सरकारी स्कूलों में नियुक्ति के नाम पर फर्जीवाड़े का आरोप

Updated at : 30 Jan 2025 1:24 AM (IST)
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सरकारी स्कूलों में नियुक्ति के नाम पर फर्जीवाड़े का आरोप

सरकारी स्कूलों में नौकरी दिलाने के नाम पर फर्जीवाड़ा सामने आया है. आरोप है कि हुगली जिले के आरामबाग महकमा के विभिन्न स्कूलों में एनजीओ की ओर से हजारों ग्रुप डी कर्मियों की नियुक्ति कर दी गयी.

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वेतन नहीं मिलने पर पीड़ित पहुंचे थाने

प्रतिनिधि, हुगली.

सरकारी स्कूलों में नौकरी दिलाने के नाम पर फर्जीवाड़ा सामने आया है. आरोप है कि हुगली जिले के आरामबाग महकमा के विभिन्न स्कूलों में एनजीओ की ओर से हजारों ग्रुप डी कर्मियों की नियुक्ति कर दी गयी. लेकिन महीनों बीतने के बाद भी उन्हें वेतन नहीं मिला. जब पीड़ितों ने स्कूल प्रशासन से संपर्क किया, तो उन्हें जवाब मिला कि स्कूलों ने केवल कर्मचारियों को काम पर रखा था. लेकिन उनके वेतन के भुगतान करने की कोई जिम्मेदारी नहीं थी. ठगी के शिकार कई पीड़ितों ने अब पुलिस से शिकायत की है.

सूत्रों के अनुसार, गत वर्ष जून, जुलाई व अगस्त के दौरान विभिन्न स्कूलों में ग्रुप डी पदों पर भर्ती हुई थी. इस भर्ती में मुख्य रूप से सफाई कार्य, झाड़ू लगाना, चॉक-डस्टर व अन्य सामान की देखरेख जैसी जिम्मेदारियां दी गयीं. कहा गया कि एनजीओ के माध्यम से इन कर्मियों को 12,000 रुपये का मासिक वेतन मिलेगा. कई बेरोजगार युवा लाखों रुपये देकर इस भर्ती प्रक्रिया में शामिल हुए. कुछ स्कूलों में एनजीओ से जुड़े लोगों ने पहले चॉक-डस्टर, फिनाइल और अन्य सामान देकर स्कूल प्रशासन का विश्वास जीतने की कोशिश की. फिर ग्रुप डी कर्मियों की नियुक्ति कर दी. महीनों तक काम करने के बावजूद जब कर्मियों को वेतन नहीं मिला, तो उन्होंने स्कूलों से जवाब मांगा. प्रधानाध्यापक और अन्य शिक्षक यह कहते रहे कि स्कूलों ने अपने स्तर पर कोई भर्ती नहीं की थी, बल्कि एनजीओ की ओर से कर्मचारी उपलब्ध कराये गये थे. जब भुक्तभोगियों ने इस एनजीओ से संपर्क करने की कोशिश की, तो उनका कोई ठिकाना नहीं मिला.

बड़ा सवाल यह है कि जब स्कूलों में इन कर्मियों की भर्ती हो रही थी, तो इसे जिला शिक्षा विभाग (डीआइ, एडीआइ) को सूचित क्यों नहीं किया गया? जब इस मामले को लेकर आरामबाग के एडीआइ कार्यालय जाया गया, तो एडीआइ पलाश राय से मुलाकात नहीं हो सकी. फोन पर संपर्क करने की कोशिश भी असफल रही. कार्यालय के अन्य कर्मी इस घोटाले की खबर सुनकर हैरान रह गये. पीड़िताें ने अब इस मामले की शिकायत थाने में दर्ज करायी है. उनका आरोप है कि वे स्कूल के रजिस्टर में उपस्थिति दर्ज करते थे, यानी उनकी नियुक्ति को आधिकारिक रूप से दर्ज भी किया गया था. सवाल उठ रहे हैं कि जब स्कूलों को कर्मचारियों की आवश्यकता थी, तो उन्होंने आधिकारिक प्रक्रिया से भर्ती क्यों नहीं की? क्या इसमें किसी बड़े गिरोह की संलिप्तता है? पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है. वहीं, पीड़ितों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी और के साथ फर्जीवाड़ा न हो.

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