निवेशकों का पैसा लौटाने के लिए बनी समिति के कामकाज से कोर्ट नाराज

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निवेशकों का पैसा लौटाने के लिए बनी समिति के कामकाज से कोर्ट नाराज

हाइकोर्ट के आदेश पर रोज़ वैली समिति ने मंगलवार को अपने कामकाज और वित्तीय खातों पर एक रिपोर्ट पेश की. कोर्ट ने सवाल किया कि 10 साल तक वित्तीय खातों का ऑडिट क्यों नहीं हुआ.

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रोज वैली. कोर्ट ने पूछा, 10 सालों तक कंपनी के वित्तीय खातों का ऑडिट क्यों नहीं?

समिति के कामकाज की जांच के लिए बनेगी नयी समिति

संवाददाता, कोलकातारोज वैली के जमाकर्ताओं का पैसा लौटाने के लिए गठित जस्टिस दिलीप सेठ की समिति के कामकाज पर कलकत्ता हाइकोर्ट पहले ही अपनी नाराजगी जता चुका है और अब कोर्ट ने संकेत दिया है कि वह समिति के कामकाज की जांच के लिए एक जांच समिति गठित करेगा. हाइकोर्ट के आदेश पर रोज़ वैली समिति ने मंगलवार को अपने कामकाज और वित्तीय खातों पर एक रिपोर्ट पेश की. कोर्ट ने सवाल किया कि 10 साल तक वित्तीय खातों का ऑडिट क्यों नहीं हुआ. इसके बाद कोर्ट के ध्यान में आया कि जस्टिस सेठ की समिति ने 2015 से कार्यालय चलाने पर केवल 10 लाख रुपये खर्च किये हैं. न्यायाधीश के इस सवाल के जवाब में कि अध्यक्ष का वेतन किसने दिया, वकील ने कहा कि चॉकलेट ग्रुप ने पैसा दिया. गौरतलब है कि हाइकोर्ट के आदेश के बावजूद डिवीजन बेंच ने पहले ही रोज़ वैली के होटलों को बेचे बिना और जमाकर्ताओं का पैसा चुकाये बिना समिति द्वारा चॉकलेट ग्रुप का इस्तेमाल करके अपना व्यवसाय चलाने पर सवाल उठाये थे. यह सुनकर जस्टिस राजर्षि भारद्वाज और जस्टिस अपूर्व सिन्हा रॉय की डिवीजन बेंच हैरान और नाराज़ हो गयी. अदालत ने सवाल किया कि हाइकोर्ट के किस आदेश पर समिति ने चॉकलेट ग्रुप नामक कंपनी को शामिल किया? समिति की गतिविधियों की जांच के लिए एक जांच समिति गठित की जानी चाहिए. अदालत ने कहा कि उससे पहले हम इस रिपोर्ट को ध्यान से पढ़ेंगे. न्यायाधीश का आगे का सवाल था कि हाइकोर्ट द्वारा नियुक्त न्यायाधीशों की एक समिति बिना ऑडिट की रिपोर्ट कैसे दे सकती है, इसका ऑडिट क्यों नहीं किया गया, यह समझ से परे है. अदालत अगले बुधवार को इस पर इडी का जवाब सुनेगी. साथ ही सीबीआइ को बुधवार तक उनके संबंधों से संबंधित सभी दस्तावेज उपलब्ध कराने का आदेश दिया गया है. न्यायाधीश भारद्वाज की खंडपीठ भी उसी दिन इस मामले की सुनवाई करेगी.

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Akhilesh Kumar Singh

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