कोलकाता एयरपोर्ट पर विमान सेवाएं रहीं प्रभावित, 22 उड़ानों में देरी, यात्री परेशान

Updated at : 04 Feb 2025 6:10 AM (IST)
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कोलकाता एयरपोर्ट पर विमान सेवाएं रहीं प्रभावित, 22 उड़ानों में देरी, यात्री परेशान

घने कोहरे के कारण कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर कम दृश्यता होने के कारण सोमवार को विमान सेवाएं प्रभावित हुईं.

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संवाददाता, कोलकाता

घने कोहरे के कारण कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर कम दृश्यता होने के कारण सोमवार को विमान सेवाएं प्रभावित हुईं. कोलकाता एयरपोर्ट स्थित भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआइ) के प्रवक्ता राजेश कुमार ने बताया कि कुल 26 विमानों की आवाजाही प्रभावित हुई है. इसमें विभिन्न गंतव्यों से कोलकाता आनेवाले छह विमान और कोलकाता से विभिन्न गंतव्यों को जानेवाले 16 विमान विलंब हुए. इसके साथ ही ढाका जानेवाले चार विमानों को ढाका में घने कोहरे के कारण दूसरे गंतव्यों के लिए डायवर्ट किया गया.

कोलकाता एयरपोर्ट सूत्रों के मुताबिक, रात एक बजकर 21 मिनट से सुबह आठ बजकर 45 मिनट तक कोहरे के कारण एयरपोर्ट पर कम दृश्यता प्रक्रिया (एलवीपी) लागू की गयी थी. जब दृश्यता 800 मीटर से कम हो जाती है, तो विमान यातायात नियंत्रण (एटीसी) एलवीपी की घोषणा करता है, जिसके बाद ‘फॉलो-मी वाहन’ विमानों को उनके ‘स्टैंड’ तक ले जाते हैं. विमान सेवाएं प्रभावित रहने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा.

कोलकाता एयरपोर्ट के अधिकारी ने बताया कि उड़ानों का सुरक्षित प्रबंधन किये जाने और व्यवधान को कम किये जा सकने के मकसद से इन प्रक्रियाओं में हवाई अड्डा संचालक, एटीसी और पायलट के बीच समन्वय होता है. इससे यह सुनिश्चित होता है कि उन्नत नेविगेशन प्रणाली और ग्राउंड लाइटिंग का उपयोग करके विमान सुरक्षित रूप से उतर सकें और उड़ान भर सकें. सोमवार को उड़ानों के परिचालन में अधिक देरी टल गयी, क्योंकि दृश्यता की स्थिति में परिवर्तन आने पर एलवीपी के दौरान इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस) की मदद से 33 आगमन वाली उड़ाने और 44 प्रस्थान करने वाले विमानों का परिचालन किया गया.

इसके अलावा, कुल 33 उड़ानों ने लैंडिंग के लिए या तो श्रेणी-द्वितीय (कैट-द्वितीय) आइएलएस या कैट-तृतीय आइएलएस का इस्तेमाल किया, जबकि 44 विमानों ने एलवीपी के दौरान कम दृश्यता टेक-ऑफ (एलवीटीओ) का विकल्प चुना. कैट-द्वितीय आइएलएस का प्रयोग तब किया जाता है जब रनवे दृश्यता सीमा कम से कम 300 मीटर या उससे अधिक होती है, जबकि कैट-तृतीय आइएलएस का प्रयोग तब किया जाता है जब यह 300 मीटर से कम हो जाती है.

मालूम हो कि गत रविवार को कोहरे के बीच खराब दृश्यता के कारण कोलकाता एयरपोर्ट पर कुल 13 उड़ानों के आगमन तथा प्रस्थान में देरी हुई थी. गत 23 जनवरी को कुल 72 उड़ानें, 24 जनवरी को 34 उड़ानें और 25 जनवरी को 53 उड़ानें प्रभावित हुई थीं.

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