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विभिन्न रक्त जनित बीमारियों का एक मात्र इलाज बोन मैरो ट्रांसप्लांट : डॉ तूफान दलुई

Updated at : 01 Aug 2025 1:58 AM (IST)
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विभिन्न रक्त जनित बीमारियों का एक मात्र इलाज बोन मैरो ट्रांसप्लांट : डॉ तूफान दलुई

यदि शुरुआत में ही अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण (बीएमटी) किया जाये, तो रोगी के पूरी तरह से ठीक होने की संभावना बहुत अधिक होती है.

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कोलकाता. अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण (बोन मैरो ट्रांसप्लांट) विभिन्न रक्त रोगों का सर्वोत्तम उपचार है. रक्त कैंसर (ल्यूकेमिया), थैलेसीमिया, अप्लास्टिक एनीमिया, लिम्फोमा (नॉन-हॉजकिन), मायलोमा, प्रतिरक्षा न्यूनता विकार, वंशानुगत अस्थि मज्जा विफलता जैसे विभिन्न रक्त रोगों का नाम सुनते ही लोग घबरा जाते हैं. इन बीमारियों से पीड़ितों को शारीरिक और मानसिक समस्याओं के साथ-साथ आर्थिक कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ता है. यदि शुरुआत में ही अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण (बीएमटी) किया जाये, तो रोगी के पूरी तरह से ठीक होने की संभावना बहुत अधिक होती है. ये बातें गुरुवार को प्रेस क्लब में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में प्रो डॉ तूफान दलुई ने कहीं. उन्होंने बताया कि, शुक्रवार और शनिवार को महानगर में दो दिवसीय इस्टर्न इंडिया ब्लड मैरो एंड सेलुलर थेरेपी मीट (इआइबीएमसीटी) का आयोजन होगा. इस सम्मेलन में रक्त संबंधित बीमारियों के इलाज और अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण के लाभ पर चर्चा की जायेगी. उन्होंने बताया हड्डियों में स्थित अस्थि मज्जा रक्त बनाने का कारखाना है. विभिन्न रक्त समूहों की तरह, अस्थि मज्जा से लिए स्टेम कोशिकाओं के भी विभिन्न समूह होते हैं, जिन्हें एचएलए कहा जाता है. अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण तभी संभव है, जब वे मेल खाते हों. इआइबीएमसीटी 2025 के आयोजन सचिव हेमेटोलॉजिस्ट डॉ राजीव डे ने कहा कि हालांकि अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण एक बड़ी सर्जरी की तरह लगता है, वास्तव में, अस्थि मज्जा को विभिन्न सावधानियों के साथ ब्लड ट्रांसफ्यूजन की तरह ही एक प्रक्रिया है. अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण रक्त कैंसर यानी ल्यूकेमिया, थैलेसीमिया, मायलोमा शुरुआत में यह महंगा लग सकता है, लेकिन एक बार खर्च करके इस बीमारी का इलाज संभव है. डॉ तूफान दलुई ने बताया कि आपको बार-बार रक्त चढ़ाने और अन्य दवाओं व जटिलताओं का सामना नहीं करना पड़ता. देश के अन्य राज्यों की तुलना में कोलकाता और पूर्वी भारत में अंतरराष्ट्रीय दिशानिर्देशों के अनुसार इलाज किया जाता है. अन्य राज्यों की तुलना में इसकी लागत काफी कम है. पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में कुल 22 केंद्रों में अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण किया जाता है. सम्मेलन में एनआरएस मेडिकल कॉलेज, कोलकाता मेडिकल कॉलेज एंड आइएचटीएम, अपोलो मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, टाटा मेडिकल सेंटर, ठाकुरपुकुर कैंसर हॉस्पिटल, नारायण सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल (हावड़ा), एचसीजी इकेओ कैंसर सेंटर (कोलकाता), पार्क व्यू सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल कोलकाता, रूबी जनरल हॉस्पिटल आदि भाग ले रहे हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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GANESH MAHTO

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By GANESH MAHTO

GANESH MAHTO is a contributor at Prabhat Khabar.

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