बंगाल के आर्थिक विकास को रफ्तार देंगे एक्सप्रेसवे

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 29 Dec 2024 12:37 AM

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केंद्र सरकार द्वारा यहां पांच ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का किया जा रहा निर्माण

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कोलकाता . पश्चिम बंगाल से बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश के बीच परिवहन व्यवस्था को और सुदृढ़ करने के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय द्वारा यहां पांच ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण किया जा रहा है. इनके बन जाने से बंगाल के साथ-साथ बिहार, झारखंड, ओडिशा, उत्तर प्रदेश व संपूर्ण पूर्वोत्तर राज्यों में आर्थिक विकास की गति और भी तेज हो जायेगी.

खड़गपुर-मोरग्राम राष्ट्रीय हाई-स्पीड कॉरिडोर से ये होंगे लाभान्वित: खड़गपुर से बर्दवान होते हुए मोरग्राम के बीच 231 किलोमीटर लंबे 4-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर को हाइब्रिड एन्युटी मोड (एचएएम) में ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण किया जायेगा. इस पर 10,247 करोड़ की लागत आयेगी. नया कॉरिडोर मौजूदा 2-लेन राष्ट्रीय राजमार्ग का पूरक होगा. इससे खड़गपुर और मोरग्राम के बीच यातायात क्षमता में लगभग पांच गुना की बढ़ोतरी होगी. यह एक छोर पर पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश आदि राज्यों और दूसरे छोर पर देश के उत्तर-पूर्वी हिस्से के बीच यातायात के लिए कुशल कनेक्टिविटी प्रदान करेगा. इस कॉरिडोर के बनने से खड़गपुर और मोरग्राम के बीच मालवाहक वाहनों के लिए यात्रा का समय मौजूदा नौ-10 घंटे से घटकर पांच से छह घंटे रह जायेगा. इससे लॉजिस्टिक्स लागत में भी कमी आयेगी.

गंगासागर तीर्थयात्रियों के लिए वरदान साबित होगा जोका-नामखाना एक्सप्रेसवे

ऐसा कहा जाता है कि सब तीर्थ बार-बार, गंगासागर एक बार. इसकी वजह यह है कि सागरद्वीप एक छोटा-सा द्वीप है, जो चारों ओर से पानी से घिरा है. सागरद्वीप तक जाने के लिए जलमार्ग की एकमात्र जरिया है. इसलिए केंद्र सरकार की मदद से जोका से नामखाना के बीच 3066 करोड़ की लागत से करीब 99 किमी लंबा एक्सप्रेसवे तैयार किया जा रहा है. इसके बन जाने से लोग सड़क मार्ग से नामखाना तक आसानी से पहुंंच पायेंगे. इस बीच, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी मूड़ी नदी पर सेतु बनाने की घोषणा की है. एक्सप्रेसवे व सेतु बन जाने के बाद तीर्थयात्री सड़क मार्ग से सीधे गंगासागर तट तक पहुंंच पायेंगे. इससे दक्षिण 24 परगना जिले के तटवर्ती क्षेत्र में स्थित सागरद्वीप के लोगों का आर्थिक विकास होगा और वहां पर्यटन को बढ़ावा भी मिलेगा.

हल्दिया से नेपाल की सीमा को जोड़ेगा रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेसवे

पश्चिम बंगाल के औद्योगिक शहर हल्दिया को नेपाल की सीमा से जोड़ने के लिए रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेसवे का निर्माण किया जा रहा है. यह नेपाल सीमा पर स्थित बिहार के रक्सौल से पश्चिम बंगाल के हल्दिया तक करीब 650 किलोमीटर लंबा होगा. यह राज्य का दूसरा सबसे लंबा एक्सप्रेसवे होगा. इसमें छह से आठ लेन होंगे. इसके बन जाने से बंगाल और बिहार के लोगों को बेहद आसानी होगी. रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेसवे बिहार के नौ जिलों से होकर गुजरेगा. इनमें पश्चिम चंपारण, बिहार शरीफ, पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर, सारण, पटना, जमुई, शेखपुरा और बांका शामिल हैं. इस योजना पर लगभग 40,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे. इस एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य पूरा होने का बंगाल, झारखंड और बिहार के लाखों लोग बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. यह रक्सौल को हल्दिया बंदरगाह से जोड़ेगा. माना जा रहा है कि रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेसवे से एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक विकास भी होगा. रोजगार के अवसर सृजित होंगे, जिससे लाखों लोगों लाभान्वित होंगे. गौरतलब रहे कि हल्दिया बंदरगाह वर्तमान में नेपाल के अधिकांश व्यापार को संभालता है. लेकिन उक्त बंदरगाह से भारत-नेपाल सीमा तक कोई विकसित राजमार्ग नहीं है. इस कमी को दूर करने के लिए ही हल्दिया-रक्सौल एक्सप्रेसवे का निर्माण किया जा रहा है.

भारत-नेपाल के बीच यातायात को सुगम बनायेगा गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे

गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे, यह भारत-नेपाल के लगभग समानांतर अंतराल, और तीन राज्यों-उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल से होकर गुजरेगा.यह एक्सप्रेसवे भारतमाला प्रोजेक्ट का एक हिस्सा है. यह यात्रा की दूरी को 640 किमी से घटा कर 519 किमी कर देगा. इससे यात्रा का समय करीब छह घंटे कम हो जायेगा. चार लेन वाले इस एक्सप्रेसवे के निर्माण पर करीब 32,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे. गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे एक ब्लॉक लिंक-नियंत्रित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे है, जो उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर से पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी शहर को जोड़ेगा. गौरतलब रहे कि दोनों शहरों के बीच सड़क मार्ग की दूरी तय करने में अभी 15 घंटे लगते हैं. पर एक्सप्रेसवे बन जाने के बाद मात्र नौ घंटे लगेंगे. यह एक्सप्रेसवे गोरखपुर के जगदीशपुर से शुरू होगा और कुशीनगर के तमुखीराज तहसील से बिहार में गोपालगंज में प्रवेश करेगा. यह बिहार के आठ जिलों शिवहर, मधुबनी, सीतामढ़ी, पश्चिम चंपारण, सुपौल, अररिया, पूर्वी चंपारण एवं किशनगंज से होते हुए सिलीगुड़ी पहुंचेगा. इस एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए गंडक नदी पर दो बड़े पुल भी बनाये जायेंगे, जिसका कुछ हिस्सा यूपी और कुछ बिहार में होगा. ये पुल करीब 10 किलोमीटर लंबे होंगे.

महज छह घंटे में पहुंच जायेंगे हावड़ा से बनारस

हावड़ा को वाराणसी से जोड़ने के लिए 620 किमी लंबा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे तैयार किया जा रहा है. छह लेन वाली सड़क एक्सेस कंट्रोल तकनीक आधारित बनायी जायेगी, जिस पर करीब 28,500 करोड़ की लागत आयेगी. एक्सप्रेसवे बनने के बाद बनारस से कोलकाता का सफर 15 घंटे के बजाय मात्र छह घंटे में ही पूरा हो जायेगा. इस परियोजना के तहत यूपी में 22 किमी, बिहार में 162 किमी, झारखंड में 200 किमी और बंगाल में 234 किमी राजमार्ग का निर्माण होना है. यह सड़क बनारस के चंदौली से शुरू होकर बिहार के कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद व गया होते हुए झारखंड के चतरा, हजारीबाग, रामगढ़, बोकारो से पश्चिम बंगाल के पुरुलिया, बांकुड़ा, पश्चिम मेदिनीपुर, हुगली और हावड़ा को जोड़ते हुए कोलकाता तक पहुंचेगी. यह सड़क बनने के बाद केवल छह घंटे में ही कोलकाता से बनारस पहुंचा जा सकेगा.

सिलीगुड़ी में और तीन हाईवे को केंद्र सरकार ने दी मंजूरी

केंद्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय ने सिलीगुड़ी में तीन नये हाइवे बनाने की मंजूरी दी है. इसके लिए 1206 करोड़ रुपये खर्च किये जायेंगे. मंत्रालय की ओर से बताया गया कि एनएच-31 (उदलाबाड़ी) के 615.5 किलोमीटर पर लेवल क्रॉसिंग की जगह 2-लेन रेलवे ओवरब्रिज और एनएच- 31 (मैनागुड़ी) के 661.100 किलोमीटर पर लेवल क्रॉसिंग की जगह रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण किया जायेगा. यह अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी को काफी बढ़ावा देगा. सिलीगुड़ी में ट्रैफिक कम करने के लिए एक प्रमुख पहल के तहत दोनों तरफ सर्विस रोड के साथ एनएच- 31 (नया एनएच- 10) के 569.258 किलोमीटर से 581.030 किलोमीटर (शिव मंदिर से सिवोक सेना छावनी के पास एनएच- 31 पर एएच- 02 परियोजना की समाप्ति) तक को 4/6-लेन करने की शुरुआत की गयी है. यह उत्तर-पूर्वी भारत और पड़ोसी देशों जैसे- नेपाल, भूटान और बांग्लादेश से कनेक्टिविटी को बेहतर करेगा.

नदी के नीचे से गुजरेंगे ट्रक

देशभर में कोलकाता एकमात्र ऐसा शहर है, जहां नदी के नीचे से मेट्रो ट्रेन गुजर रही है. अब महानगर में नदी के नीचे एक और सुरंग बनायी जायेगी, जहां से ट्रकों की आवाजाही होगी. केंद्रीय पत्तन पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय की अधीनस्थ एक स्वायत्त संस्था श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट (एसएमपी) कोलकाता ने यह सुरंग बनाने की योजना बनायी है, जिसे केंद्र सरकार की मंजूरी मिल चुकी है. बताया गया है कि कोलकाता पोर्ट से माल वाहक वाहनों की आवाजाही की गति तेज करने के लिए एसएमपी कोलकाता की ओर से यह टनल बनाया जायेगा. जानकारी के अनुसार, कोलकाता पोर्ट के नेताजी सुभाष डॉक के पास से हावड़ा की ओर से शालीमार, बी-गार्डेन तक छह लेन वाले डेढ़ किलोमीटर लंबे टनल का निर्माण किया जायेगा. इसमें लगभग 800 मीटर सड़क नदी के नीचे होगी. इस टनल के निर्माण पर कुल 2000 करोड़ की लागत आयेगी. इस टनल के माध्यम से कोलकाता पोर्ट से मालवाहक वाहन सीधे कोना एक्सप्रेस-वे पर पहुंंच जायेंगे. इससे खिदिरपुर एवं विद्यासागर सेतु पर ट्रैफिक जाम की समस्या का भी स्थायी समाधान हो जायेगा.

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