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कैंसर पीड़ित शिक्षिका को 90 दिनों में पेंशन दे सरकार

Updated at : 22 Sep 2024 1:10 AM (IST)
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कैंसर पीड़ित शिक्षिका को 90 दिनों में पेंशन दे सरकार

कोलकाता उत्तर 24 परगना जिले के प्राथमिक शिक्षा पर्षद ने कैंसर पीड़ित शिक्षिका आरती रानी विश्वास को स्पष्ट कर दिया था कि दस्तावेज संबंधी समस्याओं के कारण उन्हें पेंशन और सेवानिवृति लाभ नहीं मिलेगा.

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हाइकोर्ट की न्यायाधीश अमृता सिन्हा ने दिया आदेश

संवाददाता, कोलकाता

उत्तर 24 परगना जिले के प्राथमिक शिक्षा पर्षद ने कैंसर पीड़ित शिक्षिका आरती रानी विश्वास को स्पष्ट कर दिया था कि दस्तावेज संबंधी समस्याओं के कारण उन्हें पेंशन और सेवानिवृति लाभ नहीं मिलेगा.

पर्षद ने शिक्षिका को लिखित रूप से यह जानकारी दी है. शिक्षिका ने पर्षद द्वारा मिले पत्र को चुनौती देते हुए कलकत्ता हाइकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश अमृता सिन्हा ने पर्षद को 90 दिनों के अंदर शिक्षिका की पेंशन शुरू करने के साथ-साथ अन्य सेवानिवृत सुविधाएं प्रदान करने का आदेश दिया. इतना ही नहीं, उत्तर 24 परगना के जिला विद्यालय निरीक्षक (प्राथमिक) को कैंसर से पीड़ित पूर्व शिक्षिका के चिकित्सा खर्चों को पूरा करने के लिए प्रोविजनल पेंशन प्रक्रिया शुरू करने का भी निर्देश दिया गया है. यह आदेश कलकत्ता हाइकोर्ट की जस्टिस अमृता सिन्हा ने दिया.

क्या है मामला : गौरतलब है कि आरती रानी विश्वास बांग्लादेश में स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद भारत आयी थीं. 1984 में उन्हें भारतीय नागरिकता मिली और 1998 में, वह राजारहाट के एक स्कूल में प्राथमिक शिक्षक के रूप में शामिल हुईं. नवंबर 2023 में सेवानिवृत हुईं. वैसे तो उनकी सेवानिवृति के तुरंत बाद पेंशन शुरू होनी चाहिए थी. लेकिन ऐसा नहीं होने पर आरती रानी ने उत्तर 24 परगना जिला प्राथमिक शिक्षा पर्षद से संपर्क किया. पर्षद ने उन्हें सूचित किया कि दस्तावेज समस्याओं के कारण उन्हें पेंशन और सेवानिवृति का बकाया नहीं मिलेगा. शिक्षिका ने पर्षद के फैसले को चुनौती देते हुए कलकत्ता हाइकोर्ट में वकील सुदीप्त दासगुप्ता और शिंजिनी चक्रवर्ती के माध्यम से याचिका दायर की. उन्होंने सुनवाई के दौरान कोर्ट में कहा कि राज्य सरकार ने ढाई दशक की सेवा के दौरान आरती रानी की शैक्षणिक योग्यता पर कोई सवाल नहीं उठाया. हालांकि, सेवानिवृति के बाद पेंशन भुगतान करते समय दस्तावेजों के सत्यापन पर सवाल उठ रहे हैं.

सुनवाई के दौरान जिला प्राथमिक शिक्षा पर्षद के अधिवक्ता भास्कर प्रसाद वैश्य ने दावा किया कि याचिकाकर्ता बांग्लादेशी नागरिक है. शैक्षिक दस्तावेजों के सत्यापन के बिना भुगतान नहीं किया जा सकता. पर्षद के इस दावे का आरती रानी के वकीलों ने विरोध किया और कहा : कैंसर से पीड़ित सेवानिवृत शिक्षिका को इतने वर्षों की सेवा के बाद सेवानिवृत लाभ को कैसे रोका जा सकता है? दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद न्यायाधीश ने अपनी टिप्पणी में कहा कि जब वादी इतने वर्षों से काम कर रहा था, तो अधिकारी क्या कर रहे थे? दस्तावेजों को सत्यापित किये बिना नौकरी की पेशकश स्वीकार करना लगभग असंभव है. नौकरी खत्म होने के बाद डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन का कोई मतलब नहीं रह जाता है. आरती रानी के मामले में अधिकारियों का आचरण अवैध और न्याय के विपरीत है. इसके बाद उन्होंने आरती रानी का बकाया 90 दिनों के अंदर चुकाने का आदेश दिया. कोर्ट ने कहा : साथ ही प्रोविजनल पेंशन जल्द शुरू की जाये, ताकि पूर्व शिक्षिका अपने इलाज का खर्च उठा सकें.

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