अस्थायी पेसमेकर लगाकर कराया सिजेरियन प्रसव

Published at :02 Mar 2025 12:45 AM (IST)
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अस्थायी पेसमेकर लगाकर कराया सिजेरियन प्रसव

सीएनएमसीएच : फर्स्ट डिग्री हार्ट ब्लॉकेज से पीड़ित महिला बनी मां

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सीएनएमसीएच : फर्स्ट डिग्री हार्ट ब्लॉकेज से पीड़ित महिला बनी मां कोलकाता. शहर के कलकत्ता नेशनल मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (सीएनएमसीएच) के चिकित्सकों ने लगभग असंभव काम को संभव कर दिखाया है. यहां हृदय संबंधित बीमारी से पीड़ित एक गर्भवती महिला का अस्थायी पेसमकर लगाकर सिजेरियन प्रसव कराया गया है. महिला को दिल का दौरा पड़ने का गंभीर खतरा था. अब मां और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं. सीएनएमसी के इतिहास में यह एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. प्रसूता फिलहाल आइसीयू में है. सीएनएमसीएच में ही महिला को अस्थायी पेसमेकर हटाकर स्थायी पेसमेकर लगाया जायेगा. क्या है मामला: जानकारी के अनुसार, प्रसूता का नाम मौमिता बर्मन (26) है. वह उत्तर बंगाल के बालुरघाट की रहने वाली हैं. एक साल पहले उनकी शादी हुई. शादी के कुछ दिनों बाद से उन्हें सांस लेने में दिक्कत और सीने में दर्द महसूस हो रहा था. वह एक स्थानीय चिकित्सक के पास पहुंचीं. जहां इसीजी जांच में महिला के हृदय से संबंधी बीमारियों का पता चला. वह गर्भवती भी हो गयी थीं. स्थानीय चिकित्सक ने शारीरिक जांच के बाद बताया कि मरीज के हृदय की इस स्थिति में सामान्य तरीके से बच्चे का जन्म संभव नहीं है. सिजेरियन प्रसव भी जोखिम भरा है. इस स्थिति में बच्चे को जन्म देना जानलेवा साबित हो सकता है. प्रसव के लिए महिला को अस्थायी पेसमेकर लगाना पड़ेगा. चिकित्सक की रिपोर्ट के बाद मौमिता का परिवार मरीज को लेकर किसी निजी अस्पताल में न जाकर मंगलवार को सीधे कोलकाता के पार्क सर्कस के पास स्थित कलकत्ता नेशनल मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के आउटडोर में पहुंचा. डॉक्टरों ने मरीज को भर्ती लेकर बुधवार को उनकी शारीरिक जांच की. जांच में चिकित्सकों ने पाया कि गर्भ में पहले से शिशु का फेफड़ा भी पूर्ण रूप से विकसित नहीं हुआ है. मां की हृदय की स्थिति भी ठीक नहीं थी. महिला की हृदय गति को सामान्य रखने के लिए तुरंत एक अस्थायी पेसमेकर लगाये जाने का निर्णय चिकित्सकों ने लिया. वहीं बच्चे के फेफड़े को शीघ्र विकसित करने के लिए मौमिता को एक इंजेक्शन लगाया गया . स्त्री रोग विभाग के डॉक्टरों ने बताया कि चार खुराक वाला यह इंजेक्शन हर 12 घंटे के अंतराल में महिला को लगाया गया. प्रसूता को किसी भी समय दिल का दौरा पड़ सकता था. ऐसे में उसे बचाने के लिए प्रसूता विभाग के चिकित्सकों ने अस्पताल के कार्डियोलॉजी विशेषज्ञों की मदद ली. मां और बच्चे को जीवित रखने के लिए मौमिता को अस्थायी पेसमेकर लगाया गया. जब डॉक्टरों को लगा कि अब बच्चे का जन्म हो सकता है तो ऑपरेशन थियेटर में व्यवस्था की गयी. शुक्रवार को मौमिता का सिजेरियन तरीके से प्रसव कराया गया. इससे पहले उसकी छाती पर एक अस्थायी पेसमेकर लगाया गया था. डॉक्टरों ने बताया कि सीजर के बाद मां और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं. प्रसव के बाद मौमिता को आइसीयू में रखा गया है. मेडिकल टीम के प्रमुख प्रो डॉ अर्घ्य मैत्रा ने बताया कि अगले एक से दो दिनों के बाद महिला को स्थायी पेसमेकर लगाया जायेगा. इसके लिए उसे कार्डियोलॉजी विभाग में रेफर किया जायेगा. महिला जिस बीमारी से पीड़ित थी उसे चिकित्सकों की भाषा में फर्स्ट डिग्री हार्ट ब्लॉक कहा जाता है. सीमित सरकारी संसाधनों के बीच सीएनएमसीएच के चिकित्सकों ने बड़ा काम कर दिखाया है. मेडिकल टीम का किया गया था गठन महिला की चिकित्सा के लिए अस्पताल अधीक्षक डॉ अर्घ्य मैत्रा के नेतृत्व में एक मेडिकल टीम का गठन किया गया. इस टीम में गायनोकोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो डॉ प्रणव विश्वास, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ सुशांत कुमार पाइन, डॉ पॉलमी राय और एनेस्थेटिस्ट डॉ मृण्मय बसाक शामिल थे.

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