हुगली. आगामी 18 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सिंगूर के सिंहेर भेरी मैदान में जनसभा करने वाले हैं. इस सभा को लेकर सिंगूर में राजनीतिक हलचल तेज हो गयी है. प्रधानमंत्री के प्रस्तावित सभा स्थल के सामने “सिंगूर में उद्योग चाहिए” लिखा बैनर दिखाई देने से एक बार फिर उद्योग की मांग चर्चा में आ गयी है. प्रधानमंत्री की सभा के लिए तैयारियां तेजी से चल रही हैं. टाटा के पुराने मैदान में खर-पतवार साफ कर विशाल हैंगर बनाया गया है. साथ ही हेलीपैड का निर्माण कार्य भी अंतिम चरण में है. भाजपा नेतृत्व लगातार तैयारियों की निगरानी कर रहा है. पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस सभा के जरिये सिंगूर को लेकर विकास और उद्योग का संदेश देने की रणनीति है. सिंगूर का नाम आते ही टाटा नैनो परियोजना का विवाद याद आता है. वर्ष 2008 में टाटा मोटर्स ने सिंगूर छोड़कर गुजरात के सानंद में नैनो कार फैक्टरी स्थापित की थी. उस समय नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे. बाद में प्रधानमंत्री बनने के बाद वह कई बार पश्चिम बंगाल आए, लेकिन सिंगूर में कभी सभा नहीं की. अब पहली बार टाटा की उसी जमीन पर उनकी सभा होना राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. वर्ष 2016 में सिंगूर में बने टाटा नैनो कारखाने के शेड को बुलडोजर से गिरा दिया गया था. इसके बाद क्षेत्र में उद्योग की संभावनाएं लगभग खत्म हो गयी थीं. अब एक बार फिर उद्योग की मांग जोर पकड़ रही है. सिंगूर के कई किसानों का मानना है कि यदि प्रधानमंत्री यहां उद्योग को लेकर स्पष्ट संदेश देते हैं, तो उन्हें स्थानीय समर्थन मिल सकता है.
भाजपा भी इसी समर्थन को हासिल करने के लिए प्रचार में जुटी है. पार्टी नेताओं का कहना है कि “डबल इंजन की सरकार” बनने पर सिंगूर में फिर से उद्योग स्थापित होगा. प्रधानमंत्री की इस सभा से सिंगूर को क्या संदेश मिलता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं.
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