बीएसएफ ने 2.4 करोड़ का सोना किया जब्त, दो अरेस्ट

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बीएसएफ ने 2.4 करोड़ का सोना किया जब्त, दो अरेस्ट

भारत-बांग्लादेश सीमा पर तैनात सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने एक बड़ी तस्करी की कोशिश को नाकाम करते हुए करीब 2.4 करोड़ रुपये मूल्य का सोना जब्त किया है.

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संवाददाता, कोलकाता.

भारत-बांग्लादेश सीमा पर तैनात सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने एक बड़ी तस्करी की कोशिश को नाकाम करते हुए करीब 2.4 करोड़ रुपये मूल्य का सोना जब्त किया है. इस मामले में दो युवकों को भी गिरफ्तार किया. घटना सोमवार को अपराह्न नॉर्थ बंगाल फ्रंटियर के किशनगंज सेक्टर के अंतर्गत आने वाले इलाके की है, जहां बीएसएफ की 184वीं बटालियन के जवानों ने गुप्त सूचना पर कार्रवाई करते हुए एक भारतीय तस्कर को सोना ले जाते समय दबोच लिया. बाद में उसके साथी को भी पकड़ा गया.

बीएसएफ के अनुसार, गत सोमवार को उत्तर दिनाजपुर के ग्वालपोखर इलाके का निवासी रतन बिसरा (23) आइबीबीएफ गेट के पास से लौट रहा था. वह पेड़ों की सूखी डालियों का एक बड़ा बंडल लेकर आ रहा था और अपने खेतों से बाड़ के आगे चला गया था. सुरक्षा बलों को उसकी हरकत संदिग्ध लगी. तलाशी लेने पर बीएसएफ जवानों ने बंडल के अंदर भारी मात्रा में छिपा हुआ सोना बरामद किया.

इसके साथ ही उसके पास से दो मोबाइल फोन भी मिले. जब्त किये गये सोने और सामान की कुल अनुमानित कीमत करीब 2.4 करोड़ रुपये बतायी गयी है. बिसरा से पूछताछ के बाद बीएसएफ की टीम ने तस्करी के नेटवर्क में जुड़े दूसरे व्यक्ति को भी गिरफ्तार कर लिया. आरोपी का नाम धनजी नामदेव भुजे (34) है, जो महाराष्ट्र के सांगली जिले के गरगनी इलाके का निवासी है. दोनों आरोपियों को प्रारंभिक पूछताछ के बाद आगे की जांच के लिए डीआरआइ के हवाले कर दिया गया है. अधिकारियों का मानना है कि यह गिरोह बड़े पैमाने पर सोना सीमा पार से भारत में लाने का काम करता था और स्थानीय संपर्कों की मदद से इसे आगे महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में सप्लाई करता था.

बीएसएफ ने कहा है कि भारत-बांग्लादेश सीमा पर तस्करी, अवैध गतिविधियों और पार सीमा अपराधों पर लगाम लगाने के लिए उनकी टीम लगातार चौकसी बरत रही है. बल का दावा है कि हाल की कार्रवाई से साबित होता है कि जमीन पर तैनात जवान किसी भी संदिग्ध गतिविधि को तुरंत पकड़ने में सक्षम हैं और जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत ऐसी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी. बरामद सोना किस मार्ग से आया और इसके पीछे कौन-कौन से बड़े नेटवर्क सक्रिय हैं, इसकी जांच डीआरआइ कर रही है. प्रारंभिक स्तर पर इसे एक संगठित तस्करी रैकेट माना जा रहा है.

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Subodh Kumar Singh

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