आदेश के बाद भी व्यापारी नहीं दे रहे स्टॉक की जानकारी

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बाजार में जूट की कीमतों में बढ़ती अस्थिरता और जमाखोरी को रोकने के उद्देश्य से जूट आयुक्त कार्यालय ने एक नया आदेश जारी किया है.

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2021 में ही जूट आयुक्त कार्यालय से जमाखोरी रोकने के लिए जारी हुआ था आदेश, पर अब तक नहीं हुई कोई कार्रवाई

संवाददाता, कोलकाता

बाजार में जूट की कीमतों में बढ़ती अस्थिरता और जमाखोरी को रोकने के उद्देश्य से जूट आयुक्त कार्यालय ने एक नया आदेश जारी किया है. इस आदेश के अनुसार, अब से सभी कच्चे जूट के व्यापारी, डीलर, स्टॉकिस्ट और ब्रोकरों को हर पखवाड़े में अपने स्टॉक और लेन-देन की रिपोर्ट जूट स्मार्ट पोर्टल पर देनी होगी. यह आदेश जूट एवं जूट वस्त्र नियंत्रण आदेश, 2016 की धारा 9(1)(ए) और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 7 के तहत कानूनी रूप से लागू किया गया है.

रिपोर्ट जमा करने की समयसीमा

आदेश के अनुसार, एक से 15 तारीख तक की रिपोर्ट हर महीने की 20 तारीख तक जमा करनी होगी, जबकि 16 से माह के अंत तक की रिपोर्ट अगले महीने की पांच तारीख तक जमा करनी होगी. बताया गया है कि यदि इस कार्यकाल के दौरान कोई लेन-देन नहीं हुआ है, तो भी एनआइएल रिपोर्ट अनिवार्य है.

उद्योग जगत को आदेश के लागू होने पर है संदेह

हालांकि, जूट आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी किया गया आदेश लागू होगा या नहीं, उद्योग जगत ने इस पर संदेह जताया है. उनका कहना है कि अब तक किसी भी व्यापारी या बेलर पर रिटर्न न देने के लिए कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं हुई है. 2021 में भी ऐसे आदेश जारी हुए थे, लेकिन न ही निगरानी हुई और न ही किसी पर कार्रवाई. जूट आयुक्त कार्यालय खुद इस बात को मानता है कि बहुत सारे पंजीकृत व्यापारी अब तक रिपोर्ट नहीं दे रहे हैं या फिर बिना स्टॉक सत्यापन के ‘निल’ रिपोर्ट दे देते हैं. अब इस नये आदेश में कहा गया है कि यदि रिपोर्ट तय समय में जमा नहीं की गयी, तो इसे जानबूझकर की गयी लापरवाही मानी जायेगी और दोषियों पर आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जायेगी. लेकिन तकनीकी समस्याओं का हवाला देते हुए कई व्यापारी जूट स्मार्ट पोर्टल में लॉगिन करने में असमर्थता की बात कर रहे हैं, जिससे हस्ताक्षरित फिजिकल रिटर्न की छूट दी गयी है.

अगले सप्ताह विशेषज्ञ समिति की बैठक

आगामी जूट विशेषज्ञ समिति (इसीजे) की बैठक जून के पहले सप्ताह में होने जा रही है, जहां 2025–26 के लिए जूट की मांग और आपूर्ति की समीक्षा की जायेगी. मिल मालिकों का कहना है कि सिर्फ आदेश जारी करना काफी नहीं है. जब तक नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई नहीं होती, बाजार में अफवाह और जमाखोरी का माहौल और बढ़ेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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