Bengal Election: आप मुझसे ऐसे बात नहीं कर सकते…, बैठक में ज्ञानेश कुमार पर भड़के पर्यवेक्षक अनुराग यादव

Author Ashish Jha
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Bengal Election: आप मुझसे ऐसे बात नहीं कर सकते…, बैठक में ज्ञानेश कुमार पर भड़के पर्यवेक्षक अनुराग यादव

ज्ञानेश कुमार

Bengal Election: यूपी के प्रमुख सचिव अनुराग यादव बैठक के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार से उलझा पड़े. दोनों के बीच बहस हो गयी. इसके बाद ज्ञानेश कुमार ने उन्हें चुनाव पर्यवेक्षक पद से तत्काल हटाने का आदेश दे दिया.

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Bengal Election: कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले कोलकाता में एक हाई लेवल चुनाव समीक्षा हुई. इस बैठक में जमकर बहस हो गई. मामला तब गंभीर हो गया, जब एक वरिष्ठ चुनाव पर्यवेक्षक ने खुले तौर पर CEC ज्ञानेश कुमार को चुनौती दे दी. यूपी कैडर के आईएएस अधिकारी अनुराग यादव को कूच बिहार में तैनात किया गया था. मुख्य चुनाव आयुक्त से बहस के बाद उन्हें पर्यवेक्षक के पद से हटा दिया गया है.

‘आप घर घर वापस चले जायें’

पश्चिम बंगाल में हो रहे विधानसभा चुनाव को लेकर चुनाव आयोग के पूर्ण पीठ की बैठक बुलाई थी. यह एक वर्चुअल मीटिंग थी. इस बैठक के दौरान कूच बिहार दक्षिण के सामान्य पर्यवेक्षक अनुराग यादव ने CEC की ओर से की गई टिप्पणियों पर आपत्ति जताई. अनुराग यादव ने कहा कि आप हमारे साथ ऐसा बर्ताव नहीं कर सकते. हमने इस सेवा में अपने 25 साल दिए हैं. आप इस तरह से बात नहीं कर सकते. स्थिति तब और बिगड़ गई जब CEC ज्ञानेश कुमार ने अनुराग यादव से घर वापस चले जाने को कह दिया. अनुराग यादव उत्तर प्रदेश सरकार में प्रमुख सचिव रैंक के अधिकारी हैं.

बहस के बाद छाया सन्नाटा

इस तीखी बहस के बाद बैठक में कुछ देर के लिए सन्नाटा छा गया. इसके बाद अन्य मुद्दों पर चर्चा फिर से शुरू हुई. चुनाव आयुक्त ने अनुराग यादव को तत्काल प्रभाव से सामान्य पर्यवेक्षक के पद से हटा दिया. हालांकि, चुनाव आयुक्त दफ्तर के सूत्रों ने कहा कि अनुराग यादव को उनके ‘विद्रोही रवैये’ के कारण नहीं, बल्कि पेशेवर अक्षमता के कारण पद से हटाया गया है. आयोग का कहना है कि बैठक के दौरान, अनुराग यादव से उनके निर्वाचन क्षेत्र में मतदान केंद्रों की संख्या से जुड़े कुछ बुनियादी सवाल पूछे गए थे, लेकिन वे सटीक जानकारी देने में विफल रहे. इस पर ज्ञानेश कुमार ने उनकी आलोचना की.

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आयोग की ‘आंख और कान’ होता है पर्यवेक्षक

चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि एक पर्यवेक्षक आयोग की ‘आंख और कान’ होता है. यदि कोई अधिकारी, ज़मीन पर कई दिन बिताने के बाद भी, मतदान केंद्रों की संख्या जैसी बुनियादी जानकारी की पुष्टि नहीं कर पाता, तो इससे पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं. इस बैठक में, कूच बिहार के ‘संवेदनशील मतदान केंद्रों’ के मुद्दे पर भी चर्चा की गई. बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने ऐसे क्षेत्रों में निषेधाज्ञा लागू करने की संभावना का सुझाव दिया.

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आशीष झा

लेखक के बारे में

By आशीष झा

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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