कभी भी ढह सकती कृष्णा ग्लास फैक्टरी
Author Prabhat khabar digital desk
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फैक्टरी के एक हिस्से में है अवैध कब्जा कोलकाता : जादवपुर के राजा सुबोध चंद्र मल्लिक रोड स्थित कृष्ण ग्लास फैक्टरी दशकों से बंद पड़ी है. रखरखाव के अभाव में फैक्टरी की हालत जर्जर हो चुकी है. दीवारों पर झाड़-झंखाड़ उग गये हैं. फैक्टरी का एक हिस्सा असामाजिक तत्वों का अड्डा बन चुका है. कारखाना […]
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फैक्टरी के एक हिस्से में है अवैध कब्जा
कोलकाता : जादवपुर के राजा सुबोध चंद्र मल्लिक रोड स्थित कृष्ण ग्लास फैक्टरी दशकों से बंद पड़ी है. रखरखाव के अभाव में फैक्टरी की हालत जर्जर हो चुकी है. दीवारों पर झाड़-झंखाड़ उग गये हैं. फैक्टरी का एक हिस्सा असामाजिक तत्वों का अड्डा बन चुका है. कारखाना परिसर थर्मोकोल, गंदगी एवं शीशे की बोतलों से पटा हुआ है.
फैक्टरी परिसर में जगह-जगह फैली गंदगी डेंगू-मलेरिया को दावत दे रही है. ज्ञात हो कि यह फैक्टरी पॉश इलाके में है. इसके मुख्य प्रवेश द्वार पर रिक्शा, ऑटो स्टैंड व आसपास कई आवासीय इमारतें हैं. अपनी आयु सीमा के अंतिम पड़ाव में पहुंच चुकी फैक्टरी के आसपास हजारों की संख्या में लोग रह रहे हैं.
ऐसे में कब और किस दिन जर्जर फैक्टरी जमींदोज हो जाये, कुछ कहा नहीं जा सकता. बावजूद इसके प्रशासन और नगर निगम की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है. मानसून के सीजन में जरूर निगम अधिकारियों को इस फैक्टरी की याद आ जाती है. यहां कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया जाता है और पेड़ों की टहनियों को काट दिया जाता है. बरसात के बाद अधिकारी सालभर के लिए फिर खामोश हो जाते हैं. सालों से यह सिलसिला चला आ रहा है, लेकिन मौत के रूप में खड़ी कृष्णा ग्लास फैक्टरी पर नींद नहीं टूट रही. इसकी चाहरदीवारी और भवनों का हिस्सा जगह-जगह से टूट कर गिर रहा है.
राज्य सरकार की है फैक्टरी
कोलकाता के 102 नंबर वार्ड स्थित यह फैक्टी राज्य सरकार की संपत्ति है, जो 1985 से बंद पड़ी हुई है. यहां कांच की बोतलें तैयार की जाती थीं, लेकिन प्लास्टिक का प्रचलन बढ़ जाने से शीशे की बोतलों की मांग घटने लगी और घाटे में चल रही इस फैक्टरी को तत्कालीन वाममोर्चा सरकार ने बंद करवा दिया था.
डेंगू ने लोगों को किया परेशान
ज्ञात हो कि जादवपुर से गरिया जाने वाली मुख्य सड़क के एक किनारे कृष्णा ग्लास फैक्टरी व दूसरी ओर 96 नंबर वार्ड है. स्थानीय लोगों को कहना है कि ग्लास कारखाने की इस दशा के कारण गत वर्ष 102 व 96 नंबर वार्ड में डेंगू के मामले देखे गये थे. डेंगू के सबसे अधिक मामले 96 नंबर वार्ड में सामने आये थे.
ओपेन वैट से भी लोग परेशान
फैक्ट्री की जमीन पर ही निगम ने एक ओपेन वैट भी तैयार किया है, जहां हर दिन हजारों किलों कचरा जमा होता है. हालांकि निगम द्वारा हर रोज कचरा उठाया भी जाता है. इसके बाद भी यहां इतनी गंदगी फैली रहती है कि नाक को बगैर ढके यहां से गुजर नहीं सकते. फैक्टरी के एक हिस्से में अवैध कब्जा कर बोतल बंद पानी के स्टोर रूम के रूप में इस्तेमल किया जा रहा है.
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