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भाजपा, माकपा के तथ्यान्वेषी दल हिंसा प्रभावित मालदा से लौटे, राजनीति तेज

Updated at : 11 Jan 2016 9:43 PM (IST)
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भाजपा, माकपा के तथ्यान्वेषी दल हिंसा प्रभावित मालदा से लौटे, राजनीति तेज

मालदा/नयी दिल्ली/कोलकाता : भाजपा और माकपा के तथ्यान्वेषी दलों को अधिकारियों ने आज पश्चिम बंगाल में मालदा जिले के हिंसा प्रभावित कालियाचक का दौरा करने की अनुमति नहीं दी जिसके बाद विवाद शुरू हो गया और राज्य की सत्तारुढ़ तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा पर विधानसभा चुनावों से पहले हालात को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश […]

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मालदा/नयी दिल्ली/कोलकाता : भाजपा और माकपा के तथ्यान्वेषी दलों को अधिकारियों ने आज पश्चिम बंगाल में मालदा जिले के हिंसा प्रभावित कालियाचक का दौरा करने की अनुमति नहीं दी जिसके बाद विवाद शुरू हो गया और राज्य की सत्तारुढ़ तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा पर विधानसभा चुनावों से पहले हालात को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश करने का आरोप लगाया.

भाजपा सांसदों- भूपेंद्र यादव, रामविलास वेदांती और राज्य से संसद सदस्य एसएस अहलूवालिया की तथ्यान्वेषी टीम को आज सुबह छह बजे गौर एक्सप्रेस से मालदा टाउन स्टेशन पर उतरते ही जिला अधिकारियों ने निषेधाज्ञा का हवाला देते हुए वापस लौटा दिया. इस पर भाजपा ने तीखा हमला बोला और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर ‘‘वोट बैंक’ की राजनीति करने का आरोप लगाया तथा कहा कि पार्टी मामले को राष्ट्रपति तक ले जाएगी. भाजपा ने कहा कि वह केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से इलाके के मौजूदा हालात की उच्चस्तरीय जांच का आदेश देने का अनुरोध करेगी.
कुछ घंटे बाद माकपा सांसद और पोलित ब्यूरो के सदस्य मोहम्मद सलीम के नेतृत्व में जा रहे पार्टी के एक दल को भी कालियाचक जाने से रोक दिया गया. भाजपा के भूपेंद्र यादव ने दावा किया कि उन्हें हावडा शताब्दी एक्सप्रेस से लौटने को विवश कर दिया गया.
उन्होंने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल सरकार की यह कार्रवाई निन्दनीय है.’ अहलूवालिया ने कहा कि टीम गृहमंत्री राजनाथ सिंह से क्षेत्र में स्थिति का जायजा लेने के लिए एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन करने का आग्रह करेगी. उन्होंने कहा, ‘‘दौरे का उद्देश्य लोगों को सांत्वना देना और उन्हें यह विश्वास दिलाने का था कि इस तरह की चीज भविष्य में नहीं होगी. राज्य सरकार के दबाव की वजह से जिला प्रशासन ने कहा कि हम वहां नहीं जा सकते क्योंकि वहां सीआरपीसी की धारा 144 लगी है.’
घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भाजपा नेता सिद्धार्थ नाथ सिंह ने दिल्ली में कहा कि इस संबंध में पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति से मिलेगा. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की तीन सदस्यीय टीम को वहां नहीं जाने देने का फैसला ममता की वोट बैंक की राजनीति का एक ‘‘आदर्श उदाहरण’ है.
उन्होंने कहा, ‘‘तानाशाह राज्य सरकार अपराधियों के लिए सहानुभूति रखती है, लेकिन राष्ट्रवादियों को यह तमंचा दिखाती है.’ मोहम्मद सलीम ने कोलकाता में कहा कि माकपा की टीम को अधिकारियों ने कानून व्यवस्था की स्थिति का हवाला देते हुए लौटा दिया.
सलीम ने कहा, ‘‘मैं अपने पार्टी नेताओं के साथ कालियाचक जा रहा था. यह पूर्व नियोजित कार्यक्रम था, लेकिन अचानक से बडी संख्या में पुलिस बल ने हमें रोक दिया. हमें मालदा के अमरीति इलाके में रोका गया जो कालियाचक से 35 किलोमीटर दूर है. मैंने उनसे कहा कि एक सांसद होने के नाते तथ्यों का पता करना और लोगों से बातचीत करना मेरा कर्तव्य है. परंतु उन्होंने कहा कि वे मुझे जाने की इजाजत नहीं दे सकते.’
माकपा सांसद ने कहा, ‘‘मैं प्रशासन से पूछना चाहता हूं कि वे क्या छिपाने का प्रयास कर रहे हैं जो कि दूसरे सभी राजनीतिक दलों को रोका जा रहा है?’ तृणमूल कांग्रेस ने तुरंत जवाबी हमला बोला. पार्टी के मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता डेरेक ओ ब्रायन ने कोलकाता में एक बयान में कहा, ‘‘भाजपा…आरएसएस ने अपनी रणनीति के तहत अपनी सोशल मीडिया फौज के जरिए इसे सांप्रदायिक मुद्दा बनाने की कोशिश की. उन्होंने ट्विटर पर हैशटैग ट्रेंडिंग कर, सालभर पुरानी तस्वीरें साझा कर और गैरजिम्मेदाराना पोस्ट साझा कर यह किया.’
सिद्धार्थ नाथ सिंह ने दिल्ली में मीडिया से बातचीत में ममता बनर्जी सरकार के इस स्पष्टीकरण को खारिज कर दिया कि हिंसा मालदा में तीन जनवरी को बीएसएफ और स्थानीय लोगों के बीच कुछ मुद्दों को लेकर भड़की. सिंह ने दावा किया कि इसके पीछे का उद्देश्य पुलिस थाने में रखे नकली मुद्रा रैकेट से संबंधित रिकॉर्ड को नष्ट करना था.
इस घटना में बेकाबू भीड़ ने कालियाचक थाने और कई वाहनों को आग लगा दी थी. भीड़ कथित तौर पर एक हिन्दू नेता द्वारा मोहम्मद पैगंबर के खिलाफ की गई टिप्पणियों को लेकर विरोध कर रही थी. सिंह चुनावी राज्य में भाजपा के प्रभारी भी हैं. उन्होंने कहा कि प्रदर्शन ‘‘निन्दनीय’ टिप्पणियों के एक महीने से अधिक समय बाद हुआ और यह स्वत:स्फूर्त नहीं, बल्कि योजनाबद्ध था.
इस बीच भाकपा ने मालदा हिंसा की घटना के समय पर सवाल खडा़ करते हुए इसके लिए तृणमूल कांग्रेस और भाजपा दोनों को जिम्मेदार ठहराया और आरोप लगाया कि यह पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले वोटों का ध्रुवीकरण करने की दोनों दलों की कोशिश है.
भाकपा के राष्ट्रीय सचिव डी राजा ने राज्य के मतदाताओं से अपील की कि राज्य के धर्मनिरपेक्ष तानेबाने को समाप्त करने की सोच को नाकाम कर दिया जाए. राजा ने विश्वास जताया कि राज्य की जनता दोनों दलों के इरादों को भलीभांति समझती है और चुनावों में वाम दलों का साथ दे सकती है.
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