केंद्रीय पर्यवेक्षकों के कामकाज की निगरानी के लिए विशेष टीम गठित

Updated at : 18 Mar 2026 9:36 PM (IST)
विज्ञापन
केंद्रीय पर्यवेक्षकों के कामकाज की निगरानी के लिए विशेष टीम गठित

राज्य विधानसभा चुनाव में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भारत निर्वाचन आयोग ने सामान्य, पुलिस और व्यय पर्यवेक्षकों के दैनिक कामकाज की निगरानी के लिए नयी व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है. राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल के नेतृत्व और सीधे नियंत्रण में एक विशेष निगरानी प्रकोष्ठ बनाया जायेगा.

विज्ञापन

कोलकाता.

राज्य विधानसभा चुनाव में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भारत निर्वाचन आयोग ने सामान्य, पुलिस और व्यय पर्यवेक्षकों के दैनिक कामकाज की निगरानी के लिए नयी व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है. राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल के नेतृत्व और सीधे नियंत्रण में एक विशेष निगरानी प्रकोष्ठ बनाया जायेगा.

सीइओ कार्यालय के एक सूत्र के अनुसार, यह प्रकोष्ठ आयोग की ओर से नियुक्त पर्यवेक्षकों के कामकाज पर नजर रखेगा और अपनी टिप्पणियों के आधार पर रोजाना रिपोर्ट नयी दिल्ली स्थित निर्वाचन आयोग मुख्यालय को भेजेगा.

सूत्रों के मुताबिक, आयोग ने राज्य के लिए पहले ही 294 सामान्य पर्यवेक्षक नियुक्त कर दिये हैं. यह चुनाव वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एक अनोखी व्यवस्था है, जहां हर विधानसभा क्षेत्र के लिए एक सामान्य पर्यवेक्षक तैनात किया गया है. इसके अलावा, पश्चिम बंगाल में 84 पुलिस पर्यवेक्षक भी होंगे, जो सभी राज्यों में सबसे अधिक हैं, जबकि 100 व्यय पर्यवेक्षक भी तैनात किये जायेंगे, जो दूसरे सबसे बड़े आंकड़े के रूप में सामने आये हैं.

इसी बीच, आयोग ने राज्य के लोक निर्माण विभाग की सचिव अंतरा आचार्य और खाद्य प्रसंस्करण सचिव परवेज अहमद सिद्दिकी को केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया है. इससे पहले, गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा को तमिलनाडु के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक बनाया गया था. हालांकि, अंतरा आचार्य और परवेज अहमद सिद्दिकी ने आयोग से अनुरोध किया है कि उन्हें अन्य राज्यों में पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त करने के फैसले पर पुनर्विचार किया जाये.

क्या है नयी प्रणाली का उद्देश्य

सूत्रों ने बताया कि इस नयी प्रणाली का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को त्रुटिरहित और पारदर्शी बनाना है. पर्यवेक्षकों के रोजमर्रा के कामकाज को निगरानी के दायरे में लाकर आयोग पारदर्शिता का स्पष्ट संदेश देना चाहता है. यह पहल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की उस प्रतिबद्धता के अनुरूप है, जिसमें उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों को स्वतंत्र, निष्पक्ष और हिंसा-मुक्त कराने की बात कही थी.सीईओ कार्यालय के सूत्र ने कहा कि आयोग इस कदम के जरिये उन आरोपों का भी जवाब देना चाहता है, जिनमें कहा गया था कि उसकी निगरानी केवल राज्य सरकार के अधिकारियों और पुलिस तक ही सीमित है.

विज्ञापन
BIJAY KUMAR

लेखक के बारे में

By BIJAY KUMAR

BIJAY KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola