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शाहीन बाग में धरना पर भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने दिया विवादित बयान

Updated at : 28 Jan 2020 9:38 PM (IST)
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शाहीन बाग में धरना पर भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने दिया विवादित बयान

कहा – नोटबंदी में लोग मरे…. शाहीन बाग में भी एक-दो मर ही सकते थे कोलकाता : विवादित बयानों को लेकर सुर्खियों में रहे प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष दिलीप घोष ने मंगलवार को शाहीन बाग पर दिये अपने बयान से विवाद से घिर गये हैं. कलकत्ता प्रेस क्लब में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान श्री […]

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कहा – नोटबंदी में लोग मरे…. शाहीन बाग में भी एक-दो मर ही सकते थे

कोलकाता : विवादित बयानों को लेकर सुर्खियों में रहे प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष दिलीप घोष ने मंगलवार को शाहीन बाग पर दिये अपने बयान से विवाद से घिर गये हैं. कलकत्ता प्रेस क्लब में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान श्री घोष ने शाहीन बाग में चल रहे धरना पर सवाल का जवाब देते हुए कहा : नोटबंदी के दौरान ममता बनर्जी ने कहा था कि लाइन में लगने से 100 लोगों की मौत हो गयी थी.

शाहीन बाग को लेकर पूरे देश में चर्चा हो रही है. लोग दिन-रात धरना दे रहे हैं. लोगों का आरोप है कि 500 रुपये के एवज में धरना दे रहे हैं. मेरे मन में यह सवाल है कि नोटबंदी के दौरान लाइन में तीन-चार घंटे खड़े होने से मौत हो जा रही थी और शाहिनबाग में तीन-चार डिग्री तापमान में बच्चा लेकर दिन रात आंदोलन पर बैठे हैं. वहां तो कोई नहीं मर रहा है? एक-दो लोग तो मर ही सकते हैं? क्या खाये हैं, जो कोई मर भी नहीं रहा है, इतने कष्ट के बावजूद.

उन्‍होंने कहा कि ममता बनर्जी भी कुछ नहीं बोल रही हैं. इन्हें किस तरह की इनसेंटिव मिल रही है. जेएनयू की चालाकी सामने आ गयी है और शाहीन बाग की चालाकी भी सामने आ जायेगी. पार्क सर्कस में चल रहे आंदोलन पर कटाक्ष करते हुए श्री घोष ने कहा : सभी नाटक चल रहा है. यह आम लोगों का आंदोलन नहीं है. स्वाभाविक आंदोलन नहीं है. इसके पीछे पैसे व भारतीय संस्कृति व हित का विरोध करने वाले लोग शामिल हैं.

पीएफआई द्वारा फंडिंग के मामले पर ईडी की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए श्री घोष ने कहा : पीएफआई का चिंताजनक मामला है. कपिल सिब्बल जैसे लोगों का नाम इससे जुड़ गया है. बड़ी मात्रा में इसमें पैसों का लेने-देन हुआ है. अयोध्या आंदोलन के समय भी आंदोलन को दबाने के लिए विदेश से पैसे लिये गये थे. विदेशी पैसों की मदद से आंदोलन हो रहे हैं.

उन्होंने सवाल किया : देश में केवल चार विश्वविद्यालयों में ही क्यों आंदोलन हो रहे हैं? यदि देश के लोग सीएए नहीं चाहते, तो पूरे देश में आंदोलन होता. अन्य राज्यों में भी होता. ईडी ने ये बातें कही है, कोई राजनीतिक दल नहीं कह रहा है. इसके पीछे साजिश है. उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था बिगाड़ने से कुछ लोगों को लाभ होगा, लेकिन राज्य का लाभ नहीं होगा. आज छात्र-युवा ममता के साथ नहीं हैं. छात्र व युवा समाज मोदी के साथ है.

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