स्याही संकेत से तय होता था, किसे नौकरी मिलेगी

Updated at : 27 Oct 2025 1:17 AM (IST)
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स्याही संकेत से तय होता था, किसे नौकरी मिलेगी

सूत्रों के मुताबिक, सूची में काले रंग की स्याही से नाम लिखे जाने का अर्थ था कि उम्मीदवार पूरी तरह ‘अयोग्य’ है और किसी भी स्थिति में उसे नौकरी नहीं दी जायेगी.

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कोलकाता. राज्य के बहुचर्चित शिक्षक नियुक्ति घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) की ताजा जांच में चौंकाने वाली जानकारी सामने आयी है. जांच में खुलासा हुआ है कि पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी के कार्यालय में स्कूल सर्विस कमीशन (एसएससी) के अभ्यर्थियों की सूची में अलग-अलग रंग की स्याही से संकेत दिये जाते थे, जिनके आधार पर तय होता था किस उम्मीदवार को नौकरी मिलेगी और किसे नहीं. सूत्रों के मुताबिक, सूची में काले रंग की स्याही से नाम लिखे जाने का अर्थ था कि उम्मीदवार पूरी तरह ‘अयोग्य’ है और किसी भी स्थिति में उसे नौकरी नहीं दी जायेगी. दूसरी ओर हरे रंग की स्याही में नाम दर्ज होने का मतलब था कि वह ‘मंत्री व अधिकारियों की पसंद का उम्मीदवार’ है और उसे नियुक्ति में प्राथमिकता दी जायेगी. जांच एजेंसी का कहना है कि यह संकेत प्रणाली मंत्री के प्रभावशाली ‘सिफारिश चक्र’ के माध्यम से चलायी जाती थी. जांच में यह भी सामने आया है कि वर्ष 2014 से 2021 के बीच एसएससी के माध्यम से राज्य के सरकारी स्कूलों में शिक्षक और गैर-शिक्षरों पदों पर हुईं नियुक्तियों की पूरी प्रक्रिया इसी गुप्त संकेत पद्धति के जरिये प्रभावित की गयी. आरोप है कि इन सूचियों को पहले पूर्व मंत्री चटर्जी के नाकतला स्थित कार्यालय में जमा कराया जाता था और वहां से इन्हें आगे एसएससी अधिकारियों के पास भेजा जाता था. यह भी आरोप है कि तत्कालीन एसएससी के चेयरमैन सुबीरेश भट्टाचार्य, पूर्व सलाहकार शांतिप्रसाद सिंह और अशोक साहा इन संकेतों से पूरी तरह अवगत थे और मंत्री कार्यालय के निर्देशों का पालन करते थे. एजेंसी के सूत्रों का कहना है कि कई मौकों पर युवा नेताओं, विधायकों और प्रभावशाली लोगों की ओर से सीधे मंत्री कार्यालय जाकर सिफारिश किये जाने की बात भी सामने आयी है. जिन नामों को हरे रंग का संकेत मिलता था, उनकी फाइलें तेजी से आगे बढ़ती थीं. आरोप है कि मंत्री की मर्जी के खिलाफ किसी उम्मीदवार को भारी रकम देने के बाद भी नौकरी नहीं मिल पाती थी. कुछ मामलों में प्रभावशाली लोगों के दबाव में सूची से नाम हटाने की मांग भी उठती थी. साथ ही, सीबीआइ का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में लेन-देन और मोटी रकम के चलने के भी प्रमाण मिले हैं. कथित रूप से इस पैसों के लेन-देन की कड़ी की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कर रहा है. सीबीआइ का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर इस घोटाले की कई और परतें खुलेंगी. एजेंसी आने वाले दिनों में कई और अफसरों और राजनीतिक हस्तियों से पूछताछ कर सकती है.

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GANESH MAHTO

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