एसआईआर से घबरायी टीएमसी, ममता बनर्जी का विरोध राजनीतिक ड्रामा, बोले शमिक भट्टाचार्य

पश्चिम बंगाल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य. फोटो : पीटीआई
बंगाल में एसआईआर का विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा है. चुनाव आयोग की ओर से वोटर लिस्ट के शुद्धिकरण के लिए शुरू की गयी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रोसेस पर ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस लगातार सवाल खड़े कर रही है. दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) कह रही है कि ममता बनर्जी बंगाल चुनाव 2026 में हार के डर से घबरा गयी हैं. इसलिए एसआईआर का विरोध कर रहीं हैं.
पश्चिम बंगाल प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एसआईआर का विरोध कर रहीं प्रदेश की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधा है. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने ममता बनर्जी की ओर से एसआईआर के विरोध को राजनीतिक ड्रामा करार दिया है. साथ ही कहा है कि एसआईआर से तृणमूल कांग्रेस घबरा गयी है. राज्यसभा सांसद शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि ममता बनर्जी मंगल ग्रह पर चली जायें या अंटार्कटिका, एसआईआर होकर रहेगा.
बंगाल में एसआईआर नहीं, तो वोट नहीं – शमिक भट्टाचार्य
शमिक भट्टाचार्य ने बुधवार को कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता ममता बनर्जी के राजनीतिक चरित्र और उनकी ड्रामेबाजी को जानती है. वही सच्चाई अब दिल्ली भी देख रही है. उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी कभी जाड़े के मौसम में सुंदर नजारे दिखाने की बात करतीं हैं, तो कभी दिल्ली, कभी देश-विदेश की यात्राएं करतीं हैं. यह सब केवल जनता का ध्यान भटकाने की कोशिशें हैं. उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता का स्पष्ट संदेश है- एसआईआर नहीं, तो वोट नहीं (No SIR, No Vote).
जनता ने तय कर लिया है, टीएमसी को हराना है – भाजपा
उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता ने तय कर लिया है कि इस बार तृणमूल कांग्रेस को हराना है. उन्होंने कहा कि टीएमसी और ममता बनर्जी एसआईआर की प्रक्रिया को रोकने की जितनी भी कोशिश कर ले, सेंट्रल इन्वेस्टिगेशन एजेंसियों के काम में हस्तक्षेप कर लें, लेकिन उनकी हार निश्चित है. शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि देश के 12 राज्यों में एसआईआर की प्रक्रिया चल रही है. कहीं विरोध नहीं है. अराजकता नहीं है. सिर्फ पश्चिम बंगाल में इतना हंगामा क्यों? कारण साफ है – सच्चाई सामने आने का डर है.
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2005 में मतदाता सूची शुद्धिकरण की ममता ने की थी मांग
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने याद दिलाया कि 4 अगस्त 2005 को ममता बनर्जी ने खुद मतदाता सूची के शुद्धिकरण की मांग की थी. तब टीएमसी सुप्रीमो ने कहा था कि वोटर लिस्ट बांग्लादेशी घुसपैठियों से भरी हुई है. आज वही ममता बनर्जी एसआईआर का विरोध करने दिल्ली पहुंच गयीं. यह घोर राजनीतिक पाखंड और दोहरे मापदंड का उदाहरण है.
बीएल को धमकाया जा रहा – शमिक भट्टाचार्य
राज्यसभा सांसद ने कहा कि पश्चिम बंगाल की 2200 किलोमीटर लंबी सीमा बांग्लादेश से लगती है. ये सीमाएं खुलीं हैं. इसलिए बांग्लादेशी आसानी से भारत में आ जाते हैं. उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस का एजेंडा बिल्कुल साफ है – मतदाता सूची से बांग्लादेशी और रोहिंग्या के नाम नहीं कटने चाहिए. इसलिए बूथ लेवल ऑफिसर्स (बीएलओ) को धमकाया जा रहा है. चुनाव आयोग पर खुलेआम हमले किये जा रहे हैं.
जान गयीं हैं ममता, बंगाल चुनाव 2026 में हार तय – शमिक
भाजपा नेता ने कहा कि यह साबित करता है कि ममता बनर्जी जान गयीं हैं कि बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में उनकी हार सुनिश्चित है. उन्होंने कहा कि डिटेन, डिलीट और डिपोर्ट ही लोकतंत्र की प्यूरिटी और राष्ट्रहित का मार्ग है. पश्चिम बंगाल की जनता जागरूक है. तृणमूल कांग्रेस की राजनीतिक नौटंकी को नकार चुकी है.
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By Mithilesh Jha
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