IAS या WBCS के A ग्रेड के अधिकारियों को अप्वाइंट नहीं किया. इसलिए मजबूरन चुनाव आयोग को दिल्ली से माइक्रो ऑब्जर्वर भेजने पड़े.

बिहार की तरह बंगाल सरकार ने डेटा इंट्री ऑपरेटर नहीं दिये – लीडर ऑफ ऑपोजीशन

भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने यह भी आरोप लगाया कि बिहार सरकार की तरह पश्चिम बंगाल सरकार ने डेटा इंट्री ऑपरेटर उपलब्ध नहीं कराये, जिससे आम लोगों को परेशानी हुई. शुभेंदु अधिकारी ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का 3 दिन का दिल्ली अभियान पूरी तरह से विफल रहा. इन 3 दिनों में ममता बनर्जी ने SIR को रोकने की कोशिश की, माइक्रो ऑब्जर्वर की तैनाती का विरोध किया और आधार कार्ड का मुद्दा उठाया.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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