SIR in Bengal : पति की मृत्यु के 48 घंटे बाद ही कतार में दिखी विधवा, कभी दस्तावेज तो कभी आसमान रही निहारती

Author Ashish Jha
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पापिया साहा रॉय

SIR in Bengal : तृणमूल पार्षद सुखसागर मिश्रा का कहना है कि विधवा को इस तरह तय तारीख पर सुनवाई केंद्र में बुलाने की जरुरत नहीं थी. आयोग पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा- हमने कभी इसकी कल्पना भी नहीं की थी. यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. जिनके पति का दो दिन पहले निधन हो गया, उन्हें भी सुनवाई की कतार में खड़ा होना पड़ रहा है.

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SIR in Bengal : सेरामपुर: बंगाल में चल रहे SIR के तहत सुनवाई केंद्र में कई ऐसे लोग आ रहे हैं, जिनकी पीड़ा असहनीय है. पति की मृत्यु के महज 48 घंटे हुए थे, वह अभी तक अपने गम से उबर नहीं पाई हैं. उसे तय तारीख पर एसआईआर सुनवाई केंद्र की कतार में खड़ा होना पड़ा. यह घटना हुगली के सेरामपुर की है. सफेद साड़ी में उदास मन से अपनी नागरिकता साबित करने दस्तावेज के साथ पहुंची विधवा को देख कर वहां मौजूद सभी उदास हो गये. तृणमूल ने चुनाव आयोग के खिलाफ आवाज उठाई है. पार्टी का कहना है कि विधवा को इस तरह तय तारीख पर सुनवाई केंद्र में बुलाने की जरुरत नहीं थी. तृणमूल पार्षद सुखसागर मिश्रा ने इस मुद्दे पर आयोग पर निशाना साधते हुए कहा- हमने कभी इसकी कल्पना भी नहीं की थी. यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. जिनके पति का दो दिन पहले निधन हो गया, उन्हें भी सुनवाई की कतार में खड़ा होना पड़ रहा है.

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कभी दस्तावेज तो कभी आसमान देखती रही

अंबेडकर सरानी स्थित ऋषरा केसी सेन रोड की निवासी पापिया साहा रॉय सेरामपुर विधानसभा के बूथ नंबर 270 की मतदाता हैं. उनके पति मानव रॉय का पिछले रविवार की रात दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. पापिया को मंगलवार को एसआईआर की सुनवाई लगी कतार में देखा गया. सुनवाई केंद्र में हाल ही में विधवा हुई पापिया गुमसुम होकर कभी-कभी आकाश की ओर टकटकी लगाए देखती रही. कभी-कभी वह बैठकर दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर रही थीं. स्थानीय तृणमूल नेतृत्व ने उनकी सुनवाई में तेजी लाने के लिए व्यवस्था की. पति के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा-मेरे पति को सांस लेने में तकलीफ थी. सांस फूलने के कारण रविवार को दिल का दौरा पड़ने से उनकी मृत्यु हो गई. फिर भी, मुझे आना ही पड़ा. मेरे साथ मेरे भाई को आना था, लेकिन भाई की भी सुनवाई चल रही है. भाई ने कहा-बहन, मैं कहाँ जाऊँ? तुम जाओ. मैं किसी से कहूँगा कि तुम्हें जल्दी रिहा करवा दे. इसीलिए तो मैं आयी हूं.

मुझे परेशान किया जा रहा है

पापिया साहा रॉय ने पत्रकारों से बात करते हुउ बताया कि उन्हें सुनवाई का नोटिस कुछ दिन पहले मिला था. हालांकि, अपने पति की मृत्यु के 48 घंटों के भीतर सुनवाई केंद्र में आने के अपने अनुरोध के संबंध में उन्होंने कहा- मैं क्या करूं? मुझे परेशान किया जा रहा है. अगर मैं आज नहीं आई, तो वे मुझे कोई और तारीख नहीं देंगे. ऐसा नहीं है कि काम खत्म होने के बाद मैं वापस आ जाऊँगी. मुझे सुनवाई की तारीख कुछ दिन पहले ही बताई गई थी. उस समय मेरे पति ने कहा- मैं तुम्हारे साथ चलूंगा. इसके बाद पापिया साहा रॉय ने रोते हुए कहा लेकिन, अब वह मेरे साथ नहीं आ सकते हैं, तृणमूल पार्षद सुखसागर मिश्रा ने कहा- हमने इस मामले को देखा है और बीएलओ को सूचित कर उनकी सुनवाई में तेजी लाने की व्यवस्था की है. हालांकि, आयोग सुनवाई के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का पालन नहीं कर रहा है.

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