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कोलकाता में मोहन भागवत को नहीं मिली कार्यक्रम की अनुमति, RSS ने हाईकोर्ट में दायर की PIL

Updated at : 12 Jan 2017 6:55 PM (IST)
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कोलकाता में मोहन भागवत को नहीं मिली कार्यक्रम की अनुमति, RSS ने हाईकोर्ट में दायर की PIL

कोलकाता : नोटबंदी के बाद से केंद्र सरकार और राज्य की ममता बनर्जी सरकार में तकरार बढ़ती जा रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तृणमूल कांग्रेस के नेता लगातार हमले बोल रहे हैं. यहां तक कि बदजुबानी भी सामने आयी है. दूसरी तरफ टकराव का असर कार्यक्रमों पर भी दिखने लगा है. इधर कोलकाता में […]

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कोलकाता : नोटबंदी के बाद से केंद्र सरकार और राज्य की ममता बनर्जी सरकार में तकरार बढ़ती जा रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तृणमूल कांग्रेस के नेता लगातार हमले बोल रहे हैं. यहां तक कि बदजुबानी भी सामने आयी है. दूसरी तरफ टकराव का असर कार्यक्रमों पर भी दिखने लगा है.

इधर कोलकाता में आरएसएस के होने वाले कार्यक्रम पर रोक लगा दिया गया है. संघ को अपने कार्यक्रम की अनुमति के लिए अदालत की शरण में जाना पड़ा था, लेकिन पुलिस ने आरएसएस को कार्यक्रम करने की अनुमति नहीं दी. आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत इस सभा को संबोधित करनेवाले थे. कोलकाता में अपने कार्यक्रम को प्रशासन की ओर से अनुमति नहीं मिलने के बाद आरएसएस ने हाईकोर्ट मेंजनहित याचिका दायर की है. आरएसएस की दायर याचिका पर हाईकोर्ट कल सुनवाई करेगा.

गौरतलब हो कि हाइकोर्ट ने कोलकाता के पुलिस आयुक्त को 14 जनवरी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की प्रस्तावित सभा की अनुमति मांगने वाले आवेदन पर 24 घंटे में फैसला करने का निर्देश दिया था.

आरएसएस के प्रचारक सार्दुल सिंह जैन ने संगठन की तरफ से दायर एक याचिका में दावा किया था कि पुलिस अधिकारियों ने उनके आवेदन पर फैसला नहीं किया, जबकि 29 दिसंबर को ही उन्हें यह सौंप दिया गया था. याचिकाकर्ता ने कोलकाता पुलिस के अधिकारियों को यह निर्देश देने की मांग की कि वह शहर के खिदिरपुर इलाके के भूकैलाश रोड पर 14 जनवरी को सभा करने की इजाजत दें.

आरएसएस की ओर से पेश हुए वकील अनिंद्य मित्रा ने कहा कि 14 जनवरी को प्रस्तावित सभा के आवेदन पर फैसला नहीं करके कोलकाता पुलिस के अधिकारी अभिव्यक्ति की आजादी के लोगों के मौलिक अधिकार में दखल दे रहे हैं. इसपर न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची ने कोलकाता के पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया था कि वह कानून के मुताबिक अरजी पर विचार करें और 24 घंटे के भीतर फैसला कर अदालत को बताएं.

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